निर्देशांक: 23°06′N 78°30′E / 23.10°N 78.5°E / 23.10; 78.5 सागर, मध्य प्रदेश का एक महत्‍वपूर्ण शहर है। सागर का इतिहास सन् १६६० से आरंभ होता है, जब हुसैनशाह ने तालाब के किनारे स्थित वर्तमान किले के स्थान पर एक छोटे किले का निर्माण करवा कर उस के पास परकोटा नाम का गांव बसाया था। निहालशाह के वंशज ऊदनशाह द्वारा बसाया गया वही छोटा सा गांव आज सागर के नाम से जाना जाता है। परकोटा अब शहर के बीचों-बीच स्थित एक मोहल्ला है। वर्तमान किला और उसके अंदर एक बस्ती का निर्माण पेशवा के एक अधिकारी गोविंदराव पंडित ने कराया था। सन् १७३५ के बाद जब सागर पेशवा के आधिपत्य में आ गया, तब गोविंदराव पंडित सागर और आसपास के क्षेत्र का प्रभारी था। समझा जाता है कि इसका नाम ‘सागर’ उस विशाल सागर झील (लाखा बंजारा झील) के कारण पड़ा, जिसके किनारे नगर स्थित है। [बुन्देलखण्ड]सागर सागर को स्मार्ट सिटी योजना मे शामिल किया गया है। वर्तमान में सागर जिले में 11 जनपद पंचायतें हैं। जिनके अंतर्गत 755 ग्राम पंचायतें आती हैं। 10 नगरीय निकाय हैं। सागर शहर नगर निगम की सीमा में आता है। सागर संभागीय मुख्यालय भी है। जिसके अंतर्गत 6 जिले सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी आते हैं। सागर जिले की स्थापना सन 1860 में हुई, सागर के प्रथम डिप्टी कमिश्नर केप्टिन जी एफ एस ब्राउन दिनांक 1-8-1860 से 19-9-1861 तक पदस्थ रहे,

सागर शहर
—  शहर  —
लाखा बंजारा झील के किनारे बसा सागर शहर
लाखा बंजारा झील के किनारे बसा सागर शहर
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्‍य प्रदेश
जिलाधीश दीपक सिंह
नगर पालिक निगम महापौर
जनसंख्या
घनत्व
2,73,357 (2011 के अनुसार )
• 197/किमी2 (510/मील2)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
10,252 km² (3,958 sq mi)
• 594 मीटर (1,949 फी॰)
आधिकारिक जालस्थल: www.sagarmunicipalcorporation.com

[सागर विश्वविध्यालय] मध्यप्रदेश का पहला और देश का 16वां विश्वविध्यालय था। इसकी स्थापना 18 जुलाई 1946 को डॉ. हरीसिंह गौर ने अपनी जीवन की अर्जित सारी कमाई दान कर की थी। यह दुनिया में इस प्रकार के दान का अनूठा मामला है। इस विश्वविद्यालय को हम हम डॉ॰ हरीसिह गौर विश्वविध्यालय के नाम से जानते है। वर्ष 2009 में इसे केन्द्रीय विश्वविध्यालय का दर्जा मिल गया।

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