गोवा की एक दुकान में मसाले
इस्तानबुल की एक दुकान में मसाले

भोजन को सुवास बनाने, रंगने या संरक्षित करने के उद्देश्य से उसमें मिलाए जाने वाले सूखे बीज, फल, जड़, छाल, या सब्जियों को 'मसाला (spice) कहते हैं। कभी-कभी मसाले का प्रयोग दूसरे फ्लेवर को छुपाने के लिए भी किया जाता है।

मसाले, जड़ी-बूटियों से अलग हैं। पत्तेदार हरे पौधों के विभिन्न भागों को जड़ी-बूटी (हर्ब) कहते हैं। इनका भी उपयोग फ्लेवर देने या अलंकृत करने (garnish) के लिए किया जाता है।

बहुत से मसालों में सूक्ष्मजीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

उत्पादनसंपादित करें

उत्पादन[1]
देश ? ?
उत्पादन (टन में) उत्पादन उत्पादन (टन में) उत्पादन
भारत 16,00,000 86 % 16,00,000 86 %
चीन 66,000 4 % 66,000 4 %
बांग्लादेश 48,000 3 % 48,000 3 %
पाकिस्तान 45,300 2 % 45,300 2 %
तुर्की 33,000 2 % 33,000 2 %
नेपाल 15,500 1 % 15,500 1 %
अन्य देश 60,900 3 % 60,910 3 %
कुल 18,68,700 100 % 18,68,710 100 %
 
डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी के मसालों के व्यापार का क्षेत्र

भारतीय मसालेसंपादित करें

भारतीय मसाले देश और दुनिया सभी जगह अपनी खुशबू और रंग के लिए मशहूर हैं। भारतीय किचन की इन बेसिक जरूरत पर आप भी जीरा, इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी, हल्दी, मिर्च, धनिया जैसी मसाला व्यापार कर अपना कारोबार खड़ा खड़ा कर सकते हैं।

खारी बावली न केवल एशिया का सबसे बड़ा थोक मसाला बाजार बन गया है बल्कि इसे उत्तरी भारत का एक सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र भी माना जाता है। यहाँ पर व्यापारी और दुकानदार, मसालों (स्थानीय और विदेशी दोनों), सूखे मेवों और अन्य वस्तुओं को सबसे सस्ते दामों व अच्छे सौदे के रूप में खरीदने के लिए आ सकते हैं।

प्रमुख मसालेसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Chiffres 2003-2004, données de FAOSTAT (FAO)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें