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अजमेर के चौहान राजा विग्रह राज चतुर्थ के काल (११५०-६४ ई) के सिक्के

चौहाण या चौहान वंश हूण मूल का एक गुर्जर राजवंश था। [1][2][3] तथा गुर्जर प्रतिहारो के सामंत थे। १२वीं शताब्दी तक शासन किया।[4] चौहान वंश गुर्जरो के प्रसिद्ध वंशों में से अन्यतम है।[2][5] इतिहासकारों के अनुसार अग्निकुल गुट मूल रूप से गुर्जर थे और चौहान गुर्जरो का प्रमुख कबीला था।[6] चौहान गुर्जर के हूणो के चेची कबीले से मूल निकाले जाते हैं। [7]बंबई गजेटियर के अनुसार चेची गुर्जरो ने अजमेर पर 700 साल राज किया। [8] इससे पहले मध्य एशिया में तारिम बेसिन (झिंजियांग प्रांत) के रूप में जाना जाता क्षेत्र में रहते थे। चु - हाण /हान (200 ईसा पूर्व), "चू" राजवंश और "हान" राजवंश के बीच वर्चस्व की लड़ाई जो yuechis / Gujars का हिस्सा थे। गुर्जर जब भारत मे अरब बलों से लड़ते थे । जब वे चू-हाण शीर्षक अपने बहादुर सैनिकों को सम्मानित करने के लिए प्रयोग किया जाता था जो बाद मे चौहाण/चौहान कहा जाने लगा।।[9][10][11]

13 गांव गुर्जर तंवरों के महरौली में है , दक्षिण दिल्ली में 40 से अधिक गांव गुर्जर तंवरों (मुस्लिम) के गुड़गांव में  हैं। व अभी भी तंवरो को दिल्ली का राजा कहा जाता है।[12] प्रसिद्ध लेखक राणा अली हसन चौहान गुर्जर जिनका परिवार विभाजन के दौरान पाकिस्तान  चला गया, वह पृथ्वीराज की 37 वीं पीढ़ी से हैं। प्रवासन और चौहान गुर्जरो के तुपराना, कैराना, नवराना और यमुना नदी के तट पर अन्य गुर्जर चौहानों के  गांव अभी भी मौजूद हैं। पृथ्वीराज के तीन भाई कल्सराज चौहान जिसके वंशजो का कल्श्याण चौहान कहा जाता है। दूसरे भाई दीपराज चौहान के वंशजो को दापे चौहान और देवराज चौहान के वंशजो को देवड़ा चौहान कहा जाता है वर्तमान मे कैराना (उ.प्र) मे इन चौहान गुर्जरो के 84 गांव है। पृद्वीराज चौहान ने 1178 ईस्वी में गुर्जर मंडल का गठन किया था युध्द मै लडने लिए। [5]

चौहान वम्श के शासकसंपादित करें

 
पृथ्वीराज चौहान, चाहमान वंश का सबसे प्रतापी राजा थे।

नीचे शाकम्भरी और अजमेर के चाहमान शासकों की सूची दी गयी है। इसमें दिए गए उनके शासनकाल श्री आर बी सिंह द्वारा अनुमानित हैं।[13]


सन्दर्भसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें