राष्ट्रकुल, या राष्ट्रमण्डल देश (अंग्रेज़ी:कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस) (पूर्व नाम ब्रितानी राष्ट्रमण्डल), ५३ स्वतंत्र राज्यों का एक संघ है जिसमे सारे राज्य ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे (मोज़ाम्बीक और स्वयं यूनाइटेड किंगडम को छोड़ कर)। इसका मुख्यालय लंदन में स्थित है। इसका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र, साक्षरता, मानवाधिकार, बेहतर प्रशासन, मुक्त व्यापार और विश्व शांति को बढ़ावा देना है। इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय प्रत्येक चार वर्ष में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों और बैठक में भाग लेती हैं। इसकी स्थापना १९३१ में हुई थी, लेकिन इसका आधुनिक स्वरूप १९४७ में भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्र होने के बाद निश्चित हुआ।

राष्ट्रों का राष्ट्रकुल
सदस्य देश
मुख्यालयमर्लबरो हाउस
लंदन, संयुक्त अधिराज्य
कार्यकारी भाषा अंग्रेज़ी
प्रकार स्वेच्छिक संगति[1]
सदस्य राज्य ५४ संप्रभु राज्य
नेताओं
 -  प्रमुख महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय
 -  महासचिव पैट्रिशिया स्कॉटलैंड
 -  पदासीन बॉरिस जॉनसन
स्थापना
 -  बॅल्फ़ोर घोषणा 19 नवम्बर 1926 
 -  वेस्टमिंस्टर की संविधि 11 दिसम्बर 1931[2] 
 -  लंदन घोषणा 28 अप्रैल 1949 
क्षेत्रफल
 -  कुल 29,958,050 km2
जनसंख्या
 -  2016 जनगणना 2,418,964,000
 -  घनत्व 75/km2
जालस्थल
thecommonwealth.org

राष्ट्रमंडल देशों का कोई संविधान या चार्टर नहीं है। इसके प्रमुखों की प्रत्येक दो वर्ष में एक बार बैठक होती है। भारत सहित एंटीगुआ, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कनाडा, साइप्रस, घाना आदि इसके सदस्य हैं।

इतिहाससंपादित करें

इन्हें भी देखें: ब्रिटिश साम्राज्य
 
पांच राष्ट्रकुल प्रधानमंत्री:कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्रीगण

गठनसंपादित करें

इन्हें भी देखें: वेस्टमिंस्टर की संविधि, १९३१ एवं बाल्फोर घोषणा

लंदन घोषणा के तहत ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय राष्ट्रमंडल देशों के समूह की प्रमुख होती हैं। राष्ट्रमंडल सचिवालय की स्थापना १९६५ में हुई थी। इसके महासचिव मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम करते हैं। वर्तमान में कमलेश शर्मा इसके महासचिव हैं। उनका चयन नवंबर, २००७ को हुआ। इसके पहले महासचिव कनाडा के आर्नल्ड स्मिथ थे। १९२६ के शाही सम्मेलन में बाल्फोर घोषणा में, ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल प्रदेश इस बात पर सहमत हुए कि वे "घरेलू स्तर पर, किसी भी तरह से अपने घरेलू या बाहरी मामलों के किसी भी पहलू में अधीनस्थ नहीं हैं, हालांकि राजमुकुट के प्रति सामान्य निष्ठा से स्वतंत्र हैं, और स्वतंत्र रूप से ब्रिटिश राष्ट्रमंडल राष्ट्रों के सदस्यों के रूप में जुड़े हैं।" "राष्ट्रमंडल" शब्द को आधिकारिक तौर पर समुदाय का वर्णन करने के लिए अपनाया गया था।

रिश्तों के इन पहलुओं को 1931 में वेस्टमिंस्टर के संविधान द्वारा औपचारिक रूप दिया गया था, जो स्वीकृति की आवश्यकता के बिना ही कनाडा में भी लागू हुआ था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और न्यूफाउंडलैंड को प्रभावी होने के लिए कानून को मंजूरी देनी पड़ी। न्यूफाउंडलैंड ने 16 फरवरी 1934 को अपनी संसद की सहमति से कभी नहीं किया, न्यूफाउंडलैंड की सरकार स्वेच्छा से समाप्त हो गई और प्रशासन लंदन के सीधे नियंत्रण में लौट आया। न्यूफाउंडलैंड बाद में 1949 में कनाडा के 10 वें प्रांत के रूप में कनाडा में शामिल हो गया। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्रमशः 1942 और 1947 में संविधान की पुष्टि की।

