नेहरू–गांधी परिवार

भारतीय राजनीति

नेहरू–गांधी परिवार भारत का एक प्रमुख राजनीतिक परिवार है, जिसका देश की स्वतन्त्रता के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर करीब-करीब वर्चस्व रहा है। नेहरू परिवार के साथ गान्धी नाम फिरोज गान्धी से लिया गया है, जो इन्दिरा गान्धी के पति थे। गान्धी नेहरू परिवार में गान्धी शब्द महात्मा गान्धी से जुड़ा हुआ नहीं है।

नेहरू–गांधी परिवार
संजाति मिश्रित (कश्मीरी, गुजराती, पंजाबी, बंगाली, इतालवी)
वर्तमान क्षेत्र नई दिल्ली, भारत
जानकारी
उद्गम स्थल जम्मू और कश्मीर, भारत
भरूच, गुजरात, भारत
उल्लेखनीय सदस्य राज कौल
गंगाधर नेहरू
नन्दलाल नेहरू
मोतीलाल नेहरू
बृजलाल नेहरू
रामेश्वरी नेहरू
जवाहरलाल नेहरू
विजय लक्ष्मी पंडित
उमा नेहरू
कृष्णा हठीसिंह
इन्दिरा गांधी
बृज कुमार नेहरू
नयनतारा सेहगल
श्याम कुमारी खान
फिरोज़ गांधी
राजीव गांधी
संजय गांधी
अरुण नेहरू
सोनिया गांधी
मेनका गांधी
राहुल गांधी
प्रियंका वाड्रा
रॉबर्ट वाड्रा
वरुण गांधी
यामिनी राय चौधरी
परम्पराएँ हिन्दू[1][2]
नेहरू परिवार का सन् 1927 का चित्र खड़े हुए (बायें से दायें) जवाहरलाल नेहरू, विजयलक्ष्मी पण्डित, कृष्णा हठीसिंह, इंदिरा गांधी और रंजीत पण्डित; बैठे हुए: स्वरूप रानी, मोतीलाल नेहरू और कमला नेहरू

इस परिवार के तीन सदस्य - पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इंन्दिरा गान्धी और राजीव गान्धी देश के प्रधानमन्त्री रह चुके थे, जिनमें से दो - इन्दिरा गान्धी और राजीव गान्धी की हत्या कर दी गयी। नेहरू–गांधी परिवार के चौथे सदस्य राजीव गान्धी के पुत्र राहुल गान्धी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।वर्तमान में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी हैं "जो कि इटली की रहने वाली थी"राजीव गांधी से शादी करने के बाद सोनिया गांधी भारत की नागरिक है। राहुल गान्धी ने 2004 , 2009,2014 अपने पारिवारिक सीट अमेठी (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंचे. वर्तमान में राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद हैं। 2019 के चुनाव में राहुल गांधी 2 सीट से चुनाव लड़े एक अपने पारिवारिक सीट अमेठी (उत्तर प्रदेश)और दूसरि वायनाड (केरल) अमेठी से वह बीजेपी नेत्री स्मृति ईरानी से हार गये।

राजीव गान्धी के छोटे भाई संजय गांधी की विधवा पत्नी मेनका गान्धी व उनके पुत्र वरुण गांधी को परिवार की सम्पत्ति में कोई हिस्सा न मिलने के कारण[कृपया उद्धरण जोड़ें] वे माँ-बेटे भारतीय जनता पार्टी में चले गये जो देश का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है।

उत्पत्ति का संक्षिप्त इतिहाससंपादित करें

नेहरू परिवार का सम्बन्ध मूलत: कश्मीर से है। नेहरू ने अपनी आत्मकथा मेरी कहानी में इस बात का उल्लेख किया है कि स्वयं फर्रुखसियर[3] ने उनके पुरखों को सन् सत्रह सौ सोलह के आसपास दिल्ली लाकर बसाया था। दिल्ली के चाँदनी चौक में उन दिनों एक नहर हुआ करती थी। नहर के किनारे बस जाने के कारण उनका परिवार नेहरू के नाम से मशहूर हो गया।

अपने दादा गंगाधर के विषय में नेहरू ने लिखा है कि वे अठारह सौ सत्तावन के गदर के कुछ पहले दिल्ली के कोतवाल थे। गदर में हुई भयंकर मारकाट की वजह से उनका परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गया और खानदान के तमाम कागज़-पत्र और दस्तावेज़ तहस-नहस हो गये। इस तरह अपना सब कुछ खो चुकने के बाद उनका परिवार दिल्ली छोड़ने वाले और कई लोगों के साथ वहाँ से चल पड़ा और आगरा जाकर बस गया।

