रमज़ान

इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना

रमज़ान या रमदान (उर्दू - अरबी - फ़ारसी : رمضان) इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना है। मुस्लिम समुदाय इस महीने को परम पवित्र मानता है।

رمضان
रमदान
Welcome Ramadhan.jpg
बहरैन के शहर मनामा में शाम का वक़्त और खूबसूरत वर्धमान और माह ए रमदान की शुरुआत।
अनुयायी मुस्लिम
प्रकार धार्मिक
उत्सव सामूहिक इफ्तार और सामूहिक प्रार्थना
अनुष्ठान
आरम्भ 1 रमजान का महीना
समापन 29, or 30 रमजान
तिथि इस्लामी कैलेण्डर (चान्द्रमान) के अनुसार बदलता है।
2019 date 6 May – 3 June[1]
आवृत्ति हर 12 चन्द्रमा (चान्द्रमान महीने)
समान पर्व ईद उल-फ़ित्र, लैलतुल क़द्र

इस्लामी कैलेंडर

  1. मुहरम
  2. सफ़र
  3. रबी अल-अव्वल
  4. रबी अल-थानी
  5. जमाद अल-अव्वल
  6. जमाद अल-थानी
  7. रज्जब
  8. शआबान
  9. रमजा़न
  10. शव्वाल
  11. ज़ु अल-क़ादा
  12. ज़ु अल-हज्जा
रमज़ान का चंद्रमा
इस मास की विशेषताएं
  • महीने भर के रोज़े (उपवास) रखना
  • रात में तरावीह की नमाज़ पढना
  • क़ुरान तिलावत (पारायण) करना
  • एतेकाफ़ बैठना, यानी गांव और लोगों की अभ्युन्नती व कल्याण के लिये अल्लाह से दुआ (प्रार्थना) करते हुवे मौन व्रत रखना
  • ज़कात देना
  • दान धर्म करना
  • अल्लाह का शुक्र अदा करना। अल्लाह का शुक्र अदा करते हुवे इस महीने के गुज़रने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल-फ़ित्र मनाते हैं।

इत्यादी को प्रमुख माना जाता है। कुल मिलाकार पुण्य कार्य करने को प्राधान्यता दी जाती है। इसी लिये इस मास को नेकियों और इबादतों का महीना यानी पुण्य और उपासना का मास माना जाता है।[3]

रमज़ान और कुरान का अवतरणसंपादित करें

मुसलमानों के विश्वास के अनुसार इस महीने की २७वीं रात शब-ए-क़द्र को क़ुरान का नुज़ूल (अवतरण) हुआ। इसी लिये, इस महीने में क़ुरान ज़्यादा पढना पुण्यकार्य माना जाता है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान का पठन किया जाता है। जिस से क़ुरान पढना न आने वालों को क़ुरान सुनने का अवसर ज़रूर मिलता है।[4]

महत्वपूर्ण तिथियाँसंपादित करें

 
ग्रेगोरियन कैलंडर अनुसार 1938 और 2038 के बीच रमज़ान की तारीख़.

रमजान की पहली और आखिरी तारीख चांद्रमान इस्लामी कैलेंडर द्वारा निर्धारित की जाती है। [2]

आरंभसंपादित करें

हिलाल (वर्धमान चाँद), देख कर रमज़ान मास शुरू किया जाता है.Subah me roza rakhte hai chand dekh kar phir saam ko iftaari karte hai.

लैलतुल क़द्रसंपादित करें

लैलतुल क़द्र को वर्ष की सबसे पवित्र रात माना जाता है। आम तौर पर माना जाता है कि रमजान के आखिरी दस दिनों के दौरान एक विषम संख्या वाली रात होती है; दाऊदी बोहरा का मानना है कि शब-ए-क़द्र रमजान के तेईस्वीँ रात है।

ईदसंपादित करें

ईद उल-फ़ित्र (अरबी: عيد الفطر) है, जो रमज़ान मास के अंत और शव्वाल मास के पहले दिन मनाई जाती है. रमज़ान के आखरी दिन चांद (हिलाल) देख कर अगले दिन ईद घोषित किया जाता है. यानी नया चाँद देख कर किया जाता है. अगर अगर चंद्रमा का दर्शन नहीं हो पाया तो उपवास के तीस दिनों के पूरा होने के बाद घोशित किया जाता है।

रमज़ान और उपवास (रोज़ा)संपादित करें

रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग उपवास रखते हैं। उपवास को अरबी में "सौम" कहा जाता है, इसलिए इस मास को अरबी में माह-ए-सियाम भी कहते हैं। फ़ारसी में उपवास को रोज़ा कहते हैं। भारत के मुसलिम समुदाय पर फ़ारसी प्रभाव ज़्यादा होने के कारण उपवास को फ़ारसी शब्द ही उपयोग किया जाता है।[5]

