हनुमानगढ़

राजस्थान का 31 वा जिला

हनुमानगढ़ (Hanumangarh) भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

हनुमानगढ़
Hanumangarh
भटनेर दुर्ग
भटनेर दुर्ग
हनुमानगढ़ की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
हनुमानगढ़
हनुमानगढ़
राजस्थान में स्थिति
निर्देशांक: 29°35′N 74°19′E / 29.58°N 74.32°E / 29.58; 74.32निर्देशांक: 29°35′N 74°19′E / 29.58°N 74.32°E / 29.58; 74.32
ज़िलाहनुमानगढ़ ज़िला
प्रान्तराजस्थान
देशFlag of India.svg भारत
जनसंख्या (2011)
 • कुल1,50,958
भाषा
 • प्रचलितराजस्थानी, हिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)

परिचयसंपादित करें

हनुमानगढ़ उत्तर राजस्थान में घग्घर नदी के दोनों तट पर स्थित है। दक्षिण पूर्व ओर टाउन व उत्तर पश्चिम ओर जंकशन है। दोनों ओर रेलवे स्टेशन हैं। हनुमानगढ़ को 'युद्धेय ' भी कहते हैं। यह बीकानेर से 144 मील उत्तर-पूर्व व दिल्ली से 390 किमी पश्चिम में बसा हुआ है। यहाँ एक प्राचीन क़िला है, जिसका पुराना नाम 'भटनेर' था। भटनेर, 'भट्टीनगर' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ भट्टी अथवा भाटीयों का नगर है। भारत के पश्चिम में स्थित होने के कारण इसे "पश्चिम का प्रहरी " भी कहा जाता है. यहाँ स्थित भटनेर दुर्ग 285 ईसा में भाटी वंश के राजा भूपत सिंह भाटी ने बनवाया इस लिए इसे भटनेर कहाँ जाता है। मंगलवार को दुर्ग की स्थापना होने कारण हनुमान जी के नाम पर हनुमानगढ़ कहा जाता है। 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से अलग करके राजस्थान का 31वा जिला बनाया गया। हनुमानगढ़ अपने अंदर अनेक प्राचीन घटनाओ को समाये हुए है। हनुमानगढ़ के पूर्व में 5km दूर सरस्वती नदी पर भदरकाली माता का मंदिर है। और इसके पश्चिम में 25km कालीबंगा सभ्यता विकसित हुयी। इसकी सीमा हरियाणा पंजाब से लगती है। राजस्थान की सबसे बडी नहर परियोजना इंदिरा गाँधी नहर परियोजना तथा भाखड़ा नहर का आरंभ यही से होता है। जोधपुर, जयपुर,कोटा,अजमेर, अहमदाबाद, मुम्बई, पुणे, त्रिरुचिरापल्ली, नान्देड़, इटारसी, भोपाल, जबलपुर, गुवाहाटी, डिब्रुगढ, गोरखपुर, लखनऊ, मुररादाबाद, हरिद्वार, दिल्ली, चण्डीगढ, जम्मू के लिए सीधी रेल सेवाएं हैं।

भौगोलिक स्थितिसंपादित करें

हनुमानगढ़ जिला देश के गर्म इलाकों में आता है। गर्मियों में धूल भरी आंधियां तथा मई जून में लू चलती है, सर्दियों में चलने वाली ठंडी उत्तरी हवाओं को 'डंफर' कहते हैं। गर्मियों में यहाँ का तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा चला जाता है। हालाँकि सर्दियों में रातें अत्यधिक ठंडी हो जाती है और पारा शून्य तक गिर जाता है। ज्यादातर इलाका कुछ वर्षों पहले सूखा रेगिस्तान था, परन्तु आजकल करीब-करीब सारे जिले में नहरों से सिंचाई होने लगी है, अतः अब यह राजस्थान के हरे भरे जिलों की श्रेणी में आता है।

परिचयात्‍मक विवरणसंपादित करें

हनुमानगढ जिले का गठन दिनांक 12-07-1994 को हुआ था तथा लोकसभा क्षेत्र व अन्‍य क्षेत्र निम्‍न प्रकार से है

  • लोकसभा संसदीय क्षेत्र - श्रीगंगानगर एवं चूरु
  • विधानसभा क्षेत्र - हनुमानगढ, संगरिया, पीलीबंगा, नोहर, भादरा
  • उपखण्‍ड - हनुमानगढ, संगरिया, पीलीबंगा, नोहर, भादरा, टिब्‍बी, रावतसर
  • तहसील - हनुमानगढ, संगरिया, पीलीबंगा, नोहर, भादरा, टिब्‍बी, रावतसर
  • जिला परिषद / नगरपरिषद - हनुमानगढ
  • नगरपालिका - संगरिया, पीलीबंगा, रावतसर, नोहर, भादरा
  • पंचायत समिति - हनुमानगढ, संगरिया, पीलीबंगा, नोहर, भादरा, टिब्‍बी, रावतसर
  • जिले की कुल ग्राम पंचायतो की संख्या - 251
  • जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल - 12645 वर्ग कि.मी.