अठारह सौ इकसठ में चौंतिस साल की भरी जवानी में ही वह मर गये। अपने दादा गंगाधर की एक छोटी सी तस्वीर का जिक्र करते हुए नेहरू ने लिखा है कि वे मुगलिया लिबास पहने किसी मुगल सरदार जैसे लगते थे।[4] वकौल नेहरू उनके दादा की मौत के तीन महीने बाद 1861 में उनके पिता मोतीलाल नेहरू का जन्म आगरे में हुआ। उनके पिता सहित पूरे परिवार की परवरिश उनके चाचा ताऊओं ने की।

1857 के विद्रोह से पहले मोतीलाल के पिता मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के जमाने में दिल्ली के नगर कोतवाल थे।

मोतीलाल नेहरू ने पहले वकालत पढ़ी, फिर वकालत की और अन्त में हाईकोर्ट इलाहाबाद आ गये। संयोग से उनके बड़े भाई नन्दलाल नेहरू की मृत्यु हो गयी जिससे उनके सारे मुवक्किल मोतीलाल को मिल गये और उनकी वकालत में पैसा पानी की तरह बरसा। इलाहाबाद में ही उनके बड़े बेटे जवाहर का जन्म हुआ। मोतीलाल नेहरू के मुंशी मुबारक अली[5] बचपन में बालक जवाहर को पुराने जमाने की कहानियाँ सुनाया करते थे कि किस प्रकार उसके दादा को बागियों ने अठारह सौ सत्तावन के गदर में तबाह कर दिया। अगर मुसलमानों ने उनकी हिफ़ाजत न की होती तो नेहरू खानदान का कहीं नामोनिशान तक न होता।[6]

नेहरू–गांधी परिवार का राजनीतिक आधार मोतीलाल नेहरू (1861-1931) ने रखा था। मोतीलाल नेहरू एक प्रसिद्ध वकील और स्वतन्त्रता सेनानी थे। मोतीलाल नेहरू के पिता का नाम गंगाधर नेहरू और माँ का नाम जीवरानी था।[7] मोतीलाल के पुत्र जवाहरलाल नेहरू (1889-1964) ने स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया और 1929 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। जवाहरलाल नेहरू गान्धी के काफी करीब थे।

नेहरू के कोई पुत्र न था, उनकी एक पुत्री इंदिरा गांधी थी। जिनका विवाह फिरोज़ गांधी से हुआ और इसी पीढ़ी से ये वंश चल रहा है।

नेहरू का वंश-वृक्षसंपादित करें

 
 
 
 
 
 
मोतीलाल नेहरू
 
स्वरूपरानी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
कमला नेहरू
 
जवाहरलाल नेहरू
 
विजयलक्ष्मी पंडित
 
रणजीत सीताराम पंडित
 
 
कृष्णा हतीसिंह
 
गुणोत्तम हतीसिंह
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
इन्दिरा गांधी
 
फिरोज़ गांधी
 
नयनतारा सहगल
 
हर्ष हतीसिंह
 
अमृता हतीसिंह
 
अजीत हतीसिंह
 
हेलेन आर्मसस्ट्रोंग
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
गीता सहगल
 
 
 
 
 
 
 
रवि हतीसिंह
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
राजीव गांधी
 
सोनिया गांधी
 
 
 
 
 
संजय गांधी
 
मेनका गांधी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
राहुल गांधी
 
प्रियंका वाड्रा
 
रॉबर्ट वाड्रा
 
 
 
वरुण गांधी
 
यामिनी गांधी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
रेहान वाड्रा
 
मिराया वाड्रा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Traditional Hindu wedding for Priyanka Gandhi. Retrieved 16 July 2013.
  2. Mrs Gandhi Hindu daughter in law says Retrieved 16 July 2013.
  3. नेहरू, जवाहरलाल (1984). मेरी कहानी. 2 (6 संस्करण). नई दिल्ली: सस्ता साहित्य. पृ॰ 9. OCLC 58907011.
  4. नेहरू, जवाहरलाल (1984). मेरी कहानी. 2 (6 संस्करण). नई दिल्ली: सस्ता साहित्य. पृ॰ 10. OCLC 58907011.
  5. नेहरू, जवाहरलाल (1984). मेरी कहानी. 2 (6 संस्करण). नई दिल्ली: सस्ता साहित्य. पृ॰ 18. OCLC 58907011.
  6. क्रान्त, मदनलाल वर्मा (2006). स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास. 2 (1 संस्करण). नई दिल्ली: प्रवीण प्रकाशन. पृ॰ 472. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7783-120-8.
  7. "The Founder of the Nehru Dynasty" [नेहरू वंश के संस्थापक] (अंग्रेज़ी में). द नवहिन्द टाइम्स. 23 अप्रैल 2011. गायब अथवा खाली |url= (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया जाना चाहिए (मदद)

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें