बशोली (Basholi) या बसोहली (Basohli) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के कठुआ ज़िले में स्थित एक नगर है। यह रावी नदी के किनारे 1876 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। बशोली अपनी विशेष प्रकार की चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसे बशोली चित्रकला कहा जाता है।[1][2][3][4]

बशोली
Basholi
बशोली पुल
बशोली पुल
बशोली की जम्मू और कश्मीर के मानचित्र पर अवस्थिति
बशोली
बशोली
जम्मू और कश्मीर में स्थिति
निर्देशांक: 32°30′N 75°49′E / 32.50°N 75.82°E / 32.50; 75.82निर्देशांक: 32°30′N 75°49′E / 32.50°N 75.82°E / 32.50; 75.82
देशFlag of India.svg भारत
प्रान्तजम्मू और कश्मीर
ज़िलाकठुआ ज़िला
ऊँचाई460 मी (1,510 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल5,433
भाषा
 • प्रचलितडोगरी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)

जनसांख्यिकीसंपादित करें

भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार[5] बशोली की जनसंख्या 5865 थी, जिसमें पुरुषों का प्रतिशत 53 और महिलाओं का प्रतिशत 47 था। बशोली की साक्षरता दर 77% था, जो कि राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक था। कस्बे की 12% जनसंख्या, 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की थी।

बशोली चित्रकलासंपादित करें

 
गणेश (ई. 1730).[6]

बशोली अपनी विशेष प्रकार की चित्रकारी, बशोली चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे पहाड़ी चित्रकला के प्रथम रूप के रूप में स्वीकार किया जाता है जो अंतत: अठारहवीं सदी के मध्य में कांगड़ा चित्रकला के रूप में विकसित हुई।[7]

इतिहाससंपादित करें

अपनी कलात्मक श्रेष्ठता और राजसी संरक्षण द्वारा पोषित बशोली चित्रकला को आज चित्रकला की एक जोरदार, साहसिक, कल्पनाशील, अपरंपरागत और कलात्मक रूप से धनी शैली में शुमार किया जाता है। सत्रहवीं और अठाहरवीं सदी की शुरुआत में प्राथमिक रंगों का अधिक प्रयोग और विशेष प्रकार के चेहरे इस शैली की चित्रकला का प्रमुख गुण था, जो पश्चिमी हिमालय की तलहटी में यानि जम्मू और पंजाब में अधिक प्रचलित था। इस शैली के शुरुआती चित्र राजा किरपाल पाल (1678-1693) के समय के हैं। [8].

बशोली से शुरु होकर चित्रकला की यह शैली मनकोट, नूरपुर, कुल्लू, मंडी, सुकेत, बिलासपुर, नालागढ़, चंबा, कांगड़ा और गुलेर के पहाड़ी राज्यों तक फैल गयी। बशोली चित्रकला का पहला उल्लेख 1921 में प्रकाशित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में है।

चित्रदीर्घासंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Jammu, Kashmir, Ladakh: Ringside Views," Onkar Kachru and Shyam Kaul, Atlantic Publishers, 1998, ISBN 9788185495514
  2. "District Census Handbook, Jammu & Kashmir Archived 12 मई 2016 at the वेबैक मशीन.," M. H. Kamili, Superintendent of Census Operations, Jammu and Kashmir, Government of India
  3. "Restoration of Panchayats in Jammu and Kashmir," Joya Roy (Editor), Institute of Social Sciences, New Delhi, India, 1999
  4. "Land Reforms in India: Computerisation of Land Records," Wajahat Habibullah and Manoj Ahuja (Editors), SAGE Publications, India, 2005, ISBN 9788132103493
  5. "भारत की जनगणना २००१: २००१ की जनगणना के आँकड़े, महानगर, नगर और ग्राम सहित (अनंतिम)". भारतीय जनगणना आयोग. अभिगमन तिथि 2007-09-03.
  6. राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। कार्य के विवरण हेतु देखें: मार्टिन-डुबोस्ट (1997), पृ. 73, जिसके अनुसार: "गणेश अपना कमल फेंकने वाले हैं। बशोली लघुचित्र, ईसवी 1730। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। पूरे लाल रंग के शरीर पर नारंगी धोती पहने हैं। उनके छोटे से मुकुट के तीन कोनों पर कमल की कली सुशोभित हैं। गणेश ने अपने दोनो दाएं हाथों में से एक में माला और दूसरे में तीन मोदकों का पात्र उठा रखा है, जबकि एक चौथा मोदक उन्होनें अपनी सूंड से उठाया हुआ है और जिसे वो चखने ही वाले हैं। अपने बाएं दोनो हाथों मे से एक में एक कमल पुष्प और दूसरे में एक परशु उठा रखा है और इस परशु का हत्था उनके स्कंध पर झुका है। मुदगलपुराण (सप्तम,70), के अनुसार अहंकार के राक्षस ममासुर जिसने उन पर आक्रमण किया था, के वध के लिए, गणेश विघ्नराज ने उस पर कमल फेंका था। उस दैविक पुष्प की गंध से विचलित होकर ममासुर ने गणेश के समक्ष समर्पण किया।"
  7. Pahari centres Archived 5 जुलाई 2014 at the वेबैक मशीन. Arts of India: Architecture, Sculpture, Painting, Music, Dance and Handicraft, by Krishna Chaitanya. Published by Abhinav Publications, 1987. ISBN 81-7017-209-8. Page 62.
  8. A Review of Basohli Style in Indian Painting, Chandramani Singh, Kailash - Journal of Himalayan Studies vol 2, Number 1&2, 1974 [1] Archived 6 सितंबर 2006 at the वेबैक मशीन.