उपवास के दिन सूर्योदय से पहले कुछ खालेते हैं जिसे सहरी कहते हैं। दिन भर न कुछ खाते हैं न पीते हैं। शाम को सूर्यास्तमय के बाद रोज़ा खोल कर खाते हैं जिसे इफ़्तारी कहते हैं।[6]

रमज़ान और इत्यादी बातेंसंपादित करें

मुस्लिम समुदाय में रमजान को लेकर निम्न बातें अक्सर देखी जाती हैं।

  • रमजान को नेकियों या पुन्यकार्यों का मौसम-ए-बहार (बसंत) कहा गया है। रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुस्लमान अल्लाह की इबादत (उपासना) ज्यादा करता है। अपने परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए उपासना के साथ, कुरआन परायण, दान धर्म करता है।
  • यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का है। इस महीने में रोजादार को इफ्तार कराने वाले के गुनाह माफ हो जाते हैं। पैगम्बर मोहम्मद सल्ल. से आपके किसीसहाबी (साथी) ने पूछा- अगर हममें से किसी के पास इतनी गुंजाइश न हो क्या करें। तो हज़रत मुहम्मद ने जवाब दिया कि एक खजूर या पानी से ही इफ्तार करा दिया जाए।
  • यह महीना मुस्तहिक लोगों की मदद करने का महीना है। रमजान के तअल्लुक से हमें बेशुमार हदीसें मिलती हैं और हम पढ़ते और सुनते रहते हैं लेकिन क्या हम इस पर अमल भी करते हैं। ईमानदारी के साथ हम अपना जायजा लें कि क्या वाकई हम लोग मोहताजों और नादार लोगों की वैसी ही मदद करते हैं जैसी करनी चाहिए? सिर्फ सदकए फित्र देकर हम यह समझते हैं कि हमने अपना हक अदा कर दिया है।
  • जब अल्लाह की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करना चाहिए। अल्लाह की राह में खर्च करना अफज़ल है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दीगयी है। दूसरों के काम आना भी एक इबादत समझी जाती है।
  • ज़कात, सदक़ा, फ़ित्रा, खैर ख़ैरात, ग़रीबों की मदद, दोस्त अहबाब में जो ज़रुरतमंद हैं उनकी मदद करना ज़रूरी समझा और माना जाता है।
  • अपनी ज़रूरीयात को कम करना और दूसरों की ज़रूरीयात को पूरा करना अपने गुनाहों को कम और नेकियों को ज़्यादा करदेता है।
  • मोहम्मद सल्ल ने फरमाया है जो शख्स नमाज के रोजे ईमान और एहतेसाब (अपने जायजे के साथ) रखे उसके सब पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएँगे। रोजा हमें जब्ते नफ्स (खुद पर काबू रखने) की तरबियत देता है। हममें परहेजगारी पैदा करता है। लेकिन अब जैसे ही माहे रमजान आने वाला होता है, लोगों के जहन में तरह-तरह के चटपटे और मजेदार खाने का तसव्वुर आ जाता है।
क्या हैं सहरी और इफ़्तार

सूर्योदय से पहले कुछ खान पान कर लेते हैं, खजूर या अन्य मनपसंद चीज खाई जाती है जिसे सहरी कहा जाता है. वहीं, इफ़तार सूर्य अस्त होने के बाद इफ्तार किया जाता है. [7]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "The Umm al-Qura Calendar of Saudi Arabia". मूल से 11 जून 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 March 2017.
  2. "Ramadan to start May 27 or May 28". मूल से 27 अप्रैल 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 April 2017.
  3. "रमज़ान की विशेषता". Hindi Webdunia. मूल से 17 सितंबर 2017 को पुरालेखित.
  4. "रमज़ान और कुरान". NDTV Hindi. मूल से 17 अप्रैल 2020 को पुरालेखित.
  5. "Ramadan in Hindi: रमज़ान 2020 पर मुस्लिम समाज के लिए महत्वपूर्ण जानकारी". SA NEWS CHANNEL.
  6. "रमज़ान में रोज़ा रखने से शरीर पर क्या पड़ता है असर?". BBC Hindi.
  7. "Significance Of Sehri And Irtaar : क्या हैं सहरी और इफ्तार जो रोजे में करते हैं मुसलमान". Independent News. अभिगमन तिथि 23 अप्रैल 2020.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

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<a href="https://gyannews.in/ramdan-kyu-manaya-jata-hai">रमजान क्यों मनाया जाता है</a>