फसलेंसंपादित करें

रबी की मुख्य फसलें हैं - चना, सरसों, गेहूं, अरंड और तारामीराखरीफ की मुख्य फसलें हैं- नरमा, धान, कपास, ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा और ज्वार

सिंचाईसंपादित करें

घग्घर नदी इलाके की एकमात्र नदी है जो हनुमानगढ जिले बीच में से होकर गुजरती है जबकि इंदिरा गांधी फीडर प्रमुख नहर है। अन्य नहरें हैं भाखरा और गंग कैनाल से भी सिंचाई की जाती है यहां कुछ क्षेत्रों में टयूबवैल से सिंचाई भी की जाती है।

इतिहाससंपादित करें

प्राचीन काल में यह जगह भटनेर कहलाती थी, क्योंकि यहाँ भाटी राजपूतों का शासन था। जैसलमेर के भाटी राजा भूपत सिंह ने भटनेर का प्राचीन किला सन २९५ में बनवाया। सन १८०५ में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने यह किला भाटियों से जीत लिया था। इसी विजय को आधार मान कर, जो कि मंगलवार को हुई थी, इसका नाम हनुमानगढ़ रखा गया क्योंकि मंगल हनुमान जी का दिन माना जाता है। भटनेर किला उस जमाने का एक मज़बूत किला माना जाता था यहाँ तक कि तैमूर ने अपनी जीवनी 'तुजुके तैमूर' में इसे हिंदुस्तान का सबसे मज़बूत किला लिखा है। इसके ऊँचे दालान तथा दरबार तक घोडों के जाने के लिए संकड़े रास्ते बने हुए हैं। आज़ादी के बाद से यह भाग श्रीगंगानगर जिले के अर्न्तगत आता था जिसे १२ जुलाई १९९४ को अलग जिला बना दिया गया।

यातायातसंपादित करें

यहां रेल व सड़क दोनों प्रकार के यातायात के साधन उपलब्ध हैं।

दर्शनीय स्थलसंपादित करें

  • गुरुद्वारा सुखासिंह महताबसिंह- भाई सुखासिंह व भाई महताबसिंह ने गुरुद्वारा हरिमंदर साहब, अमृतसर में मस्सा रंघङ का सिर कलम कर बूढ़ा जोहड़ लौटते समय इस स्थान पर रुक कर आराम किया था।
  • भटनेर- हनुमानगढ़ टाउन में स्थित प्राचीन किला.
  • गोगामेडी- हिन्दू और मुस्लिम दोनों में समान रूप से मान्य गोगा/जाहर पीर की समाधि, जहाँ पशुओं का मेला भाद्रपद माह में भरता है।
  • कालीबंगा- ५००० ईसा पूर्व की सिन्धु घाटी सभ्यता का केंद्र, जहाँ एक साइट-म्यूजियम भी है।
  • नोहर- सन १७३० में दसवें गुरु गोविन्द सिंह के आगमन पर बनवाया गया कबूतर साहिब गुरुद्वारा | मिट्टी के बने बर्तनों के लिए भी प्रसिद्ध|
  • तलवाङा झील- यहाँ पर पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के बीच तराइन का युद्ध लड़ा गया था।
  • मसीतां वाली हेड-जहाँ से इंदिरा गांघी नहर राजस्थान में प्रवेश करती है।
  • 'सिल्लामाता' मंदिर- माना जाता है कि मंदिर में स्थापित शिला का पत्थर घघ्घर नदी में बह कर आया था।

'* भद्र्काली मंदिर- घघ्घर नदी के किनारे बना प्राचीन मंदिर.

शिक्षासंपादित करें

शिक्षा संन्त स्वामी केशवानन्द हनुमानगढ के ही संगरिया तहसील से थे।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332
  2. "Berlitz Pocket Guide Rajasthan," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990