नवद्वीप (Nawadwip) या नबद्वीप (Nabadwip) भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के नदिया ज़िले में स्थित एक नगर है।[1][2]

नवद्वीप / नबद्वीप
Nabadwip
নবদ্বীপ
Dhameswar Mahaprabhu in Dhameswar Mahaprabhu temple (Cropped).jpg
Buro Shib of Nabadwip.jpgডুমুরেস্বরী মাতা.jpg
Porama, Nabadwip.jpgOld Mahaprabhu Temple in Nabadwip.jpg
Boat over River Ganges in Nabadwip.jpg
धामेश्वर महाप्रभु मंदिर में चैतन्य महाप्रभु, शाक्त रास उत्सव में डुमुरेश्वरी माता, पुराना महाप्रभु मंदिर, गंगा नदी, माँ पोरामा, बुढ़ो शिव
नवद्वीप is located in पश्चिम बंगाल
नवद्वीप
नवद्वीप
पश्चिम बंगाल में स्थिति
निर्देशांक: 23°25′N 88°22′E / 23.42°N 88.37°E / 23.42; 88.37निर्देशांक: 23°25′N 88°22′E / 23.42°N 88.37°E / 23.42; 88.37
देश भारत
प्रान्तपश्चिम बंगाल
ज़िलानदिया ज़िला
स्थापना1063 ईसवी
ऊँचाई14 मी (46 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल1,25,543
भाषाएँ
 • प्रचलितबांग्ला
पिनकोड741302
दूरभाष कोड03472
वाहन पंजीकरणWB 52
लोकसभा निर्वाचनक्षेत्रराणाघाट
विधानसभा निर्वाचनक्षेत्रनवद्वीप

विवरणसंपादित करें

यह भागीरथी और जलंगी नदियों के संगम पर कृष्णनगर से आठ मील पश्चिम में स्थित प्रसिद्ध नगर है। यह हिंदुओं का एक तीर्थस्थान है। १४८५ ई. में चैतन्य महाप्रभु का जन्म यहीं हुआ था। १२वीं शताब्दी में सेनवंश के राज्य की राजधानी थी। इस नगर को पहले 'नदिया' कहा जाता था। यहाँ वर्ष भर तीर्थयात्री आया करते हैं। यह पश्चिम बंगाल के नदिया जिला के मुख्यालय से मात्र 20 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित है। पर्यटक कृष्णनगर से आसानी से नवद्वीप तक पहुंच सकते हैं

वाणिज्य व उद्योगसंपादित करें

यह धातुओं के बरतन तथा मिट्टी के कलात्मक बरतनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ गन्ना, चावल, तिलहन और पटसन का व्यवसाय होता है। यहाँ पर संस्कृत के अध्ययन के लिए अनेक प्रसिद्ध महाविद्यालय हैं।

चैतन्य महाप्रभु का जन्मस्थानसंपादित करें

श्री चैतन्य महाप्रभु की जन्मभूति नवद्वीप है। यह कृष्ण्नगर पहले नवद्वीप पर सेन वंश का शासन था। उन्होंने यहां पर अनेक मन्दिरों का निर्माण कराया था। इन मन्दिरों में द्ववादास सहिब मन्दिर प्रमुख हैं। इस खूबसूरत मन्दिर का निर्माण 1835 ई. में किया गया था। मन्दिर की दीवारों को फूलों के चित्रों से सजाया गया है जो इसकी सुन्दरता को कई गुणा बढ़ा देते हैं। इस मन्दिर में चैतन्य महाप्रभु के सुन्दर चित्रों और प्रतिमाओं के दर्शन भी किए जा सकते हैं। यहाँ इस्कॉन द्वारा निर्मित एक भव्य मन्दिर भी दर्शनीय है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें