हसरत जयपुरी मसऊदी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं।

हसरत जयपुरी मसऊदी
हसरत जयपुरी मसऊदी
हसरत जयपुरी मसऊदी
पृष्ठभूमि की जानकारी
जन्मनामइकबाल अहमद मसऊदी
जन्म15 अप्रैल 1922
जयपुर, राजपुताना, ब्रिटिश भारत
वर्तमान राजस्थान में )
मृत्यु17 सितम्बर 1999(1999-09-17) (उम्र 77)
मुंबई, महाराष्ट्र , भारत
गीतकार
सक्रिय वर्ष1949–1999

प्रारंभिक जीवनसंपादित करें

हसरत जयपुरी का जन्म जयपुर में इकबाल हुसैन के रूप में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी का अध्ययन बस शुरुआती स्तर तक ही किया था, और अपनी आगे की शिक्षा अपने नाना फिदा हुसैन "फिदा" से उर्दू और फारसी में ग्रहण की। जब वह लगभग बीस वर्ष के थे तब उन्होंने कविता लिखना शुरू किया था। उसी समय, उन्हें उनके पड़ोस में रहने वाली एक हिन्दु लड़की राधा से प्यार हो गया। हसरत ने इस लड़की को लिखे एक प्रेम पत्र के बारे में, एक साक्षात्कार में कहा कि प्रेम कोई धर्म नहीं जानता है। हसरत जयपुरी के हवाले से कहा गया, "यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि एक मुस्लिम लड़के को एक मुस्लिम लड़की से ही प्यार होना चाहिए। मेरा प्यार चुप था, लेकिन मैंने उसके लिए एक कविता लिखी थी, "ये मेरा प्रेमपत्र पढ़ कर, के तुम नाराज़ न होना” यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है कि प्रेम पत्र वास्तव में राधा को दिया गया था या नहीं। लेकिन अनुभवी फिल्म निर्माता राज कपूर ने इसे अपनी फिल्म संगम (1964 की हिंदी फिल्म) में शामिल किया और यह गीत पूरे भारत में 'हिट' हो गया।[1]

बॉलीवुड कॅरियरसंपादित करें

1940 में जयपुरी एक बस परिचालक की नौकरी के लिए मुंबई आ गए, जहाँ उन्हें मासिक वेतन के रूप में ग्यारह रुपये मिलते थे। वह मुशायरों में हिस्सा लेते थे। एक मुशायरे में, पृथ्वीराज कपूर ने जयपुरी की शायरी सुनी और अपने बेटे राज कपूर से उनके लिए सिफारिश की। राज कपूर उन दिनों शंकर जयकिशन के साथ एक संगीतमय प्रेम कहानी, बरसात (1949) की योजना बना रहे थे। जयपुरी ने फिल्म के लिए अपना पहला गीत "जिया बेकरार है" लिखा। उनका दूसरा गीत (और पहला युगल गीत) "छोड़ गए बालम" था।

शैलेन्द्र के साथ, जयपुरी ने 1971 तक राज कपूर की सभी फिल्मों के लिए गीत लिखे। जयकिशन की मृत्यु के बाद तथा मेरा नाम जोकर (1970) और कल आज और कल (1971) की असफलताओं के बाद, राज कपूर ने अन्य गीतकारों और संगीत निर्देशकों की ओर रुख किया। राज कपूर शुरू में उन्हें प्रेम रोग (1982) के लिए वापस बुलाना चाहते थे, लेकिन बाद में एक और गीतकार, अमीर क़ज़लबाशके लिए राज़ी हो गए। कपूर ने आखिरकार उन्हें फिल्म राम तेरी गंगा मैली (1985 ) के लिए गीत लिखने के लिए कहा। बाद में, उन्होंने हसरत को फिल्म हिना (1991) के लिए तीन गाने लिखने के लिए भी आमंत्रित किया। जयपुरी ने आरोप लगाया कि राज कपूर की मृत्यु के बाद, संगीतकार रवींद्र जैन ने उनके गीतों को हटाने और उन्हें अपने स्वयं के गीतों के साथ बदलने की साजिश रची।

जब साथी गीतकार शैलेन्द्र ने निर्माता के तौर पर फ़िल्म तीसरी कसम बनाई, तब उन्होंने जयपुरी को फिल्म के लिए गीत लिखने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने फिल्म हलचल (1951) के लिए पटकथा भी लिखी। गीतकार के रूप में उनकी आखिरी फिल्म हत्या: द मर्डर (2004) थी।

कुछ चुनिंदा गीतसंपादित करें

  • जिया बेकरार है
  • छोड़ गए बालम
  • अजीब दास्तां है ये
  • ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना
  • तेरी प्यारी प्यारी सूरत को
  • पंख होते तो उड़ आती रे
  • सायोनारा सायोनारा
  • आओ ट्विस्ट करें
  • सुन साहिबा सुन
  • बदन पे सितारे लपेटे हुए

निजी जीवनसंपादित करें

जयपुरी ने अपनी कमाई को अपनी पत्नी की सलाह पर अचल संपत्ति या किराये की संपत्ति में निवेश किया। इन संपत्तियों से कमाई से उनकी वित्तीय स्थिति अच्छी थी, और इसलिए वह एक गीतकार के रूप में अपना समय समर्पित कर सकते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके दो बेटे और एक बेटी हैं जो मुंबई में रहते हैं।

यह भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Hasrat Jaipuri profile on urdupoetry.com website". 13 अक्टूबर 2001. मूल से 13 जनवरी 2002 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जनवरी 2020.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें