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नक्शे के स्वायत्त डिवीजनों
उत्तर-पूर्वी स्वायत्त डिवीजनों

भारत में कई स्वायत्त प्रशासनिक प्रभाग थे जिन्हें भारत की केंद्रीय सरकार ने उनकी राज्य विधान-मंडलों के अधीन भिन्न भिन्न स्तरों की  स्वायत्तता प्रदान की है। इन स्वायत्त परिषदों के स्थापन और कार्यकलाप भारत के संविधान की छठी अनुसूची के आधार पर निश्चित किये गये हैं।[1]

अनुक्रम

असम मेंसंपादित करें

असम में भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत तीन स्वायत्त परिषदों का गठन हुआ है।

ये तीन स्वायत्त परिषद हैं:

बोडोलैंड प्रादेशिक परिषदसंपादित करें

बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद या बोडोलैण्ड टेरिटोरियल काउन्सिल (बीटीसी) के पास ४० से अधिक नीति क्षेत्रों में विधायी, प्रशासनिक, कार्यकारी और वित्तीय अधिकार हैं। बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिलों  में ४ प्रशासनिक जिलों - उदलगुरी, बाक्सा, चिरांग, कोकराझार आते हैं जिनमें विभिन्न संरक्षित आदिवासी पट्टियां और ब्लॉक आते हैं। असम में  बीटीसी विधान सभा से ४० निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए और ६ राज्यपाल द्वारा असम के अप्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों से असम के जिलों से आम चुनावों में चुने गये सदस्यों में से नामित किये जाते हैं।  यह प्रावधान भारत सरकार और बोडो लिबरेशन टाइगर्स के बीच २००३ में हुए एक समझौते के तहक किया गया था। यह संविधान की संशोधित छठी अनुसूची के तहत २००३ से क्रियाशील है। बीटीसी के प्रथम मुख्य कार्यकारी सदस्य हंगरामा मोहिलारी थे। उनकी पूर्ववर्ती संस्था  बोडोलैंड स्वायत्तशासी परिषद कम अधिकारों के साथ कार्यशील रही थी।

इसका मुख्यालय कोकराझार जिले के कोकराझार शहर में स्थित है। 

दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

उत्तरी कछार हिल्स स्वायत्त परिषद, दीमा हसाओ जिला (NCHAC) भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के तहत गठन की गयी आदीवासी लोगों के विकास और जिले के प्रशासन हेतु गठित की गयी एक स्वायत्त परिषद है।

इसका मुख्यालय दीमा हसाओ जिले के हाफ़लांग में स्थित है।

कार्बी आंगलांग स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद, पूर्व कार्बी आंगलोंग (KAAC) जिले में गठित एक स्वायत्त परिषद है जिसका गठन भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातीय लोगों के विकास हेतु किया गया था। 

इसका मुख्यालय पूर्व कार्बी आंगलांग जिले के दीफू में है । [2]

अन्यसंपादित करें

  • देवरी स्वायत्त परिषद
  • मिसिंग स्वायत्त परिषद
  • राभा हसोंग स्वायत्त परिषद
  • सोनोवाल कछारी स्वायत्त परिषद
  • थेंगवाल कछारी स्वायत्त परिषद
  • तीवा स्वायत्त परिषद

मणिपुरसंपादित करें

सदर हिल्स स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

सदर हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (सदर हिल्स ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (SHADC) में मणिपुर राज्य के साइकुल उपमण्डल, साइतु उपमंडल एवं सेनापति जिले के सदर हिल्स  उपमंडल को शामिल किया गया है। यह मणिपुर राज्य के छः स्वायत्त जिला परिषदों में से एक है ।

अन्यसंपादित करें

  • चुडचांदपुर
  • चंदेल
  • सेनापति
  • तामेंगलांग
  • उखरूल

जम्मू और कश्मीरसंपादित करें

लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, कार्गिल (लद्दाख ऑटोनोमस हिल डवलपमेंट काउन्सिल, कार्गिल)संपादित करें

कर्गिल भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू कश्मीर का एक जिला है। कार्गिल पश्चिमी ओर नियन्त्रण रेखा के पार पाक अधिकृत कश्मीर के बाल्टिस्तान से और दक्षिणी ओर कश्मीर घाटी से घिरा हुआ है। कश्मीर से सांस्कृतिक एवं धार्मिक भिन्नता के कारण लद्दाख के स्थानीय लोगों द्वारा इस जिले को भारतीय संघ का एक नया राज्य बनाने की मांग को देखते हुए भारत सरकार ने लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (लद्दाख ऑटोनोमस हिल डवलपमेंट काउन्सिल) का गठन किया। यह परिषद सीमित स्वायत्तता के साथ यहाम प्रशासी है।

लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, लेह (लद्दाख ऑटोनोमस हिल डवलपमेंट काउन्सिल, लेह)संपादित करें

लेह के दो जिलों के लद्दाख. निम्नलिखित व्यापक आंदोलन बनाने के लिए यह एक केंद्र शासित प्रदेश भारत का कारण करने के लिए सांस्कृतिक और भाषाई मतभेद के साथ कश्मीर की सरकार भारत का गठन लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) है, जो नियंत्रित करता है इस क्षेत्र के साथ सीमित राजनीतिक स्वायत्तता है । पहली बार चुनाव के लिए LAHDC में आयोजित की गई, वर्ष 1995.

