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सिवनी (अंग्रेजी :Seoni) भारत के मध्य प्रदेश का एक जिला है। सिवनी जबलपुर संभाग के अन्तर्गत आता हैँ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 इस जिले से होकर जाता हैँ।यह के पडोसी जिले उत्तर दिश की ओर जबलपुर,मंडला, नरसिँहपुर जिले है ,पूर्व दिशा की ओर बालाघाट पश्चिम दिश की ओर छिँदवाडा और दक्षिण दिशा कि ओर नागपुर(महाराष्ट्र) हैं। जिले की 8 तहसील में बांटा गया है, जिसमे सिवनी, लखनादौन, केवलारी, घंसौर, छपारा, बरघाट,कुरई और धनौरा है। सिवनी जिले को 4 विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित किया गया है,जो है - सिवनी,बरघाट,केवलारी,लखनादौन। जिले के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यह जनजातीय बाहुल है! छ्पारा गोंड राजा राम सिंह की गड़ी है

सिवनी
—  शहर  —
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
ज़िला सिवनी
नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमति आरती शुक्ला विधायक श्री दिनेश राय "मुनमुन" सांसद सिवनी/ बालाघाट श्री डॉ. ढालसिंह बिसेन
जनसंख्या
घनत्व
13,79,131 (2011 के अनुसार )
आधिकारिक भाषा(एँ) हिन्दी
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
8758 Km square कि.मी²
• 611 मीटर( 2,005 फीट) मीटर

बेन गंगा नदीसंपादित करें

इस नदी का उद्गम स्थल मुंडारा है। यह नदी जिले कि जीवन रेखा है। इसी नदी पर एशिया का सबसे बडा मिट्टी से बना बांध संजय सरोवर छपारा के अन्तर्गत भीमगढ़ में बना है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यानसंपादित करें

यह राष्ट्रीय उद्यान 757.85 किलोमीटर पर फैला है यह बफर जोन के अन्तर्गत आता है इस बाघ अभ्यारण मे बाघ, नीलगाय, बारहसिंगा, हिरन, मोर, बन्दर, काले हिरन, सांभर, जंगली सुअर, सोनकुत्ता एवं अन्य जानवर तथा अनेक प्रकार के पक्षी बहुतायत में पाये जाते है। खासकर बाघ को देखेने पर्यटक दूर दूर से आते है नोबेल पुरस्कार विजेता रुडयार्ड किपलिंग जब भारत लौटे और लगभग अगले साढ़े छह साल तक यहीं रह कर काम किया।लिखी गयी कहानी द जंगल बुकजंगल बुक के कथानक में मोगली नामक एक बालक है जो जंगल मे खो जाता है और उसका पालन पोषण भेड़ियों का एक झुंड करता है, अंत मे वह गाँव में लौट जाता है। इसलिए इस जिले को पहचान मोंगली लैँड के नाम से भी जाना जाता हैँ।

दलसागरसंपादित करें

यह सिवनी जिले का बडा तालाब है इसके बीच पर एक टापू है यह एक दर्शनिक स्थल हैँ।

धार्मिक स्थलसंपादित करें

(1) कातलबोड़ी मातृधाम यह जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सस्वती की माँ कि जन्म स्थली है ओर भव्य मंदिर है।

(2) आष्टा - बरघाट तहसील का एक गांव जहां पर मां काली जी का पत्थरों से बना भव्य मंदिर है।

(3) दिघौरी- पितृधाम मे जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सस्वती का जन्म स्थली है यहा विशाल भव्य स्फटीक शिवलिँग मंदिर हैँ।

(4) साँई मँदिर

(5) बंजारी मंदिर जबलपुर रोड पर छपारा लोखनादौन के बीच मे स्थित।

(6) सीलादेही

(7) महाकालेश्वर प्रसिद्ध तीर्थस्थल (8) पायली घंसौर से लगभग २७ किलो मीटर दूर स्थित एक पिकनिक प्लेस हैं (9) गुड़ी गुफा (यह चट्टानों से बनी प्राचीनकालीन गुफ़ा) जिसकी आन्तरिक क्षेत्रफ़ल लगभग २५ वर्ग मीटर हैं , घंसौर से १८ किलोमीटर ग्राम पोडी से २ किलोमीटर अंदर ग्राम गुड़ी के निकट स्थित है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें