सतना (Satna) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के सतना ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

सतना
Satna
उपनाम: सीमेण्ट नगरी
सतना की मध्य प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
सतना
सतना
मध्य प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 24°34′05″N 80°49′26″E / 24.568°N 80.824°E / 24.568; 80.824निर्देशांक: 24°34′05″N 80°49′26″E / 24.568°N 80.824°E / 24.568; 80.824
ज़िलासतना ज़िला
प्रान्तमध्य प्रदेश
देशFlag of India.svg भारत
शासन
 • सांसदगणेश सिंह
ऊँचाई315 मी (1,033 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल2,80,222
भाषा
 • प्रचलित भाषाएँहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड485001
टेलीफोन कोड07672
वाहन पंजीकरणMP-19
वेबसाइटwww.satna.nic.in

परिचयसंपादित करें

मध्य प्रदेश में मुंबई-हावड़ा रेल लाइन पर जबलपुर-इलाहाबाद के बीच स्थित सतना तत्कालीन विन्ध्य प्रदेश का प्रदेश-द्वार कहा जाता था, अर्थात् रीवा, सीधी, पन्ना या छतरपुर आने वाले लोग सतना स्टेशन पर उतरते थे। इसके अलावा प्रसिद्ध तीर्थ चित्रकूट और मैहर भी सतना जिले में स्थित हैं। विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो आने के लिये भी अधिकांश पर्यटक सतना होकर ही आते हैं। इस जिले में रामवन, बिरसिंहपुर, ((कंगालदास बाबा)) भरजुना, धारकुंडी आश्रम आदि स्थान भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं।

तत्कालीन बघेलखण्ड की राजधानी रीवां थी जिसके अंर्तगत सतना था। इस कारण राजघराने के जमाने का प्रभाव कमोबेश आज भी सतना में देखने को मिलता है। रीवां राज्य के कई पुराने भवन आज किसी न किसी रूप में उपयोग हो रहे हैं और अपनी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।

यहां के राजनैतिक इतिहास की नींव के पत्थरों में बाबूलाल बिहारी, शारदा प्रसाद, विश्वासराव पेन्टर, गनपत प्रसाद मारवाडी, पं. अवधबिहारी लाल, हुकुमचंद नारद, पं. रामस्वरूप, मोहनलाल मिश्र, शिवानन्द लाल, शहीद लाल पद्मधर सिंह,आदि है। सतना के राजनैतिक इतिहास में ये ऐसे नाम है जिनके द्वारा यहां राजनैतिक चेतना जाग्रत हुई। बाद में यहां गोविन्द नारायण सिंह (प्रदेश की संविद सरकार के मुख्यमंत्री), बैरिस्टर गुलशेर अहमद (विधान सभा अध्यक्ष तथा विधि मंत्री) डॉ॰ लालता प्रसाद खरे (नगर पालिका के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन और बाद में राज्य मंत्री),दादा सुखेन्द्र सिंह (पूर्व सांसद सतना),रामानंद सिंह (पूर्व मंत्री एवं सांसद),तोषण सिंह (पूर्व विधायक), सक्रिय हुये।

सतना अब एक औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। बिड़ला घराने के सीमेन्ट के दो कारखाने, सतना सीमेन्ट फैक्ट्री तथा मैहर सीमेन्ट और यूनिवर्सल केबल्स फैक्ट्री हैं। एक और प्रिज्म सीमेन्ट है। इनके अलावा चूना उद्योग के कई छोटे-बडे संस्थान स्थापित है। बीड़ी उत्पादकों के कई संस्थान हैं। यहां के बाजार पर सिंधी, मारवाडी और गुजराती व्यापारियों का वर्चस्व है।

यह शहर कई नामी गिरामी हस्तियों के कारण जाना जाता है। न्याय के क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस जे.एस. वर्मा यहीं के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरू में यहां वकालत की फिर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पदों में रहने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे। चित्रकूट में नानाजी देशमुख ने दीनदयाल शोध संस्थान, ग्रामोदय विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षा संस्थान प्रारंभ कर समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। मैहर के विश्वप्रसिद्ध सरोदवादक उस्ताद अलाउद्दीन खां ऐसे महामानव थे जो मैहर की शारदा देवी के उपासक थे। स्वामी रामभद्राचार्य जो स्वयं नेत्रहीन हैं, ने चित्रकूट में नेत्रहीनों के लिये विद्यालय प्रारंभ किया जो सुचारू ढंग से चल रहा है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh Archived 3 जुलाई 2019 at the वेबैक मशीन.," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172
  2. "Tourism in the Economy of Madhya Pradesh," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293