शोध कर्ता अशोक अमृतम, ग्वालियर.. गर्म पानी पीने से बढ़ रहा है थायराइड, जोड़ों का दर्द, कमर में दर्द और सूजन ऐसा क्यों?.... अमृतम पत्रिका, ग्वालियर

सुबह उठते ही गर्म या गुनगुना पानी पीने से जोड़ों का लुब्रिकेंट या चिकनाहट कम होने लगती है। भविष्य में कमरदर्द, जोड़ों, पिंडलियों, का दर्द शुरू हो जाता है।

करेला और नीम चढ़ा वाली बात जब होती है कि सुबह ही पानी में नीबू का रस मिलाकर लेते हैं। थायराइड की समस्या इसी वजह से बढ़ रही है।

प्राचीन काल के पुराने लोग किसी भी चीज का उपयोग जैसे का तैसा ही करते थे। जिस प्रकार प्रकृति ने हमें प्रदान किया है।

भारत के लोग सीधे-सच्चे, भावुक होने के कारण किसी भी बात पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं।

गर्म पानी की यह परम्परा अभी 10–5 सालों से जानबूझकर शुरू करवाई गई है, ताकि लोग अधिक से अधिक बीमार हों और डॉक्टर की शरण में जाकर अपनी जान-जायदाद बर्बाद कर सकें।

ध्यान रखें परमात्मा ने जैसा जो भी दिया है, उसे वैसा ही इस्तेमाल करें। यदि हमारे शरीर के लिए गर्म पानी लाभकारी होता, तो मां धरती हमें गर्म पानी ही देती।

उत्तराखंड, मनाली, हिमाचल के अनेक तीर्थों में गर्म पानी के कुंड, झरने हैं। वहां हमें इसकी जरूरत है, तो भोलेनाथ ने पहले ही व्यवस्था कर दी।

गूगल पर इतना भरमजाल बिना किसी सन्दर्भ ग्रन्थ-किताबों के फैला दिया है कि-जो भी इस पर विश्वास करेगा, उसका सर्वनाश हो जाएगा।

इन सब उल्टी-सीधे ज्ञान से चिकित्सा जगत को बेशुमार लाभ हो रहा है। यह एक ठगने वाली गैंग की तह काम करके पूरे स्वस्थ्य भारत को बीमार कर रहा है।

लोगों या लेखकों के जो मन में आ रहा है, वे बिना सोचे समझे लिखे जा रहे हैं।

■ क्यों पीना चाहिए सुबह सादा जल-

आयुर्वेद के कुछ प्राचीन नियमों पर गौर करें। हमारे पूर्वजों की भी यही परम्परा थी, तभी सौ वर्ष जीते थे-

क्या करें तन्दरुस्त रहने के लिए 17 खास जानकारी-

आयुर्वेद के अनेक ग्रंथो में जल चिकित्सा का वर्णन आया है। इन ग्रंथों का अध्ययन करें..

◆ औषधि शास्त्र, ◆ रस रत्नाकर,

◆ शरीर शास्त्र, ◆ रक्ताभिसरण शास्त्र,

■ रसेन्द्र मंगल, जल चिकित्सा, ■ कक्षपुटतंत्र एवं

■ आरोग्य मंजरी आदि आयुर्वेदिक पुस्तकों में उल्लेख है कि- सुबह जब व्यक्ति सोकर उठता है, तो उसकी जठराग्नि अर्थात पेट की गर्मी तेज रहती है, इसलिए उठकर सदैव सादा पानी पीने से उदर तथा शरीर की गर्माहट शान्त हो जाती है, जिससे शरीर में कभी अकड़न- जकड़न नहीं होती।

सादे जल के पीने से वात-पित्त-कफ कुपित नहीं होते। हमें केवल त्रिदोष रहित रहने का प्रयास करना चाहिए।

वात-पित्त-कफ का संतुलन बनाये रखने के लिए आयुर्वेद लाइफ स्टायल किताब का अध्ययन व अमल करें। यह सदैव स्वस्थ्य रखने में मदद करेगा। इस बुक से त्रिदोष में किसकी अधिकता है यह भी जान सकते हैं।

सावधान रहें- गर्म पानी का सेवन ग्रन्थिशोथ पैदा कर सकता है…

थायरॉइड (ग्रन्थिशोथ) जैसे वात रोग नहीं सताते। इसलिए सुबह उठते ही सादा जल पीना ही श्रेष्ठ रहता है।

मधुमेह से पीड़ित लोगों को सुबह सुबह कभी भी गर्म पानी नहीं पीना चाहिए, इससे पेट में खुश्की उत्पन्न होती है।

आयुर्वेद के अधिकांश ग्रंथों में लिखा है कि- प्रकृति ने हमें जैसा, जो दिया है, वही स्वास्थ्य के लिये लाभकारी है और जहां गर्म पानी की जरूरत है, वहां परमात्मा ने गर्म पानी दिया है। जैसे-यमुनोत्री, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा तथा रोशनपुर गुरुद्वारा आदि स्थानों पर प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड हैं।

हिमाचल के मणि महेश शिवालय, पार्वती लेक, भृगु लेक में भी गर्म पानी का झरना है।

कुछ नियम जिन्हें सहजता से

अपनाया जा सकता है--

【】भरपूर पानी पिएं। गर्मियों के दिनों में

दिन भर में कम से कम 8 से 9 लीटर

और सर्दी में 4 से 5 लीटर पानी शरीर के लिए जरूरी है।

बुढापा रोकता है सादा जल और झुर्रियों से बचाव…

आयुर्वेद के जल चिकित्सा ग्रन्थ तथा

वैद्य कल्पद्रुम में उल्लेख है कि

कम उम्र में चेहरे पर जो झुर्रियां पड़ती हैं,

उसकी वजह शरीर में पानी की कमी है।

जल का पर्याप्त मात्रा में उपयोग

उम्ररोधी बताया गया है।

पानी ऐसे पियें-जैसे खा रहे हों

आयुर्वेद की एक सलाह है कि-

भोजन ऐसे करें, जैसे पी रहे हों

अर्थात खाने को बहुत चबा-चबाकर

जब तक कि वह पानी की तरह

तरल न हो जाये। धीरे-धीरे

खाने से कभी मोटापा नहीं बढ़ता।

औऱ पानी को ऐसे पियें जैसे खा रहे हों।

पानी को हमेशा धीरे-धीरे बैठकर ही

पीना बहुत लाभकारी होता है।

खड़े होकर जल ग्रहण करने से

घुटनों व जोड़ों में दर्द की शिकायत

हो जाती है। यह पीड़ा बुढ़ापे में

बहुत दुःख देती है। इसलिए पानी हमेशा

बैठकर ही पीना चाहिए।

आयुर्वेद के नियम कुछ कठिन जरूर हैं पर भयंकर लाभदायक भी हैं। थोड़ा सा समय देकर आप शरीर के साथ-साथ बहुत सारी सम्पत्ति बचा सकते हैं।

सुन्दरता वृद्धि में सहायक….।

एक ग्रन्थ में बताया है कि जो लोग

बहुत आराम से एक-एक घूंट करके पानी पीने की आदत बना लेते हैं, उनके चेहरे पर निखार आता चला जाता है। सुन्दरता में वृद्धि होती है।

चमकदार त्वचा और जवां बने रहने हेतु पानी पीने के पहले 3 से 4 बार बहुत गहरी श्वांस लेकर धीरे-धीरे छोड़ना चाहिए, फिर पानी पिएं।

जल को सदैव सम्मान के साथ, अच्छे विचारों से, पवित्र भाव से पीना चाहिए।

पीसीओडी स्त्रीरोग एवं मासिक धर्म की समस्या से पाएं निजात-

जिन स्त्रियों, महिलाओं, नवयौवनाओं को

अक्सर माहवारी से सम्बंधित परेशानी

या विकार हों, उन्हें सुबह उठते ही

बिना कुल्ला किये खाली पेट

2 से 3 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार अकेला पानी भी प्रतिरक्षा तन्त्र को बहुत मजबूत कर देता है। पानी पीने से शरीर के 100 से अधिक विकार मूत्र विसर्जन के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

पथरी से बचाव-

पर्याप्त पानी पीने वालों को कभी

पथरी की शिकायत नहीं होती।

मूत्ररोग, मधुमेह विकार, उदर रोग उत्पन्न नहीं होते।

एसिडिटी हो शान्त-

जब कभी पेट में गेसा बनती हो या

अम्लपित (एसिडिटी) की दिक्कत हो

या फिर, बार-बार हिचकी आ रही हो,

तो हर 2 या 3 मिनिट में

एक गिलास पानी को 15 से 20

मिनिट तक एक-एक घूंट करके पीते रहें।

एसिडिटी, हिचकी, पेट की जलन बेचैनी दूर हो जाती है।

दिमाग को तेज करता है- सोने का पानी…

सोने के बर्तन का पानी ब्रेन यानि दिमाग की सुप्त नाडियों को जागृत करने में चमत्कारी है। इसे अक्टूबर से मार्च (सर्दियों में) पीना चाहिए।

तांबे के पात्र का पानी….

ताम्बे के बर्तन का पानी रक्त तथा

अवयवों की शुद्धि के लिए अत्यंत

फायदेमंद है इसे अप्रैल से सितम्बर

(वर्षा ऋतु) तक पीना उपयोगी है।

मिट्टी के घड़े का जल..

मिट्टी के घड़े का पानी शरीर की जलन,

मानसिक वेदना, पेट की बीमारियों को

दूर करने में सहायक है इसे मार्च से जून (गर्मियों में) पीना हितकर रहता है।

एक बात और ध्यान रखें कि-

आजकल थायराइड, मधुमेह की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसका कारण भी गर्म पानी का ज्यादा सेवन ही है।

गर्म पानी के अधिक सेवन से जोड़ों में लुब्रिकेंट या ग्रीस या चिकनाहट कम होती है, जिससे हड्डियों में चरमराहट की आवाज आने लगती है।

जोड़ों में सूजन, चलने में परेशानी, आलस्य, सुस्ती आदि की परेशानी हम गर्म पानी पी पीकर पैदा कर रहे हैं।

सावधान इंडिया….

देश में एक ऐसा वर्ग है, जो बहुत ही भ्रामक जानकारी गूगल आदि सोशल मीडिया पर डालकर भ्रमित रहा है। लोग इस कारण ज्यादा बीमार हो रहे हैं।

बिना किसी ग्रन्थ या शास्त्र सम्मत किसी भी बात पर विश्वास न करें। तभी आप स्वस्थ्य रह सकेंगे। अतः वही लेख विश्वसनीय माने, जिन पर ग्रन्थ आदि का सन्दर्भ हो या किताब का फोटो हो।

आप की मर्दाना ताकत क्षीण हो सकती है…

अधिक नीबू का उपयोग वीर्य को पतला करता है। इस वजह से नपुंसकता आ सकती है। प्रकृति ने जो जैसा दिया है, वैसा ही हमें उपभोग करना चाहिए।

क्या इतना शुद्ध शहद प्रकृति दे रही है-जरा सोंचे…

अब शुद्ध शहद देश में बहुत कम उपलब्ध है। मैसूर, 36 गढ़, अमरावती, हिमाचल आदि जंगलों के शुद्ध शहद की कीमत 500 से 700/- रुपये किलो खरीदी मूल है।

फिर, इसे साफ-फिल्टर करने के बाद पैक करना आदि के कारण घर में ही लगभग 800/- रुपये किलो पड़ता है। बाजार में बिकने वाला ब्रांडेड मधु 300 से 400,/- रुपए किलो मिलना कैसे सम्भव है। इस पर डिस्ट्रीब्यूटर को 40 से 50 फीड तक कमीशन आदि खर्चे भी मिलते हैं। मार्केटिंग, विज्ञापन का व्यय अलग है।

आपको चेतन्य होने की जरूरत है।

ज्यादा मधु-शहद के सेवन से बचें…

आजकल 99 फीसदी मधु ग्लूकोज, इन्वर्ट शुगर से बनाकर नकली बेचा जा रहा है।

अगर आपको शुद्ध मधु चाहिए, तो एक बार अमृतम द्वारा पैक किया हुआ शुद्ध शहद मधु पंचामृत के नाम से 50 ग्राम की छोटी शीशी मंगवाकर चेक कर सकते हैं। मधु पंचामृत केवल ऑनलाईन ही उपलब्ध है।

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नल का पानी
खनिज जल (मिनरल वाटर)

पीने का पानी या पीने योग्य पानी (पानीय जल), समुचित रूप से उच्च गुणवत्ता वाला पानी होता है जिसका तत्काल या दीर्घकालिक नुकसान के न्यूनतम खतरे के साथ सेवन या उपयोग किया जा सकता है। अधिकांश विकसित देशों में घरों, व्यवसायों और उद्योगों में जिस पानी की आपूर्ति की जाती है वह पूरी तरह से पीने के पानी के स्तर का होता है, लेकिन वास्तविकता में इसके एक बहुत ही छोटे अनुपात का उपयोग सेवन या खाद्य सामग्री तैयार करने में किया जाता है।

दुनिया के ज्यादातर बड़े हिस्सों में पीने योग्य पानी तक लोगों की पहुंच अपर्याप्त होती है और वे बीमारी के कारकों, रोगाणुओं या विषैले तत्वों के अस्वीकार्य स्तर या मिले हुए ठोस पदार्थों से संदूषित स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह का पानी पीने योग्य नहीं होता है और पीने या भोजन तैयार करने में इस तरह के पानी का उपयोग बड़े पैमाने पर त्वरित और दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बनता है, साथ ही कई देशों में यह मौत और विपत्ति का एक प्रमुख कारण है। विकासशील देशों में जलजनित रोगों को कम करना सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख लक्ष्य है।

सामान्य जल आपूर्ति नेटवर्क पीने योग्य पानी नल से उपलब्ध कराते हैं, चाहे इसका उपयोग पीने के लिए या कपड़े धोने के लिए या जमीन की सिंचाई के लिए किया जाना हो. इसके बिल्कुल विपरित चीन के शहरों में पीने का पानी वैकल्पिक रूप से एक अलग नल के द्वारा (अक्सर आसुत जल के रूप में), या अन्यथा नियमित नल के पानी के रूप में उपलब्ध कराया जाता है जिसे उबालने की जरूरत होती है।

सामान्यसंपादित करें

 
वाहन पर लगी टंकी से पेय जल की आपूर्ति
 
जल को पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया का एक सामान्य रूप

मनुष्यों के लिए पानी हमेशा से एक महत्वपूर्ण और जीवन-दायक पेय रहा है और यह सभी जीवों के जीवित रहने के लिए अनिवार्य है।[1] वसा को छोड़कर मात्रा के हिसाब से मानव शरीर का लगभग 70% हिस्सा पानी है। यह चयापचयी प्रक्रियाओं का एक महत्वपूर्ण घटक है और कई शारीरिक विलेयों के लिए यह एक विलायक के रूप में कार्य करता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने ऐतिहासिक रूप से कम से कम आठ गिलास, प्रत्येक में आठ द्रव औंस (168 मिलीलीटर) प्रतिदिन (64 द्रव औंस या 1.89 लीटर) पानी के उपयोग का सुझाव दिया था[2][3] और ब्रिटिश डाइटेटिक एसोसिएशन 1.8 लीटर की सिफारिश करता है।[1] संयुक्त राज्य अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (युनाइटेड स्टेट्स एनवायरोनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी) की जोखिम मूल्यांकन गणना का अनुमान है कि औसत अमेरिकी वयस्क प्रति दिन 2.0 लीटर पानी पीते हैं।[3]

