ठाकुर

भारतीय उपमहाद्वीप की ऐतिहासिक उपाधि

ठाकुर एक उपाधि है जो बड़ी और छोटी रियासतों के राजाओं,बड़े ज़मीदारों जाट, अहीर व राजपूतों को दी गई थी। ठाकुर शब्द का अर्थ "स्वामी" माना जाता है, जैसे की "ठाकुर घर" अर्थात पूजाघर है।[1]उत्तर भारत में यह विभिन्न क्षत्रिय राजपूत समुदायों के उपनाम या उपाधि के लिए प्रयुक्त होता रहा है।[2][3][4][5][6]

ठाकुर लखजीराजसिंहजी द्वितीय राजकोट के बावजीराजसिंहजी

सन्दर्भसंपादित करें

  1. शर्मा, राजमणि. आधुनिक भाषा विज्ञान. वाणी प्रकाशन. पृ॰ 266. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2020.
  2. Suresh Singh, Kumar (1996). Communities, Segments, Synonyms, Surnames and Titles. Anthropological Survey of India. पृ॰ 1706. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780195633573.
  3. शर्मा, राजमणि. आधुनिक भाषा विज्ञान. वाणी प्रकाशन. पृ॰ 266. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2020.
  4. Virbhadra Singhji (1994). The Rajputs of Saurashtra. Popular Prakashan. p. 61. ISBN 81-7154-546-7.
  5. "How Thakurs have dominated UP politics since Independence". The Indian Express (अंग्रेज़ी में). 2020-10-15. अभिगमन तिथि 2021-06-16.
  6. "A Perspective on the Western Front by an Indian Army Office on the Western Front by Dr DeWitt C Ellinwood | The Western Front Association". www.westernfrontassociation.com. अभिगमन तिथि 2021-06-16.