नवादा

बिहार राज्य का जिला नवादा

नवादा (Nawada) भारत के बिहार राज्य के नवादा ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। नवादा जिला मगध का क्षेत्र हैं इस क्षेत्र के लोग मगही बोलते हैं[3][4]

नवादा
नगर
गोवर्धन मंदिर नवादा
प्रजातंत्र द्वार
नवादा is located in बिहार
नवादा
नवादा
Location in Bihar, India
निर्देशांक: 24°53′N 85°32′E / 24.88°N 85.53°E / 24.88; 85.53निर्देशांक: 24°53′N 85°32′E / 24.88°N 85.53°E / 24.88; 85.53
देश भारत
राज्यबिहार
क्षेत्रमगध
ज़िलानवादा
वार्ड44 वार्ड
शासन
 • सभानवादा नगर पालिका
ऊँचाई80 मी (260 फीट)
जनसंख्या (2011)[1]
 • कुल1,80,740
वासीनामनवादा वासी
भाषा
 • अधिकारीहिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, मगही
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिन कोड805110, 805111 (नवादा)[2]
टेलीफोन कोड06324
आई॰एस॰ओ॰ ३१६६ कोडIN-BR
वाहन पंजीकरणBR-27
लिंग अनुपात1.14 /
वेबसाइटnawada.nic.in/hi/

विवरण संपादित करें

नवादा दक्षिण बिहार का एक खूबसूरत एवं ऐतिहासिक जिला है। इसका मुख्यालय पटना के दक्षिण-पूर्व में 93 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नवादा शहर में है। प्रकृति की गोद में बसा नवादा जिला को कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। ककोलत जलप्रपात, प्रजातंत्र द्वार, नारद संग्रहालय, सेखोदेवरा आश्रम और गुनियाजी तीर्थ और हिसुआ प्रखंड के दोना पंचायत में बहुत पुरानी मंदिर तीर्थ स्थल यात्रा हैं। आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। नवादा के उत्तर में नालंदा, दक्षिण में झारखंड का कोडरमा जिला, पूर्व में शेखपुरा एवं जमुई तथा पश्चिम में गया जिला है। मगही यहाँ की बोली और हिन्दी मुख्य भाषा हैं।

इतिहास संपादित करें

नवादा को ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्राचीन समय में यह शक्तिशाली मगध साम्राज्य का अंग रहा है। इस जगह पर वृहद्रथ, मौर्य, गुप्त एवं कण्व शासकों ने लम्बे समय तक शासन किया है। मगध के शक्तिशाली बनने के पूर्व यह क्षेत्र महाभारत कालीन राजा जरासंध के शासन प्रदेश का हिस्सा था। तपोबन को जरासंध की जन्मभूमि माना जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि भीम ने पकड़डीहा में जरासंध को मल्लयुद्ध में हराया था। मगध के पतन एवं शासन का क्षेत्रीयकरन हो जाने के बाद भी वजीरगंज से ५ किमी उत्तर-पश्चिम स्थित कुर्किहार, नवादा में पाल वंश का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा। बोधगया एवं पारसनाथ से निकटता के चलते यह क्षेत्र बौद्ध भिक्षुओं एवं जैन मुनियों का तपस्या स्थल रहा है। वारसलीगंज से १० किमी दूर दरियापुर पार्वती में कपोतक बौद्ध-विहार के अवशेष मिले हैं। अपसर गाँव में राजा आदित्यसेन ने महत्वपूर्ण इमारतें एवं अवलोकितेश्वर की मूर्ति स्थापित करवाई थी। सीतामढी, बारतगढ, नारदीगंज जैसे जगह आदिकाल से हिंदू आस्था के केंद्र रहे हैं।
१८५७ में अंग्रेजो से लड़ी गयी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय यहाँ के वीर बांकुड़ों ने नवादा को अंग्रेजी शासन से मुक्त करा लिया था। सन १८५० के आसपास अंग्रेजों द्वारा बसाए जा रहे नए उपनिवेश में गिरमिटिया मजदूरों की एक बड़ी खेप गुएना, फिजी एवं रियूनियन आईलैंड में बस गए जहाँ उन्होंने एक नए भारत का निर्माण किया।
स्वतंत्रता पश्चात भारत के पहले राष्ट्रपति डा राजेन्द्र प्रसाद ने शेखोदेवरा गाँव में सर्वोदय आश्रम की स्थापना की थी। इस आश्रम में जय प्रकाश नारायण ने भी अपना महत्वपूर्ण समय गुजारा। नवादा के पद्म भूषण प्रसाद एवं पंडित सियाराम तिवारी ध्रुपद एवं ठुमरी शैली के श्रेष्ठ गायकों में शुमार हैं। गौरवशाली इतिहास के विविध रंगों में रंगा नवादा जिला पिछले वर्षों में राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार रहा है।