मेघालयसंपादित करें

गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (गारो हिल्स ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल)(GHADC) का गठन गारो जनजाति के लोगों के विकास के लिए किया गया था और इसमें पूर्वी गारो हिल्स जिला, पश्चिम गारो हिल्स जिला, दक्षिण गारो हिल्स, उत्तरी गारो हिल्स जिले और दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिलों को शामिल किया गया है। इसका मुख्यालय तुरा में है।

जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जयन्तिया हिल्स ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (JHADC) का गठन जयन्तिया जनजाति के लोगों के विकास हेतु किया गया था। इसका मुख्यालय जोवाई में है।

खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (खासी हिल्स ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (KHADC) का गठन खासी लोगों के विकास के लिए किया गया था। इसमें पश्चिम खासी हिल्स जिला, पश्चिम खासी हिल्स जिला और री भोई जिलों को शामिल किया गया है। इसका मुख्यालय में शिलांग में स्थित है।

मिजोरमसंपादित करें

चकमा स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

चकमा स्वायत्त जिला परिषद (चकमा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (CADC) एक स्वायत्त परिषद के रूप में मिजोरम के दक्षिण-पश्चिमी भाग में रहने वाले आदीवासी चकमा लोगों के विकास के लिये किया गया था।

लाइ स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

लाइ स्वायत्त जिला परिषद (लाई ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (LADC) एक स्वायत्त परिषद है जिसका गठन मिज़ोरम राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग में रहने वाले लाई जनजाति के लोगों के लिये किया गया था।

मारा स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

मारा स्वायत्त जिला परिषद (मारा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (MADC) एक स्वायत्त परिषद है जिसका गठन मिजोरम राज्य के दक्षिणी भाग में रहने वाले मारा जनजाति के लोगों के लिये किया गया था।

त्रिपुरासंपादित करें

त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषदसंपादित करें

त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज़ ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल) (टीटीएएडीसी) एक स्वायत्त परिषद है जिसका गठन त्रिपुरा राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के विकास हेतु किया गया था। इसकी परिषद और विधानसभा राज्य की राजधानी अगरतला से के २० किमी दूर स्थित खुमुलुङ नामक यहां के एक शहर में स्थित है।

पश्चिम बंगालसंपादित करें

गोरखालैण्ड क्षेत्रीय प्रशासनसंपादित करें

गोरखालैण्ड प्रादेशिक प्रशासन (गोरखालैण्ड टेरिटोरियल एड्मिनिस्ट्रेशन) (जीटीए) एक अर्ध-स्वायत्त प्रशासनिक निकाय है जिसका गठन पश्चिम बंगाल, भारत के दार्जिलिंग पहाड़ियों के विकास हेतु किया गया था।  GTA का स्थान १९८८ में नवगठित दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल ने ले लिया और दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र पर २३ वर्षों से प्रशासन चला रहा है। [3] GTA वर्तमान में तीन पहाड़ी उप विभाजनों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, और कुर्सेयोंग और सिलीगुड़ी एमसी उपखंड पर प्रशासन देखता है। इसका मुख्यालय दार्जिलिंग में स्थित है।[4]

डी फ़ैक्टो स्वायत्त क्षेत्रसंपादित करें

नार्थ सेण्टिनल द्वीपसंपादित करें

उत्तर प्रहरी द्वीप भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह द्वीप श्रृंखला में स्थित है। यह भारत का एक संघ राज्य क्षेत्र है। यह विश्व के कुछ अन्तिम शेष बचे अनकाण्टेक्टेड लोगों में से एक, सेण्टिनलीज़ का निवास है। ये विश्व के उन कुछ समूहों में से एक हैं जो बाहरी विश्व से सम्पर्क रखना नहीं चाहते हैं और आधुनिक सभ्यताॐ से विलग रहते हैं।  इन लोगों से कभी कोई संधि या आवागमन या सम्पर्क संभव नहीं हो पाता है न ही ये बाहर किसी व्यवसाय के उद्देश्य से ही निकलते हैं। इनका विश्व इनके द्वीप तक ही सीमित है।

स्थानीय सरकार (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) कहा गया है [5] कि वे कोई इरादा नहीं है करने के लिए के साथ हस्तक्षेप Sentinelese की जीवन शैली या निवास स्थान है । हालांकि इस द्वीप की संभावना है करने के लिए है का सामना करना पड़ा गंभीरता के प्रभाव से दिसंबर 2004 की सुनामी, के अस्तित्व के Sentinelese की पुष्टि की थी, जब कुछ दिनों के लिए घटना के बाद, एक भारतीय सरकार के हेलीकाप्टर मनाया उनमें से कई, जो शॉट तीर पर मँडरा विमान के पीछे हटाना करने के लिए यह है ।

हालांकि यह नहीं किया गया है के साथ किसी भी औपचारिक संधि, सरकारी नीति के कम से कम हस्तक्षेप सुनिश्चित किया गया है कि वे वास्तविक स्वायत्तता और संप्रभुता पर उनके द्वीप की रूपरेखा के तहत भारतीय और स्थानीय सरकारों.[6]

यह भी देखेंसंपादित करें

संदर्भसंपादित करें

  1. [Articles 244(2) and 275(1)]. Constitution of India.
  2. http://mdoner.gov.in/node/752
  3. "Gorkhaland Territorial Administration Agreement signed". Outlook. July 18, 2011. मूल से 3 June 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 March 2012.
  4. "Pact signed for Gorkhaland Territorial Administration". The Hindu. July 18, 2011. अभिगमन तिथि 16 March 2012.
  5. The Sentineli Error in webarchive template: Check |url= value. Empty. .
  6. Administration in India's Andaman and Nicobar Islands has finally decided upon a policy of minimal interference

बाहरी लिंकसंपादित करें