माउंट आबू

राजस्थान, भारत में हिल स्टेशन
(आबू पर्वत से अनुप्रेषित)

माउंट आबू (Mount Abu) भारत के राजस्थान राज्य के सिरोही ज़िले में स्थित एक नगर है। यह अरावली पहाड़ियों में स्थित एक हिल स्टेशन है जो एक 22 किमी लम्बे और 9 किमी चौड़े पत्थरीले पठार पर बसा हुआ है। इसकी सबसे ऊँची चोटी 1,722 मी॰ (5,650 फीट) ऊँचा गुरु शिखर है।[1][2]

माउंट आबू
Mount Abu
आबू पर्वत
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माउंट आबू
माउंट आबू
उपनाम: राजस्थान का शिमला
माउंट आबू is located in राजस्थान
माउंट आबू
माउंट आबू
राजस्थान में स्थिति
निर्देशांक: 24°35′31″N 72°42′29″E / 24.592°N 72.708°E / 24.592; 72.708निर्देशांक: 24°35′31″N 72°42′29″E / 24.592°N 72.708°E / 24.592; 72.708
देश भारत
प्रान्तराजस्थान
ज़िलासिरोही ज़िला
ऊँचाई1220 मी (4,000 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल22,943
भाषा
 • प्रचलितराजस्थानी, हिन्दी
समय मण्डलभामस (यूटीसी+5:30)
पिनकोड307501
दूरभाष कोड02974
वाहन पंजीकरणRJ 38

विवरण

 
देलवाड़ा मंदिर कई दृष्टियों से ताजमहल से भी अधिक सुन्दर है।

समुद्र तल से १२२० मीटर की ऊँचाई पर स्थित आबू पर्वत (माउण्ट आबू) राजस्थान का एकमात्र पहाड़ी नगर है । इस शहर का प्राचीन नाम अर्बुदांचल था , इस स्थान पर साक्षात भगवान शिव ने भील दंपत्ति आहुक और आहूजा को दर्शन दिए थे । यह अरावली पर्वत का सर्वोच्च शिखर, जैनियों का प्रमुख तीर्थस्थान तथा राज्य का ग्रीष्मकालीन शैलावास है। अरावली श्रेणियों के अत्यंत दक्षिण-पश्चिम छोर पर ग्रेनाइट शिलाओं के एकल पिंड के रूप में स्थित आबू पर्वत पश्चिमी बनास नदी की लगभग १० किमी संकरी घाटी द्वारा अन्य श्रेणियों से पृथक् हो जाता है। पर्वत के ऊपर तथा पार्श्व में अवस्थित ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक तीर्थमंदिरों एवं कलाभवनों में शिल्प-चित्र-स्थापत्य कलाओं की स्थायी निधियाँ हैं। यहाँ की गुफा में एक पदचिहृ अंकित है जिसे लोग भृगु का पदचिह् मानते हैं। पर्वत के मध्य में संगमरमर के दो विशाल जैनमंदिर हैं।

राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम है। यह स्थान राज्य के अन्य हिस्सों की तरह गर्म नहीं है। माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को अपनी ओर खींचती है। 1190ई के दौरान आबू का शासन राजा जेतसी परमार भील के हाथो में था। बाद में आबू भीम देव द्वितीय के शासन का क्षेत्र बना। माउंट आबू चौहान साम्राज्य का हिस्सा बना। बाद में सिरोही के महाराजा ने माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया। ब्रिटिश शासन के दौरान माउंट आबू मैदानी इलाकों की गर्मियों से बचने के लिए अंग्रेजों का पसंदीदा स्थान था।

इतिहास

माउंट आबू प्राचीनकाल से ही साधु संतों का निवास स्थान रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हिन्दू देवी देवता इस पवित्र पर्वत पर भ्रमण करते हैं। महर्षि वशिष्ठ ने पृथ्वी से असुरों के विनाश के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था। जैन धर्म के चौबीसवें र्तीथकर भगवान महावीर भी यहां आए थे। उसके बाद से माउंट आबू जैन अनुयायियों के लिए एक पवित्र और पूजनीय तीर्थस्थल बना हुआ है। एक कहावत के अनुसार आबू नाम हिमालय के पुत्र 'आरबुआदा' के नाम पर पड़ा था। आरबुआदा एक शक्तिशाली सर्प था, जिसने एक गहरी खाई में भगवान शिव के पवित्र वाहन नंदी बैल की जान बचाई थी।[3]

 
१८९८ में आबू पर्वत का दृष्य

प्राकृतिक सुषमा और विभोर करनेवाली वनस्थली का पर्वतीय स्थल 'आबू पर्वत' ग्रीष्मकालीन पर्वतीय आवास स्थल और पश्चिमी भारत का प्रमुख पर्यटन केंद्र रहा है। यह स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के साथ एक परिपूर्ण पौराणिक परिवेश भी है। यहाँ वास्तुकला का हस्ताक्षरित कलात्मकता भी दृष्टव्य है। आबू का आकर्षण है कि आए दिन मेला, हर समय सैलानियों की हलचल चाहे शरद हो या ग्रीष्म। दिलवाड़ा मंदिर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। माउंट आबू से १५ किलोमीटर दूर गुरु शिखर पर स्थित इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथंकरों को समर्पित हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियाँ भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। दिलवाड़ा के मंदिरों से ८ किलोमीटर उत्तर पूर्व में अचलगढ़ किला व मंदिर तथा १५ किलोमीटरदूर अरावली पर्वत शृंखला की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त माउंट आबू में नक्की झील, गोमुख मंदिर, माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य आदि भी दर्शनीय हैं।

अचलगढ़ किला

अचलगढ़ किला राजस्थान के माउंट आबू में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक किला है जो पर्यटकों को अपनी विशेष वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए खींचता है। यह किला गुर्जर प्रतिहार शासक राजा भीमदेव द्वितीय द्वारा 9वीं शताब्दी में बनवाया गया था और बाद में महारावल कुंभा ने इसे सुधारा था।

अचलगढ़ किले में कुल्लू जातक स्तूप, अचलदेवी मंदिर और नखी झील जैसे अनेक दर्शनीय स्थल हैं। किले से आप माउंट आबू और आसपास के सुंदर नजारे देख सकते हैं। इसके आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य आपको मनमोहक बना देता है।

यहां से आप सूर्यास्त और सूर्योदय के समय अत्यंत सुंदर नजारे देख सकते हैं जो आपके यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं। किले के इतिहास से जुड़े अनेक किस्से और कहानियां आपको इसे और रोमांचक बनाते हैं।

अचलगढ़ किले को जाने के लिए आपको विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि किले के बाहर विशेष सुरक्षा का प्रबंध होता है। इसलिए यात्रा के पहले स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें और सही जानकारी प्राप्त करें।

दिलवाडा जैन मंदिर

माउंट आबू का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो पर्यटकों को अपनी श्रृंगारिक आवश्यकता और विशेष वास्तुकला के लिए खींचता है। यह मंदिर जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है और इसे विश्व के सबसे खूबसूरत जैन मंदिरों में से एक माना जाता है।

दिलवाडा मंदिर का निर्माण अनुष्ठान महाराणा खुंभा द्वितीय ने 11वीं सदी में करवाया था। मंदिर का निर्माण विशाल श्वेत मार्बल के इस्तेमाल से किया गया है और इसमें कई भव्य स्तूप, दोमेड चतुर्मुखी मंदिर और विक्रम सम्वत संख्या के साथ अनुष्ठान शालाएं शामिल हैं।

दिलवाडा मंदिर के भीतर आकर्षक रूप से सजाए गए दर्शनीय स्थल और मूर्तियां हैं जो आपको इस धार्मिक स्थल के महत्वपूर्ण इतिहास और धरोहर के बारे में बताती हैं।

धार्मिक दृष्टिकोन से, दिलवाडा मंदिर एक महत्वपूर्ण जैन पीठ है जिसमें जैन धर्म के संतों के जीवन और उनके उपदेशों के बारे में बताया जाता है। इस स्थान पर शांति और आध्यात्मिकता का आनंद अनुभव करना यात्रियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होता है।

माउंट आबू आने वाले पर्यटकों के लिए दिलवाडा मंदिर एक अवश्य देखने योग्य स्थल है, जो धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के साथ विशेष श्रृंगारिकता का भी आनंद देता है।

  • माउंट आबू  में घूमने की और अधिक जानकारी जैसे कहा घूमे , जाने का सही समय , कैसे जाए , माउंट आबू का प्रसिद्ध भोजन आदि के लिए आप इस वेबसाइट traveljat पर विजिट कर सकते है।

आवागमन

माउंट आबू से निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर यहाँ से १८५ किलोमीटर दूर है। उदयपुर से माउंट आबू पहुँचने के लिए बस या टैक्सी की सेवाएँ ली जा सकती हैं। समीपस्थ रेलवे स्टेशन आबू रोड २८ किलोमीटर की दूरी पर है जो अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर और जोधपुर से जुड़ा है। माउंट आबू देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा भी जुड़ा है। दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से माउंट आबू के लिए सीधी बस सेवा है। राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें दिल्ली के अलावा अनेक शहरों से माउंट आबू के लिए अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं।

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

सन्दर्भ

  1. "Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332
  2. "Berlitz Pocket Guide Rajasthan," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990
  3. "माउंट आबू शहर मार्गदर्शिका" (एचटीएमएल). ट्रेनएन्क्वायरी.कॉम. मूल से 24 November 2006 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 March 2008.