यद्यपि दक्षिण अफ्रीका संघ उन डोमिनियंसों में से एक नहीं था, जिनके लिए प्रभावी होने के लिए वेस्टमिंस्टर की संविधि, १९३१ को अपनाने की आवश्यकता थी, दो कानून- संघ अधिनियम, 1934 की स्थिति और 1934 के शाही कार्यकारिणी अधिनियम और जवान अधिनियम पारित किए गए थे एक संप्रभु राज्य के रूप में दक्षिण अफ्रीका की स्थिति की पुष्टि करने के लिए।

सदस्यतासंपादित करें

भारत सहित एंटीगुआ, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कनाडा, साइप्रस, घाना आदि इसके सदस्य हैं। जिम्बाब्वे को २००२ में राष्ट्रकुल की सदस्यता से हटाया गया था और २००३ में यह प्रतिबंध अनिश्चित काल तक बढ़ाया गया था। राष्ट्रकुल समूह के देशों की कुल जनसंख्या १.९ अरब है, जो विश्व की जनसंख्या की एक-तिहाई भाग है। फिजी को राष्ट्रमंडल से २०००-०१ में प्रतिबंधित किया गया था, उसके बाद पुन: उस पर २००६ में प्रतिबंध लगा। नाइजीरिया को १९९५ से १९९९ तक प्रतिबंधित किया गया। पाकिस्तान पर १९९९ में प्रतिबंध लगा था।

ढाँचासंपादित करें

राष्ट्रमंडल के प्रमुखसंपादित करें

राष्ट्रमण्डल के प्रमुख, का पद, राष्ट्रमण्डल का एक औपचारिक अध्यक्षात्मक पद है। यह पद केवल एक रितिस्पद पद है, जिसके पदाधिकारी का इस संगठन के दैनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है। इस पद के कार्यकाल की कोई समय-सीमा नहीं है, और परंपरागत रूप से इस पद को ब्रिटिश संप्रभु पर निहित किया गया है।

ब्रिटिश संप्रभु को पूर्वतः, राष्ट्रमण्डल के सारे देशों के शासक होने का दर्जा प्राप्त था, परंतु भारत की स्वतंत्रता के बाद, भारत ने स्वयं को एक गणराज्य घोषित कर दिया, और भारत के सम्राट के पद को खत्म कर दिया गया। बहरहाल, भारत ने राष्ट्रमण्डल का एक सदस्य रहना स्वीकार किया। इसके पश्चात, राष्ट्रमण्डल के प्रमुख के इस पद को एक गैर-राजतांत्रिक, औपचारिक अध्यक्षात्मक उपदि के रूप में स्थापित किया गया था। कथित तौर पर, राष्ट्रमण्डल के प्रमुख को, "स्वतंत्र सदस्य राष्ट्रों की मुक्त सहचार्यता का प्रतीक" माना गया है।

राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठकसंपादित करें

इस संगठन का मुख्य निर्णयकारी पटल है, द्विवार्षिक राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम), जहां राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्ष, जिनमें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपतिगण शामिल हैं, आपसी हितों के मामलों पर चर्चा करने के लिए कई दिनों हेतु एकत्रित होते हैं। यह बैठक राष्ट्रमंडल प्रधानमंत्रियों की बैठकों का उत्तराधिकारी है तथा उससे भी पहले की, इंपीरियल सम्मेलन और औपनिवेशिक सम्मेलन की भी, जिन्हें १८८७ से आयोजित किया जाता रहा है। इसके अलावा, वित्त मंत्रियों, कानून मंत्रियों, स्वास्थ्य मंत्रियों आदि की नियमित बैठकें भी होती हैं। उनके समक्ष विशेष सदस्यों के रूप में बकाया राशि के सदस्यों को या तो मंत्रिस्तरीय बैठकों या शासनाध्यक्ष-स्तरीय बैठकों में प्रतिनिधि भेजने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाता है।

शासनाध्यक्षों की बैठक की मेजबानी करने वाले सरकार के प्रमुख को राष्ट्रमंडल पदासीन (कॉमनवेल्थ चेयरपर्सन-इन-ऑफिस) कहा जाता है जो अगकी बैठक तक इस पड़ पर बना रखता है।

राष्ट्रमंडल सचिवालयसंपादित करें

 
लंदन का मर्लबरो हाउस, राष्ट्रमंडल सचिवालय का मुख्य कार्यालय

राष्ट्रमंडल सचिवालय, राष्ट्रमंडल की मुख्य अंतर सरकारी एजेंसी और केंद्रीय कार्यकारी संस्थान है। यह सदस्य देशों के बीच सहयोग की सुविधा के लिए जिम्मेदार है; राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक सहित अन्य बैठकों का आयोजन; नीति विकास पर सहायता और सलाह देना; तथा राष्ट्रमंडल के निर्णयों और नीतियों को लागू करने में सदस्य देशों को सहायता प्रदान करना इसकी ज़िम्मेदारियाँ हैं।