भूगोल संपादित करें

नवादा की भौगोलिक स्थति 24°53′N 85°32′E / 24.88°N 85.53°E / 24.88; 85.53[5] पर है। जिले का क्षेत्रफल 2492 किमी एवं समुद्रतल से औसत ऊंचाई 80 मीटर (262 फीट) है। जिले का दक्षिणी भाग (मेसकौर एवं नरहट) पठारी है। नवादा, रजौली ,वारसलीगंज एवं हिसुआ यहाँ के प्रमुख शहर है। जिले की औसत साक्षरता 59.76% है जो राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। स्थानीय आबादी में हिंदू 88.65% एवं मुस्लिम 11.3% है। कुछ संख्या जैनियों की भी है। खरवार, संथाल एवं लोहरा जिले की प्रमुख जनजातियाँ हैं।

राजनीतिक विभाजन संपादित करें

  • अनुमंडलः नवादा एवं रजौली
  • प्रखंडः १४

नवादा अनुमंडल- नवादा, वारसलीगंज,कौआकोल, काशीचक, पकरीवरामा, हिसुआ, नारदीगंज । रजौली अनुमंडल- रजौली, सिरदला, रोह, मेसकौर, नरहट, एवं गोविंदपुर , अकबरपुर ।

  • पुलिस थानों की संख्या: १४
  • पत्रालयों की संख्या: १९१
  • पंचायतों की संख्या:187
  • गाँवों की संख्या:1099
  • विधानसभा क्षेत्र : १ रजौली २ हिसुआ ३ नवादा ४ गोविन्दपुर ५ वारसलीगंज

शिक्षण संस्थान संपादित करें

  • प्राथमिक विद्यालय- ७४९
  • मध्य विद्यालय- १५९
  • उच्चतर माध्यमिक विद्यालय- 65
  • महाविद्यालय-

कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय नवादा, राजेन्द्र मेमोरियल वीमेन्स कॉलेज नवादा, सीताराम साहु महाविद्यालय नवादा, विधि महाविद्यालय नवादा, गनौरी रामकली शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय महानंदपुर नवादा, त्रिवेणी सत्यभामा महाविद्यालय हिसुआ, दिलीप दशरथ महिला महाविद्यालय हिसुआ,एस.एन .सिन्हा कॉलेज वारिसलीगंज,महिला महावि्यालय वारिसलीगंज

प्रमुख दर्शनीय स्थल संपादित करें

ककोलत जलप्रपात संपादित करें

फतेहपुर-गोविन्दपुर मार्ग पर थाली से पांच किलोमीटर दक्षिण वन में और नवादा जिला मुख्यालय से दक्षिण-पूर्व में 33 किलोमीटर की दूरी पर ककोलत स्थित है। प्रकृति में गोद में बसा ककोलत जलप्रपात प्राकृतिक उपहार के अतिरिक्त पुरातत्विक एवं धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह झरना समुद्र तल से लगभग 150 से 160 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह पर पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान एक राजा को सर्पयोनि से मुक्त कराया था। प्रत्येक वर्ष चैत संक्रांति के अवसर पर यहां एक सप्‍ताह तक मेले का आयोजन होता है। चैत संक्रांति को विशुआ संक्रांति भी कहा जाता है। महाभारत में जिस काम्यक वन का वर्णन किया गया था, वर्तमान समय में वह आज का ककोलत है। इसके अलावा, ककोलत पर्वत बहुत ही खूबसूरत पिकनिक स्थल है।

