प्रवेशद्वार:त्रिपुरा

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त्रिपुरा प्रवेशद्वार

त्रिपुरा भारत का एक राज्य है। अगरतला त्रिपुरा की राजधानी है। बंगाली और त्रिपुरी भाषा (कोक बोरोक) यहाँ की मुख्य भाषाये है। ऐसा कहा जाता है कि राजा त्रिपुर, जो ययाति वंश का 39 वाँ राजा था के नाम पर इस राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा । एक मत के मुताबिक स्थानीय देवी त्रिपुर सुन्दरी के नाम पर यहाँ का नाम त्रिपुरा पड़ा । यह हिन्दू धर्म के 51 शक्ति पीठों में से एक है ।

इतिहासकारों के मुताबिक यह शब्द स्थानीय कोकबोरोक भाषा के दो शब्दों का मिश्रण है - त्वि और प्रात्वि का अर्थ होता है पानी और प्रा का अर्थ निकट । ऐसा माना जाता है कि प्रचीन काल में यह समुद्र (बंगाल की खाड़ी ) के इतने निकट तक फैला था कि इसे इस नाम से बुलाया जाने लगा ।त्रिपुरा का उल्लेख महाभारत, पुराणों तथा अशोक के शिलालेखों में मिलता है।

राजा वीर चन्द्र माणिक्य महादुर देववर्मा ने अपने राज्य का शासन ब्रिटिश भारत की तर्ज पर चलाया । गणमुक्ति परिषद द्वारा चलाए गए आन्दोलनों से यह सन् 1949 में भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ ।

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चयनित लेख

अगरतला भारत के त्रिपुरा राज्य की राजधानी है। अगरतला की स्थापना 1850 में महाराज राधा कृष्ण किशोर माणिक्य बहादुर द्वारा की गई थी। यद्यपि त्रिपुरा में पर्यटक आते-जाते हैं, बेहतर होगा कि स्थानीय प्राधिकारियों से वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों संबंधी जायजा ले लिया जाए। पुराना अगरतला पूर्व में 5 कि॰मी॰ दूर है। यहां चौदह मूर्तियों वाला मंदिर है जहां जुलाई माह में श्रद्धालु कड़छी-पूजा के लिए एकत्र होते हैं। यहां आटोरिक्शा, बस और जीप द्वारा पहुंचा जा सकता है।

1901 में निर्मित उज्जयंता पैलेस, अगरतला का मुख्य स्मारक है जो मुगल-यूरोपीय मिश्रित शैली में निर्मित है। 800 एकड़ में फैला यह विशाल परिसर अब राज्य की विधान सभा के रूप में प्रयुक्त होता है।एयरपोर्ट रोड पर लगभग 1 कि॰मी॰ उत्तर में वेणुबन विहार नामक एक बौद्ध मंदिर है। गेदू मियां मस्जिद, जो अनोखे तकीके से क्राकरी के टूटे हुए टुकड़ों से बनी है, भी दर्शनीय है।

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चयनित चित्र

त्रिपुरा में अगरतला में जल के बीच बना नीर महल
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त्रिपुरा का खाना

चित्र:Misa-mach-poora-big tripura.jpg
त्रिपुरा का मीसा माछ पूरा तरकारी


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श्रेणियां

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संबंधित प्रवेशद्वार

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चयनित पर्यटन स्थल

उज्जयंत पैलेस
उज्जयंत पैलेस
पश्चिमी त्रिपुरा त्रिपुरा का एक जिला है।जिले का मुख्यालय अगरतला है जो राज्य की राजधानी भी है। पश्चिम त्रिपुरा जहां एक ओर मंदिरों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह जगह ऊंचे पर्वत, महल और झील आदि के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है।

पश्चिम त्रिपुरा बांग्लादेश के उत्तर, उत्तर त्रिपुरा के पूर्व और दक्षिण त्रिपुरा के दक्षिण से घिरी हुई है। यह स्थान कई प्रमुख राजाओं के हाथों से होकर गुजरा है। बीर बिक्रम किशोर माणिक्य यहां के अन्तिम राजा थे। इनकी मृत्यु के पश्चात् उनकी पत्‍नी महाराजी कंचनपुरा देवी के इस जगह का कार्यभार पूरी तरह से संभाला। यहां की प्रमुख नदियों में गोमती और होवाड़ है। इसका क्षेत्रफल है 2997 km² तथा जनसंख्या है 1,530,531 (2001)।

यहां के प्रमुख आकर्षण केन्द्र उज्जयंता पैलेस, राज्य संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय, सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, बेनुबन बिहार, गेडु मीन मस्जिद, मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र, चौदहवां देवी मंदिर, चर्च आदि है।
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प्रवेशद्वार:त्रिपुरा का नक्शा

चित्र:Roadmap tripura.jpg
त्रिपुरा का सड़क मानचित्र
नाज़िया हसन
नाज़िया हसन
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विकिपीडिया पूर्वोत्तरी भाषा में


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