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यह पुरस्कार अब्दुल बिस्मिल्लाह को भी मिला है। अब्दुल बिस्मिल्लाह जामिया मिलिया विश्व्विद्यालय में हिन्दी के आचार्य है। उनकी रचना झीनी झीनी बीनी चदरिया ने उन्हे यह पुरस्कार दिलवाया। बनारस और मऊ के बुनकरो के जीवन पर यह उनकी बेहतरीन रचना है। अब्दुल बिस्मिल्लाह पोलैन्ड समेत कई देशों में हिन्दी के विकास के लिये जा चुके है। कदम नाम से उन्होने एक सहित्यिक पत्रिका भी निकाली। बाद में जब वह दिल्ली चले गये तो यह पत्रिका बन्द हो गयी। इसे अब मऊ के जय प्रकाश धुमकेतु प्रकाशित कर रहे हैं लेकिन नाम बदल कर अभिनव कदम रख दिया गया है। इसके विकास के लिये पत्रकार आनन्द राय ने भी सहयोग दिया है।