इब्राहिम खान गर्दी (1761) में हुए पानीपत का तीसरे युद्ध में मराठा शासकों को के लिए लड़े थे । सदाशिवराव भाऊ के नियंत्रण में तोप गोला विभाग का नियंत्रण कर रहे थे.इब्राहिम खान गर्दी भील जनजाति से संबधित थे , उनके पूर्वज भील थे [1] । इब्राहिम खान गर्दी मराठा शासकों के लिए लड़ने से पहले कर्नाटक में निजाम के लिए तोप खाना विभाग में काम कर रहे थे परंतु बालाजी बाजीराव के प्रस्ताव मिलने के बाद वह मराठा में शामिल हो गए. वह 1761 मैं हुए पानीपत के तीसरे युद्ध में मारे गए. अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व में लड़ रहे अफगान सेनाओं ने उन्हें पकड़कर बुरी तरह से मार दिया. इब्राहिम खान गर्दी के साथ मराठा सैन्य के सदाशिव राव भाऊ, विश्वास राव मारे गए. इब्राहिम फ्रेंच तोपखाने को संभालते थे और उनको काफी ज्यादा फ्रेंच तरीके से तोपखाने का अनुभव था। उनको तोप चलाने का अनुभव था। इस कारण से बालाजी बाजीराव ने उनको उपयोगिता को समझते हुए उन्हें निजाम से अपनी सेना में भर्ती कर लिया जिस कारण इब्राहिम खान गर्दी का अनुभव काफी काम आने वाला था परंतु मराठा सेना की भीषण पराजय हुई। 14 जनवरी 1761 के दिन और उसी के दिन बहुत ही बुरी तरीके से इब्राहिम खान गर्दी को अफगान सैनिकों द्वारा मार दिया गया उनकी महानता आज भी प्रचलित है और उन्होंने अपने देश के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए।

संदर्भसंपादित करें

  1. साँचा:Https://www.google.com/url?sa=t&source=web&rct=j&url=https://enacademic.com/dic.nsf/enwiki/6202859&ved=2ahUKEwix9 Oh6oXqAhXYe30KHQERDmAQFjADegQIAhAB&usg=AOvVaw0 nRy3bpfCjwHniMnUKEbW