मिताहार (= मित + आहार ; अर्थात, कम खाना) , भोजन की मात्रा से सम्बन्धित योग की एक संकल्पना है। यह दस यमों में से एक है। मिताहार की चर्चा ३० से अधिक ग्रन्थों में हुई है, जैसे शाण्डिल्य उपनिषद, गीता, दशकुमारचरित तथा हठयोग प्रदीपिका आदि।

हठयोगप्रदीपिका (१.५७) में कहा गया है-

ब्रह्मचारी मिताहारी त्यागी योगपरायणः ।
अब्दादूर्ध्वं भवेद्सिद्धो नात्र कार्या विछारणा ॥

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इन्हें भी देखेंसंपादित करें