राष्ट्रमंडल सचिवालय को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है। सचिवालय का मुख्य कार्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम के मार्लबोरो हाउस में स्थित है, जो ब्रिटिश संप्रभु का पूर्व शाही निवास था, जिसे राष्ट्रमंडल के प्रमुख के नाते, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा सचिवालय को दिया गया था।[3]

राष्ट्रमंडल सचिवालय के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होते हैं इसके राष्ट्रमंडल के महासचिव, जो राष्ट्रमंडकल के तमाम कार्यों और सचिवालय की ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए ज़िम्मेरदार हैं। महासचिव को राश्रमण्डल शासनप्रमुखों द्वारा चुना जाता है, तथा अधिकतम दो चार-वर्षीय कार्यकालों के लिए नियुक्त किया जाता है। महासचिव के अंतर्गत दो डिप्टी महासचिव सचिवालय के विभागों को निर्देशित करते हैं।

राष्ट्रमंडल नागरिकता और उच्चायोगसंपादित करें

राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों के बीच राजनयिक मिशनों को दूतावास नहीं कहकर उच्चायोग कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रमंडल देश के बीच एक विशेष राजनयिक संबंध होता है जिसके वजह से आम तौरपर यह उम्मीद की जाती है कि किसी गैर-राष्ट्रमंडल देश में किसी भी राष्ट्रमंडल देश का दूतावास सभी अन्य राष्ट्रमंडल देशों के नागरिकों को राजनयिक सेवाएं प्रदान करने की पूरी कोशिश करेगा, भले ही उस व्यक्ति के देश का दूतावास वहां नहीं हो। इस लिहाज़ से कनाडा-ऑस्ट्रेलिया कॉन्सुलर सर्विसेज शेयरिंग एग्रीमेंट में उल्लिखित कनाडाई और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अपनी संबंधित कांसुलर सेवाओं के बीच और भी अधिक सहयोग का आनंद ले सकते हैं।[4]

चूंकि सोलह राष्ट्रमंडल देशों (जिन्हें राष्ट्रमंडल प्रजाभूमि के रूप में जाना जाता है) में एक ही राष्ट्रप्रमुख होता है (वर्तमान में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय), अतः इन देशों के बीच राजनयिक संबंध परंपरागत रूप से सरकारी स्तर पर ही होते हैं, नकी राजकीय स्तर पर।[5] हालाँकि उच्चायुक्त को किसी राजदूत के पद और भूमिका के बराबर माना जाता है।

सदस्य-समूहसंपादित करें

इन्हें भी देखें: राष्ट्रमंडल देशों की सूची
 
त्रिनिदाद और टोबैगो में आयोजित २००९ के राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक में सभी सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष की ग्रुप तस्वीर।

मानदंडसंपादित करें

राष्ट्रमंडल देशों की सदस्यता के लिए मानदंड समय के साथ, विभिन्न दस्तावेजों की एक श्रृंखला से विकसित हुआ है। वेस्टमिंस्टर की संविधि, 1931 ने यह निर्धारित किया कि सदस्यता के लिए ब्रिटिश डोमिनियन होना आवश्यकता है। 1949 के लंदन घोषणा ने इस आवश्यकता को समाप्त कर दिया, जिस कारण गणतंत्रीय और स्वदेशी राजशाही भी राशर्तकुल में शामिल हो सकते थे, इस शर्त पर कि वे ब्रिटिश संप्रभु को "राष्ट्रमंडल के प्रमुख" के रूप में मान्यता दें। 1960 के दशक में विउपनिवेशीकरण की लहर के मद्देनजर, इन आवश्यकताओं को संवैधानिक सिद्धांतों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सिद्धांतों द्वारा संवर्धित किया जाने लगा। पहला 1961 में घोषित किया गया जब यह निर्णय लिया गया था कि नस्लीय समानता के लिए सम्मान सदस्यता की आवश्यकता होगी, इस कारण दक्षिण अफ्रीका के पुन: आवेदन को वापस लेने के लिए अग्रणी होगा (जो उन्हें लंदन घोषणा के तहत करने की आवश्यकता थी)। 1971 के सिंगापुर घोषणा के 14 बिंदुओं ने सभी सदस्यों को विश्व शांति, स्वतंत्रता, मानवाधिकार, समानता और मुक्त व्यापार के सिद्धांतों के लिए समर्पित किया गया।