पानी की गुणवत्ता और संदूषकसंपादित करें

दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में अपरिष्कृत पानी के प्रदूषण का सबसे आम स्रोत मानव मल (नालों से बहने वाला गंदा पानी) और विशेष रूप से मल संबंधी रोगाणु और परजीवी हैं। वर्ष 2006 में जलजनित रोगों से प्रति वर्ष 1.8 मिलियन लोगों के मारे जाने का अनुमान था जबकि लगभग 1.1 मिलियन लोगों के पास उपयुक्त पीने के पानी का अभाव था।[4] यह स्पष्ट है कि दुनिया के विकासशील देशों में पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता के पानी, जल शुद्धीकरण तकनीक और पानी की उपलब्धता एवं वितरण प्रणालियों तक लोगों की पहुंच होना आवश्यक है। दुनिया के कई हिस्सों में पानी का एकमात्र स्रोत छोटी जलधाराएं हैं जो अक्सर नालों की गंदगी से सीधे तौर पर संदूषित होती हैं।

अधिकांश पानी को उपयोग करने से पहले किसी प्रकार से उपचारित करने की आवश्यकता होती है, यहां तक कि गहरे कुओं या झरनों के पानी को भी. उपचार की सीमा पानी के स्रोत पर निर्भर करती है। जल उपचार के उचित तकनीकी विकल्पों में उपयोग के स्थान (पीओयू) पर सामुदायिक और घरेलू दोनों स्तर के डिजाइन शामिल हैं।[5] कुछ बड़े शहरी क्षेत्रों जैसे क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड को पर्याप्त मात्रा में पर्याप्त रूप से शुद्ध पानी उपलब्ध है जहां अपरिष्कृत पानी को उपचारित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।[6]

पिछले दशक के दौरान जलजनित रोगों को कम करने में पीओयू उपायों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक बढ़ती हुई संख्या में क्षेत्र के आधार पर अध्ययन किये गए। बीमारी को कम करने में पीओयू विकल्पों की क्षमता समुचित रूप से प्रयोग किये जाने पर सूक्ष्म रोगाणुओं को हटाने की उनकी क्षमता और उपयोग में आसानी एवं सांस्कृतिक औचित्य जैसे सामाजिक कारकों दोनों की एक कार्यप्रणाली है। तकनीकें अपनी प्रयोगशाला-आधारित सूक्ष्मजीव पृथक्करण क्षमता के प्रयोग की तुलना में ज्यादातर (या कुछ हद तक) स्वास्थ्य लाभ उत्पन्न कर सकती हैं।

पीओयू उपचार के मौजूदा समर्थकों की प्राथमिकता एक स्थायी आधार पर एक बड़ी संख्या में कम आय वर्ग के परिवारों तक पहुंचने की है। इस प्रकार पीओयू उपाय एक महत्वपूर्ण स्तर तक पहुंच गए हैं लेकिन इन उत्पादों का प्रचार-प्रसार और वितरण दुनिया भर के गरीबों के बीच किये जाने के प्रयास केवल कुछ ही वर्षों से चल रहे हैं।

आपात स्थितियों में जब पारंपरिक उपचार प्रणालियां काम नहीं करती हैं, जल जनित रोगाणुओं को को उबालकर[7] मारा या निष्क्रिय किया जा सकता है लेकिन इसके लिए प्रचुर मात्रा में इस ईंधन के स्रोतों की आवश्यकता होती है और ये उपभोक्ताओं पर भारी दबाव दाल सकते हैं, विशेष रूप से जहां स्टेराइल स्थितियों में उबले हुए पानी का भंडारण करना मुश्किल होता है और जो कुछ सन्निहित परजीवियों जैसे कि क्रिप्टोस्पोरीडम या बैक्टेरियम क्लोस्ट्रीडियम को मारने का एक विश्वसनीय तरीका नहीं है। अन्य तकनीकों जैसे कि निस्पंदन (फिल्टरेशन), रासायनिक कीटाणुशोधन और पराबैंगनी विकिरण (सौर यूवी) सहित में रखने को कम आय वर्ग के देशों[8] के उपयोगकर्ताओं के बीच जल-जनित रोगों के स्तर को काफी हद तक कम करने के लिए एक अनियमित नियंत्रण की श्रृंखला के रूप में देखा गया है।

पीने के पानी की गुणवत्ता के मानदंड आम तौर पर दो श्रेणियों के तहत आते हैं: / रासायनिक/भौतिक और सूक्ष्म जीवविज्ञानी. रासायनिक/भौतिक मानदंडों में भारी धातु, कार्बनिक यौगिकों का पता लगाना, पूर्ण रूप से मिले हुए ठोस पदार्थ (टीएसएस) और टर्बिडिटी (गंदलापन) शामिल हैं। सूक्ष्म जीवविज्ञानी मापदंडों में शामिल हैं कैलिफॉर्म बैक्टीरिया, ई. कोलाई और जीवाणु की विशिष्ट रोगजनक प्रजातियां (जैसे कि हैजा-उत्पन्न करने वाली विब्रियो कॉलेरा), वायरस और प्रोटोज़ोअन परजीवी.

रासायनिक मानदंड भारी धातुओं के की वृद्धि के जरिये कुछ हद तक दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम से जुड़े होते हैं हालांकि कुछ घटक जैसे कि नाइट्रेट/नाइट्राइट और आर्सेनिक कहीं अधिक तात्कालिक प्रभाव डाल सकते हैं। भौतिक मानदंड पीने के पानी की सुंदरता और स्वाद को प्रभावित करते हैं और सूक्ष्मजीवी रोगज़नक़ों को हटाने को मुश्किल बना सकते हैं।

मूलतः मलीय संदूषण को कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति से सुनिश्चित किया जाता था जो एक विशेष श्रेणी के हानिकारक मलीय रोगाणुओं की एक आसान पहचान हैं। मलीय कोलीफॉर्म (जैसे कि ई. कोलाई) की उपस्थिति नालों से संदूषण के एक संकेत के रूप में दिखाई देती है। अतिरिक्त संदूषकों में शामिल हैं प्रोटोजोअन ऊओसाइट जैसे कि क्रिप्टोस्पोरिडियम एसपी., जियारडिया लाम्ब्लिया, लेजनेला और वाइरस (एंटेरिक).[9] सूक्ष्मजीवी रोगाणुओं से संबंधित मापदंड अपने तात्कालिक स्वास्थ्य जोखिम की वजह से आम तौर पर सबसे बड़ी चिंता का विषय रहे हैं।

पानी का परीक्षण एवं जांच के प्रकार-1संपादित करें

कठोरता परीक्षणसंपादित करें

पानी की शुद्धता के लिए पानी में मौजूद कठोरता के स्तर की जांच करना.सिधान्तइस परीक्षण में अभिकर्मक-बी और अभिकर्मक D-25 और अंत रंग की जाँच करता है। अंतिम रंग पानी में कठोरता के स्तर को इंगित करता है | सामग्री की आवश्यकता - अभिकर्मक-बी, अभिकर्मक डी -25, पानी का नमूना, टेस्ट ट्यूब आदि।