प्रजातंत्र द्वार संपादित करें

नवादा जिला मुख्यालय के प्रजातंत्र चौक पर स्थित प्रजातंत्र द्वार को देश की स्वतंत्रता का प्रतीक चिह्न माना जाता है। स्वतंत्रता पश्चात् प्रजातंत्र द्वार का निर्माण स्वर्गीय कन्हाई लाल साहु ने करवाया था। 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से निर्मित यह द्वार आज भी लोगों में भारतीय स्वतंत्रता के प्रति जज्बा पैदा करता है।

हंड़िया सूर्यमंदिर संपादित करें

नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के हंड़िया गांव स्थित सूर्य नारायण धाम मंदिर काफी प्राचीन है। यह उन ऐतिहासिक सूर्य मंदिरों में से है जो लोगों की आस्था का प्रतीक बना है। मंदिर के आस-पास की गई खुदाई के समय प्रतीक चिन्ह और पत्थर के बने रथ मार्ग की लिंक के अवशेष प्राप्त हुए थे। माना जाता है कि इस मंदिर का सम्बन्ध द्वापर युग से रहा होगा। मंदिर के समीप एक तालाब स्थित है। ऐसा मान्यता है कि इस पानी में स्नान करने पर कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं। प्रत्येक रविवार को काफी संख्या में लोग यहाँ तालाब में स्नान एवं सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।

संकट मोचन हनुमान मंदिर व हजरत सैयद शाह जलालुद्दीन बुखारी की मजार संपादित करें

पटना-रांची मुख्य मार्ग पर नवादा में एकसाथ स्थित हजरत सैयद शाह जलालुद्दीन बुखारी की मजार और संकट मोचन हनुमान मंदिर साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। शुक्रवार के दिन बाबा के मजार पर यहाँ के हिन्दू व मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग चादर चढ़ाकर मन्नते मांगते हैं। वहीं प्रत्येक मंगलवार को हनुमान मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ देखी जा सकती है। वैशाख शुक्ल पक्ष के अक्षय तृतीया को प्रत्येक वर्ष मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है। अजमेर शरीफ के उर्स के तुरंत बाद बाबा के मजार पर विशाल उर्स हर साल मनाया जाता है।

सीतामढ़ी संपादित करें

नवादा जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर सीतामढ़ी स्थित है। प्राचीन काल से ही यह जगह एक प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध रहा है। यहां 16 फीट लम्बी और 11 फीट चौडी प्राचीन गुफा है। एक गोलनुमा चट्टान को काटकर कंदरा बनाया गया है जिसके भीतर पत्थरों पर पॉलीश की गयी है। पॉलीश के आधार पर इस गुफा को मौर्य कालीन माना जाता है। प्रचलित मान्यता है कि गुफा का निर्माण मानिक सम्प्रदाय के साधुओं को आश्रय देने के लिए किया गया था। किंतु स्थानीय लोग इसे निर्वासन काल में सीता का निवास स्थल मानते हैं। गुफा के भीतर देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित है। गुफा के बाहर की ओर एक चट्टान दो भागों में विभाजित है। इसे भी सीता जी के धरती में समाने की घटना से जोड़ा जाता है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह लव-कुश की जन्मभूमि है।

सेखोदेवरा संपादित करें

जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सेखोदेवरा गांव है प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत मनोहर एवं दर्शनीय है। सेखो और देवरा नामक दो टोलों को मिलाकर सेखोदेवरा गांव बना है। गांव में सर्वोदय आश्रम है जिसकी स्थापना 1952 ई॰ में जयप्रकाश नारायण ने की थी। आश्रम से लगभग ५०० मीटर की दूरी पर स्थित जंगल के बीच एक चट्टान को जे.पी. चट्टान के नाम से जाना जाता है। 1942 के स्वाधीनता आंदोलन के समय हजारीबाग जेल से भागकर प्रसिद्ध नेता एवं क्रांतिकारी स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण इन्ही चट्टानों के पास आकर छिपे थे।

