मुख्य मेनू खोलें

बालाघाट

दक्षिण मध्य प्रदेश का एक शहर

निर्देशांक: 21°48′34″N 80°11′11″E / 21.8094655°N 80.1862726°E / 21.8094655; 80.1862726 बालाघाट वैनगंगा नदी की गोद में दक्षिण–पूर्वी मध्यप्रदेश का एक शान्त, सुन्दर शहर। बालाघाट शहर सतपुडा पर्वतमाला के छोर पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ की त्रिकोणीय सीमा पर बसा है। वैसे तो यह शहर शुद्ध हिन्दी भाषी है, पर यहां कुछ बोलियां भी प्रचलित है। इसके ५०% भाग में जंगल है। यह एक नगरपालिका व बालाघाट जिले का प्रशासकीय मुख्यालय है। माना जाता है की इसे पहले "बूरा" या "बुरहा" के नाम से जाना जाता था और बाद मे इसका नाम बालाघाट पडा परन्तु इस बात का कोई प्रामाणिक स्रोत नही है।

बालाघाट
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
महापौर श्री अनिल धुंवारे
सांसद श्री ढाल सिंह बिसेन
जनसंख्या
घनत्व
17,01,698 (२०११ के अनुसार )
• 184/किमी2 (477/मील2)
क्षेत्रफल 9,229 km² (3,563 sq mi)

भौगोलिक स्थितिसंपादित करें

21.7421849, 80.2775546

बालाघाट 21.8° N 80.18° E[1] अक्षान्श पर स्थित है। इसकी समुद्र तल से औसत ऊचाई 288 मी (944 फीट) है।

कृषि और खनिजसंपादित करें

धान, मोटा अनाज और दलहन वैनगंगा नदी घाटी के उपजाऊ क्षेत्र में उगने वाली प्रमुख फ़सलें हैं। बालाघाट कृषि व्यापार और भारत सरकार का उपक्रम मैग्नीज और इंडिया लिमिटेड़ मैंगनीज खदान हैं। भरवेली और उक्वा यहाँ की मुख्य खदानें हैं। भरवेली एशिया की सबसे बड़ी मैंगनीज खदान हैं। साथ ही भारत सरकार की एक और कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड़ जो बालाघाट के मलाजखंड नगर पालिका के अंतरगत आता है।

जनसन्ख्यासंपादित करें

वर्ष २००१ की जणगणना के अनुसार इस शहर की जनसन्ख्या ७५०६१ है जिसमे ५१% पुरुष और ४९ % महिलाये है। जिले का साक्षरता प्रातिशत ७९% है। वर्ष 2011 कि जनगणना के अनुसार जिले कि जनसंख्या 1701156 है | पुरुषो कि सा. 87.13 महिला कि सा. 69.87 है

यातायातसंपादित करें

प्रमुख सड़क पर स्थित है व रेल जंक्शन भी है। यह मध्य प्रदेश के लगभग सभी बडे शहरो भोपाल, जबलपुर और इन्दौर से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। जबलपुर से ब्राडगेज के रेलमार्ग द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है। यह महाराष्ट्र के नगर नागपुर से औ‍र छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से भी सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। रायपुर नागपुर से बडी रेल लाईन से मुम्बई हावडा रेल मार्ग पर गोन्दिया शहर पर उतरकर बालाघाट सड़क या रेल मार्ग द्वारा एक घन्टे में पहुँचा जा सकता है।

प्रसिद्ध स्थलसंपादित करें

घूमने के लिए वैसे तो आप किसी भी जगह घूम लो आपको प्राकृतिक दृश्य बहुतायत मिलेंगे, आपको हर जगह सामाजिक समरसता के दर्शन होंगे। यहां के निवासी व्यवहार कुशल है, जो आपको एक शानदार भारतीय विरासत के दर्शन करवाएंगे।

  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
  • हट्टा की बावड़ी या बाहोली
  • लांजी का प्राचीन किला
  • गंगुल्पारा बाँध एवं जल प्रपात
  • धुती बाँध
  • किरनाई मन्दिर{किरनापुर}
  • रामपायली में स्थित प्राचीन मंदिर, जहां स्वयं श्री राम के चरण पड़े थे
  • माँ ज्वाला देवी मंदिर भरवेली नगर से 5 किमी में वीराजमान है।
  • बाहकल प्राचीन देवी मंदिर
  • श्री राम पवार मंदिर, शियारपाट
  • यह पोटियापाट, Dadia है

शिक्षण संस्थानसंपादित करें

यहाँ रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध दो महाविद्यालय और अन्य कई प्रशिक्षण और पॉलीटेक्निक संस्थान हैं। शासकीय उत्कष्ट विद्यालय कटंगी के विद्यार्थीयो ने जिले का नाम रोशन किया है। यह एक मात्र विद्यायल जो २०,००० विद्यार्थियों की पसंद है,कृषि के क्षेत्र में उन्नति लाने हेतु वर्ष 2012 में जिले की वारासिवनी तहसील में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई है जिससे जिले में कृषि की उन्नत तकनीक का प्रसार हो रहा है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

कैसे जाये बालाघाटसंपादित करें

यह मध्य प्रदेश के बडे शहरो जैसे राजधानी भोपाल, सन्स्कारधानी जबलपुर और पमहानगरी इन्दौर से सीधे सडकमार्ग से जुडा है। जबलपुर से ब्राडगेज के लौहमार्ग (रेलमार्ग्) से आप जगप्रसिद्ध सतपुडा एक्सप्रेस पकडकर यहा पहुच सकते है। यह महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर् से औ‍र छतीसगढ की राजधानी रायपुर से भी सीधे सडक मार्ग से जुडा है। नागपुर से आप बडी रेललाईन से मुम्बई हावडा मार्ग पर दो घन्टे मे गोन्दिया शहर आ जाये जहा से बालाघाट सडक/रेल मार्ग से सिर्फ् एक घन्टे मे पहुंच सकते है।परमार वंश


इन्हें भी देखेंसंपादित करें