प्रक्रिया 1. दिए गए टेस्ट ट्यूब में 10 मिलीलीटर पानी लें।फिर उस पानी में रिएजेंट-बी की 5 बूंदें डालें और अच्छी तरह मिलाएं।इसके बाद 100 मिलीग्राम चम्मच की मदद से उस टेस्ट ट्यूब में रिएजेंट-ए पाउडर मिलाएं। जब हम अभिकर्मक-ए पाउडर जोड़ते हैं तो पानी गुलाबी रंग में बदल जाता है जो रंग पानी में मौजूद कठोरता को इंगित करता है।फिर रीजेंट डी -25 की स्टेप ड्रॉप्स में स्टेप मिलाएं और इसे अच्छी तरह मिलाएं। अभिकर्मक डी -25 की बूंदों को उस गुलाबी रंग में जोड़ें जो नीले रंग में बदल जाती हैं।गुलाबी रंग को नीले में बदलने के लिए अभिकर्मक डी -25 की कितनी बूंदें आवश्यक हैं, इसकी जांच करें।पानी के नमूने में मौजूद कठोरता का स्तर निम्नानुसार जांचें-डी -25 अभिकर्मक = 25 पीपीएम की 1 बूंद।नोट- यदि हमें कठोरता स्तर 200 पीपीएम या 200 पीपीएम से कम है तो कृपया अगली परीक्षा या विधि का पालन करें।

दिए गए टेस्ट ट्यूब में 25 मिली पानी लें।फिर उस टेस्ट ट्यूब में रिएजेंट- B की 10 बूंदें डालें और अच्छी तरह से मिलाएं।इसके बाद 50 मिलीग्राम चम्मच की मदद से उस टेस्ट ट्यूब में रीजेंट - ए पाउडर मिलाएं और इसे अच्छे से मिलाएं।फिर रीजेंट डी -25 की स्टेप ड्रॉप्स में स्टेप मिलाएं और इसे अच्छी तरह मिलाएं। अभिकर्मक डी -25 की बूंदों को उस गुलाबी रंग में जोड़ें जो नीले रंग में बदल जाती हैं।गुलाबी रंग को नीले में बदलने के लिए अभिकर्मक डी -25 की कितनी बूंदें आवश्यक हैं, इसकी जांच करें।पानी के नमूने में मौजूद कठोरता का स्तर निम्नानुसार जांचें- डी -25 अभिकर्मक = 10 पीपीएम की 1 बूंद

योग्यता परीक्षणसंपादित करें

पानी में मौजूद क्षारीयता के स्तर का अध्ययन करने के लिए।

सामग्री आवश्यक :- जल परीक्षण किट, पानी का नमूना आदि।

प्रक्रिया दिए गए टेस्ट ट्यूब में 10 मिलीलीटर पानी लें|इसके बाद रिएजेंट टी पाउडर (50 मिलीग्राम) मिलाएं और इसे ठीक से मिलाएं। जब हम इस अभिकर्मक टी पाउडर को जोड़ रहे हैं तो पानी का रंग हरे रंग में बदल जाता है। (यदि पानी लाल रंग में बदल जाता है तो यह दर्शाता है कि पानी की क्षारीयता शून्य है।) फिर ड्रॉप-वार तरीके से ALK- 25 तरल (Reagent- ALK- 25) मिलाएं और इसे उचित तरीके से मिलाएं। इसमें वह बूंदें मिलाएं जो हरे से लाल रंग में बदल जाए।उसके बाद लाल रंग बदलने के लिए आवश्यक बूंदों की गिनती करें। फिर पानी में मौजूद कुल क्षारीयता की गणना करें। ALK की 1 बूंद- 25 बूंद = 25ppm नोट- यदि हमें 250 पीपीएम या 200 पीपीएम से कम क्षारीयता का स्तर मिला है, तो कृपया अगली परीक्षा या विधि का पालन करें।

दिए गए टेस्ट ट्यूब में 25 मिली पानी लें।इसके बाद रिएजेंट टी पाउडर (50 मिलीग्राम) मिलाएं और इसे ठीक से मिलाएं। जब हम इस अभिकर्मक टी पाउडर को जोड़ रहे हैं तो पानी का रंग हरे रंग में बदल जाता है। (यदि पानी लाल रंग में बदल जाता है तो यह दर्शाता है कि पानी की क्षारीयता शून्य है।)फिर ड्रॉप-वार तरीके से ALK- 25 तरल (Reagent- ALK- 25) मिलाएं और इसे उचित तरीके से मिलाएं। इसमें वह बूंदें मिलाएं जो हरे से लाल रंग में बदल जाए।उसके बाद लाल रंग बदलने के लिए आवश्यक बूंदों की गिनती करें। फिर पानी में मौजूद कुल क्षारीयता की गणना करें। ALK की 1 बूंद- 25 बूंद = 10ppm

क्लोराइड परीक्षणसंपादित करें

पानी में मौजूद क्लोराइड के स्तर का अध्ययन करने के लिए।

आवश्यक सामग्री - जल परीक्षण किट, पानी का नमूना, आदि।

प्रक्रिया – परखनली में सिरिंज की सहायता से 5 मिली पानी लें।50mg चम्मच की मदद से उस टेस्ट ट्यूब में CL- -B पाउडर मिलाएं और इसे ठीक से मिलाएं। जब हम इस सीएल- बी पाउडर को जोड़ रहे हैं तो पानी पीले रंग में बदल जाता है।इसके बाद ड्रॉप वाइज तरीके से (रिएजेंट सीएल-बी) तरल जोड़ें और इसे उचित तरीके से मिलाएं। उस अभिकर्मक को पानी में मिलाकर पीले से ईंट के लाल रंग में बदल देता है।पानी को पीले से ईंट लाल रंग में बदलने के लिए आवश्यक बूंदों की गणना करें। सीएल-बी = 25 पीपीएम की 1 बूंद नोट- यदि पानी में क्लोराइड की कुल गिनती 250 पीपीएम या 200 पीपीएम से कम है तो कृपया अगले परीक्षण या विधि का पालन करें 5 मिलीलीटर सिरिंज की मदद से टेस्ट ट्यूब में 12.5 मिलीलीटर पानी लें।50mg चम्मच की मदद से उस टेस्ट ट्यूब में CL- -B पाउडर मिलाएं और इसे ठीक से मिलाएं। जब हम इस सीएल-बी पाउडर को जोड़ रहे हैं तो पानी का रंग हरे रंग में बदल जाता है।इसके बाद ड्रॉप वाइज तरीके से (रिएजेंट सीएल-बी) तरल जोड़ें और इसे उचित तरीके से मिलाएं। उस अभिकर्मक को पानी में मिलाकर पीले से ईंट के लाल रंग में बदल देता है।पानी को पीले से ईंट लाल रंग में बदलने के लिए आवश्यक बूंदों की गणना करें। सीएल-बी = 25 पीपीएम की 1 बूंद

4. फ्लोराइड परीक्षण

उद्देश्य- पानी में मौजूद फ्लोराइड के स्तर का अध्ययन करने के लिए।

सामग्री की आवश्यकता - जल परीक्षण किट, पानी का नमूना, आदि।

टेस्ट बोतल में 3 मिलीलीटर पानी लें।फिर उस टेस्ट ट्यूब में रिएजेंट- 10 की 10 बूंदें डालें। उसके बाद टेस्ट बोतल का ढक्कन बंद कर दिया और उचित मिश्रण के लिए इसे 3 से 4 बार झुकाएं। फिर स्थिर स्थिति में 1 मिनट के लिए रखें।इसके बाद इसे कलर तुलनित्र में रखें। सूर्य की किरणों की उपस्थिति में उस रंग की तुलना करें। फिर पानी के नमूने के रंग की तुलना रंग तुलनित्र की मदद से करें। फ़्लोराइड रंग बनानेवाला-फ्लोराइड किट में रंग तुलनित्र मौजूद होता है।उस किट में कुल 6 रंग गुलाबी शेड से लेकर पीले शेड तक मौजूद हैं।परीक्षण बोतल को उस रंग तुलनित्र में रखें।रंग तुलनित्र की सहायता से पानी के रंग की तुलना करें।धूप की उपस्थिति में रंग की जाँच करें।उस रंग तुलनित्र पर 0.0, 0.5, 1.0, 1.5, 2 जैसे माप मौजूद हैं।यदि हमें 0.5 और 1 के बीच परिणाम मिला है, तो उसके बीच में रीडिंग लें.

नीट टेस्टसंपादित करें

पानी में मौजूद नाइट्रेट के स्तर का अध्ययन करने के लिए।

सामग्री की आवश्यकता - जल परीक्षण किट, पानी का नमूना, आदि।

प्रक्रिया:-टेस्ट बोतल में 1 मिली सिरिंज की मदद से 0.5 मिली पानी लें | फिर इसमें रीजेंट N-1 20 बूंदें डालें और ठीक से मिलाएं। फ़नल की मदद से उस टेस्ट बोतल में रिएगेंट एन -2 का 100 मिलीग्राम पाउडर मिलाएं।उसके बाद टेस्ट बोतल का ढक्कन बंद करके उसे उचित मिश्रण के लिए 3 से 4 बार झुकाएं। फिर स्थिर स्थिति में 1 मिनट के लिए रखें।इसके बाद इसे कलर तुलनित्र में रखें। सूर्य किरणों की उपस्थिति में उस रंग की तुलना करें। फिर पानी के नमूने के रंग की तुलना रंग तुलनित्र की मदद से करें।

नाइट्रेट रंग घटक-नाइट्रेट किट में रंग तुलनित्र मौजूद होता है।उस किट में कुल 5 रंग गुलाबी छाया से मौजूद हैं।परीक्षण बोतल को उस रंग तुलनित्र में रखें।रंग तुलनित्र की सहायता से पानी के रंग की तुलना करें।धूप की उपस्थिति में रंग की जाँच करें। रंग तुलनित्र पर 10, 20, 30, 40, 50 पीपीएम जैसे माप दिखाए जाते हैं। यदि हमें 40 और 50 के बीच का परिणाम मिला है, तो उसके बीच रीडिंग लें, मतलब 45ppm के रूप में फाइनल रीडिंग लें।

लोहे का जांचसंपादित करें

उद्देश्य:- पानी में मौजूद नाइट्रेट के स्तर का अध्ययन करने के लिए.

सामग्री की आवश्यकता - जल परीक्षण किट, पानी का नमूना, आदि.

प्रक्रिया:-टेस्ट बोतल में 10 मिलीलीटर पानी लें|इसके बाद उस टेस्ट बॉटल में 10 बूंद रिएजेंट Fe- A मिलाएं और इसे ठीक से मिलाएं। फिर Fe-c लिक्विड की 1-0 बूंदें डालें और इसे उचित तरीके से मिलाएं।उसके बाद टेस्ट बोतल का ढक्कन बंद करके उसे उचित मिश्रण के लिए 3 से 4 बार झुकाएं। फिर स्थिर स्थिति में 1 मिनट के लिए रखें।इसके बाद इसे कलर तुलनित्र में रखें। सूर्य किरणों की उपस्थिति में उस रंग की तुलना करें। फिर पानी के नमूने के रंग की तुलना रंग तुलनित्र की मदद से करें।

     लौह रंग बनानेवाला- नाइट्रेट किट में रंग तुलनित्र मौजूद होता है। उस किट में कुल 5 रंग नारंगी छाया से मौजूद हैं। परीक्षण बोतल को उस रंग तुलनित्र में रखें। रंग तुलनित्र की सहायता से पानी के रंग की तुलना करें।धूप की उपस्थिति में रंग की जाँच करें।उस रंग तुलनित्र पर 0.0, 0.3, 0.5, 0.7 और 0.7 और 1ppm जैसे माप मौजूद हैं।          

पानी के लिए पीएच परीक्षणसंपादित करें

उद्देश्य:- पानी में मौजूद पीएच के स्तर का अध्ययन करने के लिए. आवश्यक सामग्री- जल परीक्षण किट, पानी का नमूना आदि। प्रक्रिया:-टेस्ट बोतल में 10 मिलीलीटर पानी लें।इसके बाद उस टेस्ट बोतल में 5 बूंद रिएजेंट पीएच -1 डालें और इसे ठीक से मिलाएं। इसके बाद टेस्ट बोतल का ढक्कन बंद कर दें और उचित मिश्रण के लिए इसे 3 से 4 बार झुकाएं। फिर स्थिर स्थिति में 1 मिनट के लिए रखें।इसके बाद इसे कलर तुलनित्र में रखें। सूर्य की किरणों की उपस्थिति में उस रंग की तुलना करें। फिर पानी के नमूने के रंग की तुलना रंग तुलनित्र की मदद से करें.

पीएच रंग तुलनात्मक:पीएच किट में रंग तुलनित्र मौजूद होता है।इस किट में कुल 5 रंग गुलाबी छाया से मौजूद हैं।परीक्षण बोतल को उस रंग तुलनित्र में रखें।रंग तुलनित्र की सहायता से पानी के रंग की तुलना करें।धूप की उपस्थिति में रंग की जाँच करें।रंग तुलनित्र पर 0.0, 0.3, 0.5, 0.7 और 0.7 और 1ppm जैसे माप मौजूद हैं।यदि हमें 0.3 और 0.5 के बीच का परिणाम मिला है तो उसके बीच में रीडिंग लें।    

पानी के लिए टर्बिडिटी टेस्टसंपादित करें

उद्देश्य- पानी में मौजूद टर्बिडिटी के स्तर का अध्ययन करना। आवश्यक सामग्री- पानी परीक्षण किट, पानी का नमूना आदि. प्रक्रिया:-सबसे पहले एक साफ टेस्ट जार लें।इसके बाद निशान तक पानी डालें।सूर्य के प्रकाश में पानी के रंग की जांच करें और उस रंग से मेल खाएं जो टर्बिडिटी चार्ट पर मौजूद है।अब चार्ट के अनुसार टर्बिडिटी स्तर की जांच करें।टिप्पणियों का रिकॉर्ड करें और अपने नमूने के प्रत्येक परीक्षण के लिए निष्कर्ष लिखें।

पहुंचसंपादित करें

 
अफ्रीका में केवल छियालीस प्रतिशत लोगों के पास सुरक्षित पीने के पानी की पहुंच है।
 
थाईलैंड में पीने का पानी प्रदान करने वाली मशीनें.एक लीटर शुद्ध पानी को (ग्राहक की खुद की बोतल में) 1 बहात में बेचा जाता है।
 
पानी की गुणवत्ता - देश के हिसाब से बेहतर जल स्रोतों का उपयोग करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत

धरती की सतह के लगभग 70% हिस्से में होने के बावजूद अधिकांश पानी खारा है। स्वच्छ पानी धरती के लगभग सभी आबादी वाले क्षेत्रों में उपलब्ध है, हालांकि यह महंगा हो सकता है और आपूर्ति हमेशा स्थायी नहीं हो सकती है। पानी प्राप्त करने वाले स्रोतों में निम्नांकित शामिल हो सकते हैं:

  • जमीनी स्रोत जैसे कि भूजल, हाइपोरेइक क्षेत्र और एक्विफायर.
  • वर्षण जिनमें वर्षा, ओले, बर्फ, कोहरे आदि शामिल हैं।
  • सतही पानी जैसे कि नदियां, जलधाराएं, ग्लेशियर.
  • जैविक स्रोत जैसे कि पौधे.
  • समुद्र विलवणीकरण (डीसैलिनेशन) के माध्यम से.

झरने का पानी जो एक प्राकृतिक संसाधन है जिससे ज्यादातर बोतलबंद पानी तैयार होता है, आम तौर पर इसमें खनिज मौजूद होते हैं।[10] विकसित देशों में घरेलू जल वितरण प्रणाली द्वारा पहुंचाए जाने वाले नल के पानी (टैप वाटर) का मतलब है एक नल के माध्यम से पाइपों के जरिये घरों तक ले जाया गया पानी. ये सभी पानी के स्वरुप आम तौर पर पीने के काम में आते हैं जिन्हें अक्सर छानकर (फिल्टरेशन) शुद्ध किया जाता है।[11]

पीने योग्य पानी के स्थानांतरण और वितरण का सबसे प्रभावी तरीका पाइपों के माध्यम से है। पाइपलाइन तैयार करने में काफी मात्रा में पूंजी निवेश की आवश्यकता हो सकती है। कुछ प्रणालियां उच्च परिचालन लागत से ग्रस्त हैं। औद्योगिक देशों के खराब होते पानी और स्वच्छता संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बदलने की लागत अधिक से अधिक 200 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष तक हो सकती है। पाइपों से अनुपचारित और उपचारित पानी का रिसाव पानी तक पहुंच को कम करता है। शहरी प्रणालियों में 50% तक रिसाव की दरें असामान्य नहीं हैं।[12]

उच्च प्रारंभिक निवेश की वजह से कई कम अमीर देश उपयुक्त बुनियादी ढांचों को विकसित या कायम रखने का भार बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और इसके परिणाम स्वरूप इन क्षेत्रों के लोगों को अपनी आय का एक अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा पानी पर खर्च करना पड़ सकता है।[13] उदाहरण के लिए अल सल्वाडोर से प्राप्त 2003 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि 20% सबसे गरीब परिवार अपनी आय का 10% से अधिक हिस्सा पानी पर खर्च करते हैं। युनाइटेड किंगडम के प्राधिकरण एक कठिनाई की स्थिति में एक व्यक्ति की आय का 3% से अधिक हिस्सा पानी पर खर्च किये जाने के रूप में परिभाषित करते हैं।[14]

बिना सुरक्षित पीने के पानी की पहुंच वाले लोगों के अनुपात को आधा करने का सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेंट गोल) संभवतः 1990 और 2015 के बीच हासिल किया जा सकता है। हालांकि कुछ देश अभी भी भारी चुनौतियों का सामना करते हैं।[15]

ग्रामीण समुदाय 2015 एमडीजी पीने के पानी के लक्ष्य को पूरा करने से काफी दूर हैं। दुनिया भर में ग्रामीण जनसंख्या के केवल 27% के घरों में सीधे तौर पर पाइप के जरिये पीने का पानी पहुंचाया जाता है और 24% आबादी असंशोधित स्रोतों पर निर्भर करती है। एक असंशोधित पानी के स्रोत की पहुंच के बिना 884 मिलियन लोगों में से 746 मिलियन लोग (84%) ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। उप-सहाराई अफ्रीका ने 1990 के बाद से संशोधित जन स्रोतों के मामले में सबसे कम प्रगति की है जहां 2006 तक केवल 9% का सुधार हुआ है। इसके विपरीत पूर्वी एशियाई क्षेत्र में इसी अवधि के दौरान असंशोधित पानी पर निर्भरता में 45% से 9% की नाटकीय गिरावट देखी गयी है।[16]

देश %   देश %   देश %   देश %   देश %
अल्बानिया 97 अल्जेरिया 89 अज़रबैजान 78 ब्राजील 87 चिली 93
चीन 75 क्यूबा 91 इजिप्ट 97 भारत 84 इंडोनेशिया 78
ईरान 92 इराक 85 केन्या 57 उत्तरी कोरिया 100 दक्षिणी कोरिया 92
मेक्सिको 88 मोल्दाविया 92 मोरक्को 80 मोजाम्बिक 57 पाकिस्तान 90
पेरू 80 फिलीपींस 86 सिंगापुर 100 दक्षिणी अफ्रीका 86 सूडान 67
सीरिया 80 तुर्की 82 युगांडा 52 वेनेजुएला 83 जिम्बाब्वे 83
टिप्पणी: उपलब्ध डाटा वाले सभी औद्योगीकृत देश (यूनिसेफ की 2000 की सूची के अनुसार) 100% पर हैं।

अमेरिका में आम गैर-संरक्षक एकल परिवार वाले घरों में प्रति दिन प्रति व्यक्ति 69.3 गैलन पानी का उपयोग किया जाता है। देश के कुछ हिस्सों में, विशेषकर अमेरिका के पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में सूखे के कारण पानी की आपूर्ति का स्तर खतरनाक रूप से न्यूनतम है।[18]

आवश्यकताएंसंपादित करें

पानी की मात्रा व्यक्ति के साथ बदलती रहती है क्योंकि यह व्यक्ति की स्थिति पर, शारीरिक व्यायाम की मात्रा और वातावरण के तापमान और आर्द्रता पर निर्भर करती है।[19] अमेरिका में पानी के लिए दैनिक सेवन की सिफारिश (रेफरेंस डेली इनटेक) (आरडीआई) 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए प्रति दिन 3.7 लीटर है और 18 वर्ष[20] से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए यह मात्रा 2.7 लीटर है जिसमें खाद्य सामग्रियों, पेय पदार्थों और पेय जलों में निहित पानी शामिल है। यह एक आम गलतफहमी है कि हर व्यक्ति को प्रति दिन दो लीटर (68 औंस, या लगभग 8-औंस ग्लास) पानी पीना चाहिए और यह वैज्ञानिक अनुसंधान द्वारा समर्थित नहीं है। इस विषय पर 2002 और 2008 के बीच प्रदर्शित सभी वैज्ञानिक रचनाओं की विभिन्न समीक्षाओं में प्रतिदिन आठ ग्लास पानी की सिफारिश का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं पाया जा सका.[21][22][23] उदाहरण के लिए, गर्म जलवायु में रहने वाले लोगों को अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक से अधिक मात्रा में पीने के पानी की आवश्यकता होगी. किसी व्यक्ति की प्यास एक विशिष्ट, निर्धारित संख्या की बजाय इस बात का बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करता है कि उसे कितना पानी पीने की आवश्यकता है। एक और अधिक लचीला दिशानिर्देश यह है कि एक सामान्य व्यक्ति को प्रति दिन 4 बार मूत्र त्याग करना चाहिए और मूत्र एक हल्के पीले रंग का होना चाहिए.

श्वसन, पसीना और मूत्रत्याग जैसी सामान्य शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से हुई पानी की क्षति को पूरा करने के लिए एक निरंतर आपूर्ति की जरूरत है। खाद्य सामग्री 0.5 से 1 लीटर का योगदान करती है और प्रोटीन, वसा एवं कार्बोहाइड्रेट 0.25 से 0.4 लीटर अतिरिक्त पानी का उत्पादन करते हैं[24] जिसका मतलब है कि आरडीआई को पूरा करने के क्रम में पुरुषों को 2 से 3 लीटर और महिलाओं को 1 से 2 लीटर पानी तरल पदार्थ के रूप में ग्रहण करना चाहिए. खनिज संबंधी पोषक तत्वों की मात्रा के संदर्भ में यह स्पष्ट नहीं है कि पीने के पानी का योगदान कितना होना चाहिए. हालांकि अकार्बनिक खनिज आम तौर पर तूफानी जल के प्रवाह या पृथ्वी की परतों के माध्यम से सतही जल और भूजल में प्रवेश करते हैं। उपचार की प्रक्रियाएं भी कुछ खनिजों की उपस्थिति का कारण बनती हैं। इसके उदाहरणों में कैल्शियम, जिंक, मैंगनीज फॉस्फेट, फ्लोराइड और सोडियम के यौगिक शामिल हैं।[25] पोषक तत्वों के जैव रासायनिक चयापचय से उत्पन्न पानी कुछ सन्धिपादों और रेगिस्तानी प्राणियों के लिए दैनिक पानी की आवश्यकता का एक काफी बड़ा अनुपात प्रदान करता है लेकिन इनसे मनुष्यों के पीने के लिए आवश्यक पानी का बहुत ही कम हिस्सा प्राप्त होता है। वस्तुतः सभी पीने योग्य पानी में विभिन्न प्रकार के सांकेतिक तत्व मौजूद होते हैं जिनमें से कुछ चयापचय में एक भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड ज्यादातर पानी में थोड़ी मात्रा में पाए जाने वाले आम रसायन हैं और ये तत्व शारीरिक चापापचय में एक भूमिका (आवश्यक रूप से बड़ी भूमिका नहीं) निभाते हैं। जबकि फ्लोराइड जैसे अन्य तत्व कम मात्रा में लाभकारी होते हैं जो अधिक मात्रा में मौजूद होने पर दांत की समस्याएं और अन्य परेशानियां पैदा कर सकते हैं। पानी हमारे शरीर की वृद्धि और रखरखाव के लिए आवश्यक है क्योंकि यह कई जैविक प्रक्रियाओं में शामिल होता है।

काफी मात्रा में पसीना निकलना इलेक्ट्रोलाइट के प्रतिस्थापन की आवश्यकता को बढ़ा सकता है। पानी की विषाक्तता (वाटर इनटॉक्सीकेशन) (जिसके परिणाम स्वरूप हाइपोनैट्रेमिया (अल्पसोडियमरक्तता) होता है), बहुत तेजी से बहुत अधिक पानी पीना घातक हो सकती है।

मनुष्य के गुर्दे विभिन्न स्तर के पानी के सेवन के प्रति आम तौर पर अपने को समायोजित कर लेते हैं। ऐसे में गुर्दों को पानी के सेवन के नए स्तर को समायोजित करने के लिए समय की आवश्यकता होगी. इसके कारण वह व्यक्ति जो बहुत अधिक पानी पीता है वह नियमित रूप से कम पानी पीने वाले व्यक्ति की तुलना में बड़ी आसानी से निर्जलित हो सकता है। जीवन रक्षा वर्गों का सुझाव है कि ऐसे व्यक्ति को जिसके कम पानी वाले (जैसे कि रेगिस्तान में) वातावरण में रहने की आवश्यकता होती है, उसे बहुत अधिक पानी नहीं पीना चाहिए, बल्कि इसकी बजाय अपनी यात्रा की शुरुआत से पहले कई दिनों तक कम होती मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए जिससे कि उसके गुर्दे संकेंद्रित मूत्र तैयार करने के लिए अभ्यस्त हो जाएं[कृपया उद्धरण जोड़ें]. इस पद्धति का इस्तेमाल नहीं करना घातक समझा जाता है।[26][कृपया उद्धरण जोड़ें]

सुरक्षित पीने के पानी के संकेतकसंपादित करें

 
सहारा रेगिस्तान में इतालवी, जर्मन, पोलिश और अंग्रेजी में चिन्हित पेयजल के स्रोत

सुरक्षित पेयजल तक पहुंच का संकेत उचित स्वच्छता स्रोतों का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या से मिलता है। इन संशोधित जल स्रोतों में घरेलू कनेक्शन, सार्वजनिक स्टैंडपाइप, बोरहोल की स्थिति, संरक्षित कुएं, सरंक्षित झरने और वर्षा जल संग्रह शामिल हैं। पूर्व उल्लिखित सीमा तक संशोधित पेय जल को प्रोत्साहन नहीं देने वाले स्रोतों में शामिल हैं: असंरक्षित कुएं, असंरक्षित झरने, नदियां या तालाब, विक्रेता प्रदत्त पानी, बोतलबंद पानी (पाने की गुणवता के नहीं, बल्कि सीमित मात्रा के परिणाम स्वरूप), टैंकर ट्रक का पानी. स्वच्छता संबंधी पानी तक पहुंच मलोत्सर्ग के लिए संशोधित स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच के साथ हाथों-हाथ होता है। इन सुविधाओं में सार्वजनिक सीवर तक संपर्क, सेप्टिक प्रणाली तक कनेक्शन, पोर-फ्लश शौचालय और हवादार संशोधित गड्ढे वाले शौचालय शामिल हैं। असंशोधित स्वच्छता सुविधाएं हैं: सार्वजनिक या साझा शौचालय, खुले गड्ढे वाले शौचालय या बकेट शौचालय.[27]

बच्चों में एक प्रमुख स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव के रूप में दस्त (डायरिया)संपादित करें

विकासशील दुनिया में दस्त संबंधी बीमारियों से होने वाली 90% से अधिक मौतें आज 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होती हैं। कुपोषण, विशेष रूप से प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण जल-संबंधी दस्त वाली बीमारियों के साथ-साथ संक्रमण के प्रति बच्चों की प्रतिरोध क्षमता को कम कर सकती हैं। 2000-2003 में उप-सहाराई अफ्रीका में प्रति वर्ष पांच वर्ष से कम उम्र के 769,000 बच्चों की मौत अतिसारीय रोगों से हुई थी। उप-सहाराई क्षेत्र में जनसंख्या के केवल छत्तीस प्रतिशत लोगों तक स्वच्छता के समुचित साधनों की पहुंच के परिणाम स्वरूप प्रति दिन 2000 से अधिक बच्चों की जिंदगी छिन जाती है। दक्षिण एशिया में 2000-2003 में हर साल पाँच वर्ष से कम उम्र के 683,000 बच्चों की मौत दस्त (अतिसार संबंधी) रोगों से हो गयी थी। इसी अवधि के दौरान विकसित देशों में पांच साल से कम उम्र के 700 बच्चों की मौत दस्त (अतिसार संबंधी) रोगों से हुई थी। बेहतर जल आपूर्ति दस्त संबंधी रोगों को पच्चीस-प्रतिशत तक कम कर देती है और घरों में समुचित भंडारण एवं क्लोरीनीकरण के जरिये पीने के पानी में सुधार से दस्त (डायरिया) के दौरे उनतालीस प्रतिशत तक कम हो जाते हैं।[28]

पीने के पानी की उपलब्धता में सुधारसंपादित करें

 
इंडोनेशिया में सौर पानी कीटाणुशोधन का उपयोग

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स) (एमडीजीज) में से एक है पर्यावरणीय स्थिरता. 2004 में ग्रामीण क्षेत्रों में केवल बयालीस प्रतिशत लोगों तक स्वच्छ पानी की पहुंच थी।[29]

सौर जल कीटाणुशोधन पानी के परिशोधन का एक किफायती तरीका है जिसका प्रयोग अक्सर स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों से किया जा सकता है।[30][31][32][33] जलाने की लकड़ी पर निर्भर तरीकों के विपरीत पर्यावरण पर इसका प्रभाव कम पड़ता है।

सुरक्षित पेय जल तक पहुंच प्राप्त करने में लोगों की मदद करने के लिए एक कार्यक्रम विकसित किया गया था जिसका नाम है जल सहयोग (वाटर ऐड कार्यक्रम. पानी उपलब्ध कराने में मदद करने के लिए 17 देशों में कार्यरत, वाटर ऐड इंटरनेशनल दुनिया के कुछ सबसे गरीब लोगों को सफाई और स्वच्छता संबंधी शिक्षा प्रदान करने में मदद कर रही है।[34]

ग्लोबल फ्रेमवर्क फॉर एक्शन (जीएफ4ए) एक ऐसा संगठन है जो प्रबंधनीय लक्ष्यों और समय सीमाओं को परिभाषित करने के लिए हितधारकों, राष्ट्रीय सरकारों, दान देने वालों और गैर-सरकारी संगठनों/एनजीओ (जैसे कि वाटर ऐड) को एक साथ लेकर आता है। 23 देश बेहतर पानी की उपलब्धता के लिए एमडीजी के लक्ष्यों को पूरा करने के लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं।[35]

