अष्टदिग्गज (तेलुगु: అష్టదిగ్గజాలు) विजयनगर राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विभूषित आठ कवियों के लिये प्रयुक्त शब्द है। कहा जाता है कि इस काल में तेलुगु साहित्य अपनी पराकाष्ठा तक पहुंच गया था। कृष्णदेव के दरबार में ये कवि साहित्य सभा के आठ स्तम्भ माने जाते थे। इस काल (१५४० से १६००) को तेलुगू कविता के सन्दर्भ में 'प्रबन्ध काल' भी कहा जाता है।[1]

ये अष्टदिग्गज ये हैं-

  1. अल्लसानि पेदन्न,
  2. नन्दि तिम्मन,
  3. धूर्जटि,
  4. मादय्यगारि मल्लन
  5. अय्यलराजु रामभध्रुडु
  6. पिंगळि सूरन
  7. रामराजभूषणुडु (भट्टुमूर्ति)
  8. पंडित तेनालि रामकृष्णा

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Prabandhamulu". Microsoft. मूल से 2008-02-11 को पुरालेखित.

इन्हें भी देखेंसंपादित करें