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खुमुलुङ, त्रिपुरा राज्य के पश्चिमी त्रिपुरा ज़िले का एक नगर है। यह त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वशासी जिला परिषद का मुख्यालय एवं सबसे बड़ा नगर है। यह राज्य की राजधानी अगरतला से लगभग २६ किमी पश्चिम की ओर अवस्थित है। टीटीएएडीसी के मुख्यालय को यहाँ वर्ष १९९६ में स्थापित किया गया था। स्थानीय कोकबोरोक भाषा में, खुमुलुङ नाम का अर्थ होता है फूलों का बागीचा

खुमुलुङ
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नगर
खुमुलुङ ᱠᱷᱩᱢᱩᱞᱩᱝ की त्रिपुरा के मानचित्र पर अवस्थिति
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खुमुलुङ
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खुमुलुङ ᱠᱷᱩᱢᱩᱞᱩᱝ की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
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खुमुलुङ
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निर्देशांक: 23°28′N 91°16′E / 23.47°N 91.26°E / 23.47; 91.26निर्देशांक: 23°28′N 91°16′E / 23.47°N 91.26°E / 23.47; 91.26
देशFlag of India.svg भारत
राज्यत्रिपुरा
ज़िलापश्चिमी त्रिपुरा
भाषाएँ
 • आधिकारिककोकबोरोक, अंग्रेजी, हिंदी और बंगाली
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड799 045
दूरभाष कोड91-0381
वाहन पंजीकरणTR
वेबसाइटtripura.gov.in

अनुक्रम

जनसंख्यकी एवं संस्कृतिसंपादित करें

जातीय जनसांख्यिकी के लिहाज से, इस क्षेत्र में लगभग 99% जनित त्रिपुरी लोग हैं। तथा स्थानीय भाषा कोकबोरोक है, जोकि एक चीन-तिब्बती भाषा परिवार की भाषा है। खुमुलुङ, त्रिपुरा आदिवासी स्वशासित ज़िला परिषद् का मुख्यालय है, जिसे मूलतः स्थानिया जनजाति को शसक्त करने, स्वशासित अधिकार देने, तथा स्थानीय सभ्यता, संस्कृति, एवं जीवन शैली की संरक्षण हेतु स्थापित किया गया था। यहाँ के मूल त्रिपुरी लोगों की अपनी भिन्न पहचान है, जोकि राज्य की बहुसंख्य बंगाली आबादी से अलग हैं। त्रिपुरी लोग, पूर्वोत्तर भारत के कई अन्य स्थानिया जनजातियों के सामान, मूलतः मंगोलियड मूल के तथा उनकी सभ्यता, संस्कृति, इतिहास व परम्पराएँ, भारत के अन्य लोगों से भिन्न है, एवं अपने में ही विशिष्ट है। इसके अलावा, पिछली सदियों में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों के कारण, यहाँ की स्थानिया संस्कृति में ईसाई धर्म का भी प्रभाव है, एवं कई लोग ईसाई धर्म के भी अनुयाई हैं।

कोकचाप नोकसंपादित करें

 
परिषद् भवन(काउन्सिल नोक)

इस नगर की सबसे महत्वपूर्ण व विशिष्ठ संरचना, त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वशासी जिला परिषद का जिला परिषद भवन है, जिसे स्थानिया भाषा में काउन्सिल नोक या कोकचाप नोक भी कहा जाता है।

त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वशासी जिला परिषद

त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वशासी जिला परिषद(टीटीएएडीसी), त्रिपुरा राज्य के त्रिपुरी बहुल इलाकों को प्रशशित करने वाला स्वशासित निकाय है। इसकी स्थापना का मूल लक्ष्य स्थानीय आदिवासी जनों को स्वसं शासन करने हेतु शसक्त करना, यहाँ के समाज के पिछड़े लोगों का चौतरफा विकास, तथा स्थानीय, सभ्यता, संस्कृति व परंपराओं का संरक्षण है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें