बिठूर

उत्तर प्रदेश का एक शहर और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण स्थान

बिठूर (Bithoor) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर नगर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह गंगा नदी के किनारे स्थित एक तीर्थस्थल है।[1][2]

बिठूर
Bithoor
बिठूर का ब्रह्मावर्त घाट। केन्द्र में छोटा-सा मन्दिर ब्रह्माण्ड का केन्द्र माना जाता है।
बिठूर का ब्रह्मावर्त घाट। केन्द्र में छोटा-सा मन्दिर ब्रह्माण्ड का केन्द्र माना जाता है।
बिठूर की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
बिठूर
बिठूर
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 26°36′46″N 80°16′19″E / 26.6127°N 80.2719°E / 26.6127; 80.2719निर्देशांक: 26°36′46″N 80°16′19″E / 26.6127°N 80.2719°E / 26.6127; 80.2719
देश भारत
राज्यउत्तर प्रदेश
ज़िलाकानपुर नगर ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • कुल11,300
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी, अवधी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)


विवरणसंपादित करें

बिठूर कानपुर के पश्चिमोत्तर दिशा में २७ किमी दूर स्थित एक नगर व नगरपंचायत है। मेरठ के अलावा बिठूर में भी सन १८५७ में भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम का श्रीगणेश हुआ था। यह शहर कन्नौज रोड पर स्थित है। बिठूर गंगा-किनारे बसा हुआ एक ऐसा सोया हुआ सा, छोटा सा क़स्बा है जो किसी ज़माने में सत्ता का केंद्र हुआ करता था। यहाँ कई पुरानी ऐतिहासिक इमारतें, बारादरियाँ और मंदिर जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। ये नानाराव और तात्या टोपे जैसे लोगों की धरती रही है। टोपे परिवार की एक शाखा आज भी बैरकपुर में है और यहीं झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का बचपन बीता।[3] उसी दौर में कानपुर से अपनी जान बचाकर भाग रहे अंग्रेज़ों को सतीचौरा घाट पर मौत के घाट उतार दिया गया। बाद में उसके बदले में अंग्रेज़ों ने गाँव के गाँव तबाह कर दिए और एक एक पेड़ से लटका कर बीस-बीस लोगों को फाँसी दे दी गई। जीत के बाद अँग्रेज़ों ने बिठूर में नानाराव पेशवा के महल को तो मटियामेट कर ही दिया था, जब ताँत्या टोपे के रिश्तेदारों को 1860 में ग्वालियर जेल से रिहा किया गया तो उन्होंने बिठूर लौटकर पाया कि उनका घर भी जला दिया गया है।

पौराणिक महत्वसंपादित करें

 
नाना साहब स्मारक
 
माता सीता का प्राचीन मंदिर
 
बिठूर के महाराज के द्वारा बनाया गया मिनार

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के पूर्व यह तपस्या की थी। उसी को स्मरण दिलाता यहाँ का ब्रह्मावर्त घाट है। ये भी वर्णन मिलता है कि यहीं पर ध्रुव ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी। महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि बिठूर को प्राचीन काल में ब्रह्मावर्त नाम से जाना जाता था। शहरी शोर शराबे से उकता चुके लोगों को कुछ समय बिठूर में गुजारना काफी रास आता है। बिठूर में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनेक पर्यटन स्थल देखे जा सकते हैं। गंगा किनार बसे इस नगर का उल्लेख प्राचीन भारत के इतिहास में मिलता है। अनेक कथाएं और किवदंतियां यहां से जुड़ी हुईं हैं। इसी स्थान पर भगवान राम ने सीता का त्याग किया था और यहीं संत वाल्मीकि ने तपस्या करने के बाद पौराणिक ग्रंथ रामायण की रचना की थी। कहा जाता है कि बिठूर में ही बालक ध्रुव ने सबसे पहले ध्यान लगाया था। 1857 के संग्राम के केन्द्र के रूप में भी बिठूर को जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा नदी के किनार लगने वाला कार्तिक अथवा कतिकी मेला पूर भारतवर्ष के लोगों का ध्यान खींचता है।[4][5]

जनसांख्यिकीसंपादित करें

बिठूर उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले में एक नगर पंचायत शहर है। बिठूर शहर को 10 वार्डों में विभाजित किया गया है जिसके लिए हर 5 साल में चुनाव होते हैं। 2001 की भारत की जनगणना के अनुसार बिठूर की जनसंख्या 9647 थी। इनमें पुरुषों की आबादी 55% और महिलाओं की आबादी 45% थी। बिठूर की औसत साक्षरता दर 62% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है। इनमें 70% पुरुष साक्षरता और 53% महिला साक्षरता हैं। 13% जनसंख्या 6 वर्ष से कम आयु के बालकों की है। जनगणना इंडिया 2011 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार बिठूर नगर पंचायत की जनसंख्या 11,300 है, जिसमें 6,088 पुरुष हैं, जबकि 5,212 महिलाएं हैं। 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण की संख्या 1337 है जो बिठूर (एनपी) की कुल जनसंख्या का 11.83% है। बिठूर नगर पंचायत में, महिला लिंग अनुपात 912 के राज्य औसत के मुकाबले 856 है। इसके अलावा, बिठूर में बाल लिंग अनुपात 902 के उत्तर प्रदेश राज्य औसत की तुलना में लगभग 860 है। बिठूर शहर की साक्षरता दर 67.68 के राज्य औसत से 80.61% अधिक है। बिठूर में पुरुष साक्षरता लगभग 86.01% है जबकि महिला साक्षरता दर 74.29% है। बिठूर नगर पंचायत में 1,999 से अधिक घरों में कुल प्रशासन है, जो पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति करता है। यह नगर पंचायत की सीमा के भीतर सड़क बनाने और इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों पर कर लगाने के लिए भी अधिकृत है।[6]

बिठूर की अधिकांश आबादी हिंदुओं की है लगभग कुल आबादी का 89.54% हिस्सा, इसके बाद मुस्लिम हैं, जिनमें 10.19% शामिल हैं। ईसाई और सिख अल्पसंख्यक हैं और केवल शहर के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं।[7] बिठूर के अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश से हैं, हालांकि शहर में एक महत्वपूर्ण मराठी आबादी भी है। बिठूर में बसे प्रवासी मराठी परिवारों के वंशज न केवल बिठूर में तीन पीढ़ियों से अधिक समय से रह रहे हैं बल्कि कई ज़मीन और अन्य अचल संपत्तियों के मालिक हैं। नाना साहब के साथ आए पहले पाँच परिवार थे:- मोघे, पिंग, सेहजवलकर, हरदेकर और सप्रे। उनमें से अधिकांश बिठूर या आसपास के स्थानों में बस गए।

दर्शनीय स्थलसंपादित करें

वाल्मीकि आश्रमसंपादित करें

हिन्दुओं के लिए इस पवित्र आश्रम का बहुत महत्व है। यही वह स्थान है जहां रामायण की रचना की गई थी। संत वाल्मीकि इसी आश्रम में रहते थे। राम ने जब सीता का त्याग किया तो वह भी यहीं रहने लगीं थीं। इसी आश्रम में सीता ने लव-कुश नामक दो पुत्रों को जन्म दिया। यह आश्रम थोड़ी ऊंचाई पर बना है, जहां पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों को स्वर्ग जाने की सीढ़ी कहा जाता है। आश्रम से बिठूर का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है।

ब्रह्मावर्त घाटसंपादित करें

 
कृत्रिम निर्मित भगवान शिव और पार्वती के संग कैलाश

इसे बिठूर का सबसे पवित्रतम घाट माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने इस स्थान पर यज्ञ किया था एवं प्रतीक स्वरुप इस स्थान पर एक खूँटी गाड़ दी जिसे "ब्रह्मा जी की खूँटी" कहते हैं। भगवान ब्रह्मा के अनुयायी गंगा नदी में स्‍नान करने बाद खडाऊ पहनकर यहां उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। यह भी कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने यहां एक शिवलिंग स्थापित किया था, जिसे ब्रह्मेश्‍वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

पाथर घाटसंपादित करें

यह घाट लाल पत्थरों से बना है। अनोखी निर्माण कला के प्रतीक इस घाट की नींव अवध के मंत्री टिकैत राय ने डाली थी। घाट के निकट ही एक विशाल शिव मंदिर है, जहां कसौटी पत्थर से बना शिवलिंग स्थापित है।

ध्रुव टीलासंपादित करें

ध्रुव टीला वह स्थान है, जहां बालक ध्रुव ने एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी। ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे एक दैवीय तारे के रूप में सदैव चमकने का वरदान दिया था। इन धार्मिक स्थानों के अलावा भी बिठूर में देखने के लिए बहुत कुछ है। यहां का राम जानकी मंदिर, लव-कुश मंदिर, हरीधाम आश्रम और नाना साहब स्मारक अन्य दर्शनीय स्थल हैं।

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग

बिठूर का नजदीकी एयरपोर्ट लखनऊ के निकट अमौसी में है। यह एयरपोर्ट बिठूर से लगभग 87 किलोमीटर दूर है।

रेल मार्ग

कल्याणपुर यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। केवल पेसेन्जर ट्रेन के माध्यम से ही यहां पहुंचा जा सकता है। कानपुर जंक्शन यहां का निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन है।

सड़क मार्ग

बिठूर आसपास के शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, कन्नौज, सनकिसा, दिल्ली, इलाहाबाद, अयोध्या आदि शहरों से बिठूर के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

अन्य तथ्यसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

वाह्य कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance Archived 2017-04-23 at the Wayback Machine," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
  3. "Uttar Pradesh Legislative Assembly (UPLA): Member info". www.upvidhansabhaproceedings.gov.in. अभिगमन तिथि 14 अप्रैल 2020.[मृत कड़ियाँ]
  4. Shashi, S. S. (1996). Encyclopaedia Indica: India, Pakistan, Bangladesh. Anmol Publications. पृ॰ 183. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7041-859-7. मूल से 3 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 June 2012.
  5. Gupta, Pratul Chandra (1963). Nana Sahib and the Rising at Kanpur. Clarendon Press. मूल से 3 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 June 2012.
  6. "Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)". Census Commission of India. मूल से 2004-06-16 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2008-11-01.
  7. "संग्रहीत प्रति". मूल से 24 जून 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2016.
  8. "संग्रहीत प्रति". मूल से 10 अप्रैल 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 अप्रैल 2020.
  9. "Mungerilal B Tech (2016) - IMDb" (अंग्रेज़ी में).