नासक हीरा [1][2] एक 43.38 कैरट (8.676 ग्राम) का बडा हीरा है जो भारत में १५वीं शताब्दी में एक बड़े ८९ कैरेट के हीरे के रूप में उत्पन्न हुआ।[3] ये कोल्लूर की गोलकोंडा खदानों में पाया गया और मूल रूप से भारत में काटा गया थी। ये हीरा महाराष्ट्र राज्य के नासिक के पास, त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर, में कम से कम सन् १५०० से सन् १८१७ तक था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के माध्यम से हीरे पर कब्जा कर लिया और इसे १८१८ में ब्रिटिश जौहरी रुंडेल और ब्रिज को बेच दिया। रुंडेल और ब्रिज ने १८१८ में हीरे को वापस तराशा,[4] जिसके बाद इसे वेस्टमिंस्टर के पहले मार्केज़ की तलवार के हैंडल में सजाया।

नासक हीरा 
43.38 carats (8.676 g) diamond
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16°04′N 78°23′E / 16.07°N 78.38°E / 16.07; 78.38निर्देशांक: 16°04′N 78°23′E / 16.07°N 78.38°E / 16.07; 78.38
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Нассак (uk); Алмаз из Нассака (ru); नासक हिरा (mr); നസ്സാക്ക് വജ്രം (ml); नासक हीरा (hi); Nassak Diamond (en-gb); Nassak Diamond (en-ca); Nassak Diamond (en); நாசக் வைரம் (ta) 43.38 carats (8.676 g) diamond (en); 43.38 carats (8.676 g) diamond (en)

नासक हीरे को १९२७ में संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात किया गया था, और १९३० तक दुनिया के पहले २४ महान हीरों में से एक माना जाता था। [3] अमेरिकी ज्वैलर हैरी विंस्टन ने १९४० में पेरिस, फ्रांस में नासक हीरे का अधिग्रहण किया और इसे अपने वर्तमान दोषरहित 43.38 कैरट (8.676 ग्राम) के रुप में लाया। [5] विंस्टन ने हीरे को १९४२ में न्यूयॉर्क की एक जौहरी की फर्म को बेच दिया। न्यूयॉर्क की श्रीमती विलियम बी लीड्स ने १९४४ में शादी की छठी वर्षगांठ के रूप में ये हीरा प्राप्त की और इसे एक अंगूठी में पहना। नासक हीरे को आखिरी बार १९७० में न्यूयॉर्क में नीलामी में ग्रीनविच, कनेक्टिकट के ४८ वर्षीय ट्रकिंग फर्म के कार्यकारी अधिकारी एडवर्ड जे हैन्ड ने खरीदा।[6] वर्तमान में हीरे को लेबनान के एक निजी संग्रहालय में रखा गया है, हालांकि भारतीय मंदिर में इसकी वापसी और बहाली के लिए मांग की जाती हैं।[7]

इतिहाससंपादित करें

नासक हीरे की उत्पत्ति भारत में १५वीं शताब्दी में हुई थी।[3] यद्यपि हीरे को मूल तराशने की तिथि अज्ञात है, भारत में ये ही ये तराशा गया और कोहिनूर हीरे के समान रूप और स्वरूप दिया था।[8] कम से कम सन् १५०० से सन् १८१७ तक, नासक हीरे ने ऊपरी गोदावरी नदी पर भारत के नासिक के पास, त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर के शिवलिंग को सुशोभित किया। हीरे ने अंततः अपना नाम अपनी दीर्घकालिक निकटता से नासिक से हासिल कर लिया।

सन् १८१७ में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और भारत के मराठा साम्राज्य में तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध शुरू हुआ। मराठा युद्ध के दौरान, नासक हीरा शिव मंदिर से गायब हो गया। [3] १८१८ में युद्ध समाप्त हो गया और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के अधिकांश हिस्सों पे कब्जा कर लिया।