नारद संग्रहालय संपादित करें

नारद संग्रहालय भारत के प्रमुख संग्रहालयों में से है। वर्ष 1973 ई॰ में नवादा के प्रथम जिला अधिकारी नरेन्द्र पाल सिंह के प्रयासों से यह संग्रहालय अस्तित्व में आया। संग्रहालय की इमारत दोमंजिला है। इसके प्रथम तल में भारत में प्राचीन सिक्कों के विकास को प्रदर्शित किया गया है। प्रारम्भिक पंच-मार्क सिक्कों से लेकर मुगल-कालीन सिक्कों के भारत में क्रमिक विकास को संग्रहालय में देखा जा सकता है। सोनसा गढ़ से प्राप्त मौर्य-कालीन हड्डी कलाकृति, शुंगकालीन मृण्मूर्तियां, मनके, मुहर एवं धातु निर्मित कलाकृतियों को संग्रहालय के विभिन्न दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। सोनसा गढ़ की खोज नारद संग्रहालय की एक उपलब्धि के रूप में माना जाता है। इसके अतिरिक्त, संग्रहालय में देवनगढ़ से प्राप्त मंजूश्री की प्रतिमा और धातु मूर्तियों में बौद्ध, जैन और हिन्दू धर्म से सम्बन्धित मूर्तियां प्रदर्शित की गई है। स्व. हीरालाल बबन जी द्वारा मुगलकालीन तलवार, कटार, ढाल के साथ ही प्रसिद्ध फारसी शायर हाफ़िज़ शिराज़ी के शेर को चित्रों में उतारा गया है।

गुनियाजी तीर्थ संपादित करें

गुनियाजी तीर्थ नवादा जिले के गुनियाजी गांव में स्थित है। यह मंदिर जैन मुनि गंधार गौतम स्वामी को समर्पित है। माना जाता है कि गौतम स्वामी, महावीर जी के शिष्य थे। इसकी स्थापना जैनियों द्वारा की गई थी। यह प्राचीन मंदिर भगवान महावीर के समय का है। वर्तमान समय में इस मंदिर की देखरेख श्री जैन श्वेताम्बर भंडार ट्रस्ट कर रहा है।

आवागमन संपादित करें

वायु मार्ग

यहाँ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा पटना स्थित जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। नवादा से इसकी दूरी ९८ किलोमीटर है।

रेल मार्ग

भारत के कई प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा नवादा पहुंचा जा सकता है। गया-कियूल रेलखंड की बड़ी लाईन नवादा होकर गुजरती है। तिलैया (हिसुआ), नवादा, वारसलीगंज, काशीचक, जिले का महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन रेलवे स्टेशन है। यहाँ से गया, झाझा, किऊल एवं रामपुरहाट के लिए छह जोड़ी गाड़ियाँ चलती है। ३०२४/३०२३ हावड़ा-गया एक्सप्रेस यहाँ से गुजरनेवाली महत्वपूर्ण गाड़ी है।

सड़क मार्ग

नवादा सड़क मार्ग द्वारा बिहार के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग २०, राष्ट्रीय राजमार्ग १२० एवं राज्य राजमार्ग ८ (बिहार) नवादा से होकर गुजरती है।

इन्हें भी देखें संपादित करें

बाहरी कड़ियाँ संपादित करें

सन्दर्भ संपादित करें

  1. "View Population". District Election Officer, Nagarpalika – Draft publication of ward formation for newly formed Nagar Parishad / Nagar Palika. अभिगमन तिथि 28 April 2022.
  2. Nawada
  3. "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
  4. "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810
  5. Falling Rain Genomics, Inc - Nawada