राणा हम्मीर सिंह (1314–78), या हम्मीरा जो १४वीं शताब्दी में भारत के राजस्थान के मेवाड़ के एक योद्धा या एक शासक थे।[1] १३वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत ने गुहिलों की सिसोदिया राजवंश की शाखा को मेवाड़ से सत्तारूढ़ कर दिया था, इनसे पहले गुहिलों की रावल शाखा का शासन था जिनके प्रथम शासक बप्पा रावल थे और अंतिम रावल रतन सिंह थे। मेवाड़ राज्य के इस शासक को 'विषम घाटी पंचानन'(सकंट काल मे सिंह के समान) के नाम से जाना जाता है, राणा हम्मीर को विषम घाटी पंचानन की संज्ञा राणा कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में दी।

राणा हम्मीर सिंह
राणा
मेवाड़ के राणा
शासनावधि1326–1364 (38 वर्ष)
उत्तरवर्तीक्षेत्र सिंह
जन्म1314
निधन1364 (50 साल)
जीवनसंगीसोंगरी
राजवंशसिसोदिया
पिताअरी सिंह
माताउर्मिला

सीसोद गाँव के ठाकुर राणा हम्मीर सिसोदिया वंश के प्रथम शासक थे, तथा इन्हें मेवाड़ का उद्धारक कहा जाता है। राणा हम्मीर आरिसिंह के पुत्र तथा लक्ष्मणसिंह के पौत्र हैं, जिन्होंने अपनी सैन्य क्षमता के आधार पर मेवाड़ के केलवाड़ा नामक स्थान को मुख्य केंद्र बनाया। राजस्थान के इतिहास में राणा हम्मीर ने चित्तौड़ से मुस्लिम सत्ता को उखाड़ने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मेवाड़ की विषम परिस्थितियों के होते हुए भी इन्होंने चित्तौड़ पर विजयश्री प्राप्त की। इस प्रकार 1326 ई. में राणा हम्मीर को पुनः चित्तौड़ प्राप्त हुआ। इसी कारण राणा हम्मीर को विषम घाटी पंचानन के नाम से जाना जाता है।

हम्मीर इनके अलावा सिसोदिया राजवंश जो कि गुहिल वंश की ही एक शाखा है के प्रजनक भी बन गए थे, इसके बाद सभी महाराणा सिसोदिया राजवंश के ही रहे।

इन्होंने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित चित्तौड़गढ़ दुर्ग में अन्नपूर्णा माता के मन्दिर का निर्माण भी करवाया था। राणा हम्मीर के शासनकाल में दिल्ली के सुल्तान मौहम्मद बिन तुगलक ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। दोनों के बीच सिंगोली नामक स्थान पर युद्ध लड़ा गया जिसे सिंगोली का युद्ध कहा जाता है। वर्तमान में सिंगोली नामक स्थान उदयपुर में स्थित है। इस युद्ध के बाद मेवाड़ में राणा हम्मीर के दिन सामान्य रहे तथा 1364 ई. में इनकी मृत्यु हो गयी. Maharana hamir chhapa mar Gorilla Yudh paddti ka jank Karnal jems Tod ne Aamir ko Prabal Raja bataya hamari ek Prabal acha bacha hai baki sab Rajvansh nasht Ho Gaye Maharana hamir ne 1336 main singoli ki yuddh me Mohammed bin Tughlaq Ko parajit Kiya singoli vartman mein Chittorgarh sthan per hai

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Sen, Sailendra (2013). A Textbook of Medieval Indian History. Primus Books. पपृ॰ 116–117. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-9-38060-734-4.