कुओं का संदूषणसंपादित करें

सुरक्षित पेय जल की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों में से कुछ विनाशकारी साबित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जब 1980 के दशक को "अंतरराष्ट्रीय जल दशक (इंटरनेशनल डिकेड ऑफ वाटर)" घोषित किया गया, यह धारणा बनायी गयी थी कि भूजल स्वाभाविक रूप से नदियों, तालाबों और नहरों के पानी से कहीं अधिक सुरक्षित है। हालांकि हैजा, टाइफाइड और दस्त की घटनाएं कम हुई लेकिन अन्य समस्याएं पैदा हो गयीं. उदाहरण के लिए, भारत में ग्रेनाईट चट्टानों से निकलकर पानी में मिल जाने वाले अत्यधिक फ्लोराइड से संदूषित कुएं के पानी से 60 लाख लोगों को विषाक्त बनाए जाने का अनुमान है। इस तरह के प्रभाव बच्चों की हड्डी के विरूपणों में विशेष रूप से स्पष्ट होते हैं। इसी तरह की या इससे बड़ी समस्याएं चीन, उजबेकिस्तान और इथोपिया सहित अन्य देशों में प्रत्याशित हैं। हालांकि न्यूनतम मात्रा में फ्लोराइड दंत स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, बड़ी मात्राओं में इसकी खुराक हड्डी की संरचना को प्रभावित करती है।[36]

एक संबंधित समस्या में बांग्लादेश के 12 मिलियन ट्यूब वेलों में से आधे में आर्सेनिक की अस्वीकार्य मात्रा मौजूद होने का अनुमान लगाया गया है क्योंकि इन कुओं की खुदाई अधिक गहरी (100 मीटर से अधिक) नहीं की गयी है। बांग्लादेशी सरकार इस समस्या के समाधान के लिए विश्व बैंक द्वारा 1998 में आवंटित 34 मिलियन डॉलर धनराशि में से 7 मिलियन डॉलर से भी कम खर्च कर पाई थी।[36][37] प्राकृतिक आर्सेनिक की विषाक्तता एक वैश्विक खतरा है, सभी महाद्वीपों के 70 देशों में 140 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं।[38] इन उदाहरणों से प्रत्येक स्थान को अलग-अलग मामले के रूप में जांच करने की आवश्यकता स्पष्ट नजर आती है और ऐसा नहीं माना जा सकता है कि एक क्षेत्र में किया गया काम दूसरे क्षेत्र में प्रभावी होगा.

पीने के पानी का विनियमनसंपादित करें

यूरोपीय संघसंपादित करें

यूरोपीय संघ ने इन कारकों के अतिरिक्त कि पर्यावरण से पानी कैसे, कहाँ और कब निकाला जा सकता है, पीने के पानी की गुणवत्ता पर क़ानून निर्धारित किया है। जल नीति के क्षेत्र में सामुदायिक कार्रवाई के लिए एक ढांचा निर्धारित करते हुए यूरोपीय संसद और 23 अक्टूबर 2000 की परिषद का डायरेक्टिव 2000/60/ईसी तैयार किया गया है जिसे वाटर फ्रेमवर्क डायरेक्टिव के रूप में जाना जाता है, यह पीने के पानी के प्रबंधन संबंधी क़ानून का एक प्रमुख हिस्सा है।[39]

प्रत्येक सदस्य देश क़ानून के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों के निर्धारण के लिए जिम्मेदार है। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में पेयजल निरीक्षणालय (ड्रिंकिंग वाटर इन्स्पेक्टोरेट) जल संबंधी कंपनियों का नियंत्रण करता है।

संयुक्त राज्य अमेरिकासंपादित करें

संयुक्त राज्य अमेरिका में पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) सुरक्षित पेयजल अधिनियम (सेफ ड्रिंकिंग वाटर एक्ट) (एसडीडब्ल्यूए) के तहत नलों (टैप) और सार्वजनिक जल प्रणालियों के लिए मानकों का निर्धारण करती है।[40] फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) फेडरल फ़ूड, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट (एफएफडीसीए) के तहत बोतलबंद पानी को एक खाद्य उत्पाद के रूप में विनियमित करता है।[41] बोतलबंद पानी सार्वजनिक नल के पानी (टैप वाटर) की तुलना में अनिवार्य रूप से अधिक शुद्ध या अधिक परीक्षित नहीं होता है।[42] हालांकि, इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि संयुक्त राज्य के संघीय पेय जल विनियमन स्वच्छ पानी को सुनिश्चित नहीं करते हैं क्योंकि इनमें से कुछ विनियमनों को अधिक हाल ही की वैज्ञानिक पद्धतियों से अपडेट नहीं किया गया है। डॉ॰ पीटर डब्ल्यू. प्रुएस, जो 2004 में पर्यावरणीय जोखिमों का विश्लेषण करने वाली यू.एस. ई.पी.ए. की शाखा के प्रमुख बने थे, वे इसके प्रति "विशेष रूप से चिंतित" थे और उन्होंने उन अध्ययनों में विवादों का सामना किया था जो यह सुझाव देते हैं कि कुछ रसायनों के विरुद्ध नियमों को सख्त किया जाना चाहिए.[43]

पीने की योग्यता का मानक परीक्षणसंपादित करें

पीने के पानी की योग्यता के एक मानक परीक्षण में एक ज्ञात संपत्ति या पानी के स्रोत से एक नमूना प्राप्त करना, ई. कोलाई परीक्षण (एफएचए/वीए) के साथ राज्य प्रमाणित नाइट्रेट/नाइट्रोजन एवं कोलिफॉर्म जीवाणु परीक्षण प्रदान करना शामिल है। इसका मतलब कुल घुलित ठोस पदार्थ के लिए परीक्षण, पानी की कठोरता, पीएच (pH) और आयरन सामग्री परीक्षण प्रदान करना भी है। एक प्रमाणित प्रयोगशाला को सभी प्रकार की जल मृदुकरण और परिशोधन प्रणालियों के समुचित परिचालन ध्यान देना चाहिए और एक मानकीकृत समय सीमा के साथ (आम तौर पर 2 सप्ताह) उपरोक्त परीक्षणों का एक लिखित परिणाम प्रदान करना चाहिए.[कृपया उद्धरण जोड़ें]

बोतलबंद पानीसंपादित करें

 
पानी पीता हुआ एक कबूतर

दुनिया भर में विभिन्न प्रकार की गुणवत्ता वाले पीने के पानी को बोतलबंद किया जाता है और सार्वजनिक उपभोग के लिए बेचा जाता है। विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में पिछले दो दशकों में बोतलबंद पानी की बिक्री और खपत के रुझानों में काफी तेज वृद्धि हुई है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

पीने के पानी संबंधी अन्य प्राणियों की पसंदसंपादित करें

पालतू पशुओं की पीने के पानी की आवश्यकताओं के गुणात्मक और मात्रात्मक पहलुओं का अध्ययन और वर्णन पशु पालन के संदर्भ में किया जाता है। हालांकि जंगली जानवरों के पीने के व्यवहार पर अध्ययनों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान केंद्रित किया गया है। एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि जंगली कबूतर पीने के पानी में यूरिक एसिड या यूरिया जैसे चयापचयी अपशिष्ट की मात्रा के अनुसार भेदभाव नहीं करते हैं (पक्षियों या स्तनधारियों द्वारा क्रमशः मल- या मूत्र - प्रदूषण की नक़ल उतारते हुए).[44]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

  • पानी का जीवाणुकृत विश्लेषण
  • उबले पानी संबंधी सलाह
  • दोहरी पाइपिंग
  • खाद्य सुरक्षा
  • भूजल
  • पीने के पानी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक
  • पाइपलाइन
  • स्प्रेग बैग
  • वाटर फ्लोरिडेशन
  • जल शुद्धीकरण
  • जल सुरक्षा

सन्दर्भसंपादित करें

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