नासक हीरा बाजी राव द्वितीय [9] के कब्जे में आ गया, जो अंतिम पेशवा राजकुमार थे जिन्होने जे. ब्रिग्स नामक एक अंग्रेज कर्नल को हीरा सौंप दिया था। [3] ब्रिग्स ने हीरे को फ्रांसिस रॉडन-हेस्टिंग्स, हेस्टिंग्स के पहले मार्क्वेस को वितरित किया जिन्होंने पेशवा के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था। रॉडन-हेस्टिंग्स ने मराठा युद्ध की लूट के हिस्से के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी को हीरा दिया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने १८१८ में लंदन के हीरे के बाजार में बेचेने के लिए नासक हीरे को इंग्लैंड भेजा।

 
नासाक हीरे के १८७६ के रूप का वेक्टर चित्र।

वर्तमान जानकारीसंपादित करें

१९६४ की शुरुआत में, जेमोलॉजिस्ट जी रॉबर्ट (बॉब) क्राउनिंगशिल्ड ने डायमंड ग्रेडिंग रिपोर्ट तैयार करने के लिए जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका की रत्न प्रयोगशाला में नासक हीरे का मूल्यांकन किया और यह आंतरिक रूप से निर्दोष है एसा बताया [10][11]

अप्रैल १९७० की शुरुआत में, इस हीरे को दुनिया के तीस महान पत्थरों में से एक का दर्जा दिया गया।[12] १६ अप्रैल १९७० को हीरे को ५०००,००० डॉलर (लगभग ३.२९ मिल्यन डॉलर) में एडवर्ड जे हॉन्ड ने खरीदा।[6] यह उस समय एक हीरे के लिए दूसरा सबसे अधिक नीलामी मूल्य था, जो पहले टेलर-बर्टन डायमंड के लिए $ १.१ मिलियन के करीब था।

संदर्भसंपादित करें

  1. CCPA 2003: p. 118.
  2. Oldershaw, Cally (2004). Firefly Guide to Gems. Firefly Books. पपृ॰ 33. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-55297-814-1. अभिगमन तिथि 15 November 2008. Nassak Diamond.
  3. CCPA 2003: p. 121.
  4. CCPA 2003: p. 117.
  5. Dickinson, Joan Y. (2001). The Book of Diamonds: Their History and Romance from Ancient India to Modern Times. Courier Dover Publications. पृ॰ 215. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-486-41816-2. मूल से 24 फ़रवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 November 2008.
  6. "43 कैरट (8.6 ग्राम) Diamond, Once an Idol's Eye, Sold for $500,000". New York Times. 17 April 1970. पृ॰ 32. मूल से 18 अक्तूबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 November 2008.
  7. "'Bring back India's Nassak diamond from Lebanon'". 25 March 2018 – वाया www.thehindu.com.
  8. Streeter, Edwin W. (1884). "XXXV". The Great Diamonds of the World: Their History and Romance (The Nassak संस्करण). George Bell & Sons. पृ॰ 229. मूल से 3 नवंबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 November 2008. When it reached Europe the "Nassak," which had been badly cut in India, presented very much the form and appearance of the "Koh-i-Nur", the native cutter having, as usual, sacrificed everything to size.
  9. The Gemmologist. 1–2. 1931–1933. पृ॰ 385. अभिगमन तिथि 15 November 2008.
  10. Moses, Thomas M. (Fall 2003). ". Robert (Bob) Crowningshield:A :egendary Gemologist" (PDF). 38 (3). Gemological Institute of America: 190. मूल (PDF) से 19 November 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 November 2008. Entry:Famous diamond. Comments: 43.38 ct Nassak diamond submitted for examination. Lab notes volume: 11. No. 8. Issue: W 1964–1965. Page: 245 Cite journal requires |journal= (मदद)
  11. Stegman, Emily (Spring 2006). "History Repeating. After 170 years in the industry, the DeYoung family continues to support GIA with each passing generation". 15 (2). Gemological Institute of America. मूल से 9 June 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 November 2008. Cite journal requires |journal= (मदद)
  12. "Nassak Diamond Set for Auction; Parke-Bernet to Sell Indian Rarity on April 16". New York Times. 5 April 1970. पृ॰ 75. मूल से 22 जुलाई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 November 2008.