1991 में, हरारे घोषणापत्र जारी किया गया था, नेताओं को डीकोलाइज़ेशन के समापन, शीत युद्ध के अंत और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत के लिए सिंगापुर के सिद्धांतों को लागू करने के लिए समर्पित किया गया था। इस नए नियम के अलावा, पूर्व नियमों को एक दस्तावेज़ में समेकित किया गया था। ये आवश्यकताएं हैं कि सदस्यों को हरारे के सिद्धांतों को स्वीकार करना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए, पूरी तरह से संप्रभु राज्य होने चाहिए, राष्ट्रमंडल प्रमुखों के राष्ट्रमंडल प्रमुख के रूप में मान्यता प्राप्त करें, राष्ट्रमंडल संचार के साधनों के रूप में अंग्रेजी भाषा को स्वीकार करें, और इच्छाओं का सम्मान करें राष्ट्रमंडल सदस्यता के संबंध में सामान्य जनसंख्या।

सदस्यगणसंपादित करें

राष्ट्रमंडल में ५४ देश शामिल हैं, जो धरती के सभी महाद्वीपों पर फैले हुए हैं। इन सदस्य देशों में 2.4 अरब लोगों की संयुक्त आबादी है, यानि दुनिया की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा। इसमें से १.२६ अरब भारत में रहते हैं तथा २२ करोड़ पाकिस्तान में रहते हैं, क्रमशः ९४% आबादी एशिया और अफ्रीका में फैली हुई है।[6] भारत और पाकिस्तान के बाद, जनसंख्या के हिसाब से अगले सबसे बड़े राष्ट्रमंडल देश नाइजीरिया (१७ करोड़), बांग्लादेश (१५.६ करोड़) और यूनाइटेड किंगडम (६.५ करोड़) हैं। तुवालु सबसे छोटा सदस्य है, जिसमें लगभग १० हज़ार लोग हैं।[7]

राष्ट्रमंडल देशों का भूक्षेत्र लगभग 31,500,000 कि॰मी2 (12,200,000 वर्ग मील) है, यानी कुल वैश्विक भूक्षेत्र का लगभग २१%। इस लिहाज़ से तीन सबसे बड़े राष्ट्रमंडल देश कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारत हैं।[8]

 
मौजूदा सदस्य (गढ़े नीले रंग में), पूर्व सदस्य (नारंगी), अन्य ब्रिटिश प्रदेश (हलके नीले रंग में)

मौजूदा राष्ट्रमंडल सदस्य हैं:एंटीगुआ और बारबुडा, ऑस्ट्रेलिया, बहामास, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलीज, बोत्सवाना, ब्रुनेई, कैमरून, कनाडा, साइप्रस, डोमिनिका, एस्वातीनी (स्वाजीलैंड), फिजी, गाम्बिया, घाना, ग्रेनाडा, गुयाना, भारत, जमैका, केन्या, किरिबाती, लेसोथो, मलावी, मलेशिया, मालदीव, माल्टा, मॉरीशस, मोजाम्बिक, नामीबिया, नाउरु, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी, रवांडा, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, समोआ, सेशेल्स, सिएरा लियोन, सिंगापुर, सोलोमन द्वीपसमूह, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, टोंगा, त्रिनिदाद और टोबैगो, तुवालु, युगांडा, यूनाइटेड किंगडम, वानुअतु, जाम्बिया

राष्ट्रकुल से निलंबनसंपादित करें

राष्ट्रकुल के नियमों का उल्लंघन करने पर किसी सदस्य को निष्कासन की व्यवस्था के आभाव मे राष्ट्रमंडल मंत्रिस्तरीय कार्य समूह (सीएमएजी) सदस्य को निलंबित करता हैं। 1995 में इस निती की स्थापना के बाद से चार देशों के पास राष्ट्रमंडल से निलंबित किया जा चुका है: फ़िजी, नाईजीरिया, पाकिस्तान और जिम्बाब्वे। पाकिस्तान के एक दो बार निलंबित किया गया है, नाइजीरिया एक बार निलंबित गया है, फ़िजी को स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया हैं। जिम्बाब्वे ने अपनी सदस्यता ८ दिसम्बर २००३ में वापस ले ली।

राष्ट्रमंडल संस्कृतिसंपादित करें

राष्ट्रमंडल फाउंडेशनसंपादित करें

राष्ट्रमंडल फाउंडेशन या कॉमनवेल्थ फाउंडेशन (सीएफ) एक अंतर सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना राष्ट्रमंडल प्रमुखों द्वारा 1966 में राष्ट्रमंडल सचिवालय के एक साल बाद की गई थी। फाउंडेशन लंदन के मार्लबोरो हाउस में स्थित है, जोकि एक पूर्व शाही महल था, तथा राष्ट्रमंडल के प्रमुख, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा इन राष्ट्रमंडल संस्थानों के उपयोग के लिए सौंपा गया था। नागरिक समाज समन्वयक एजेंसी के रूप में राष्ट्रमंडल फाउंडेशन राष्ट्रमंडल देशों में विभिन्न कार्यक्रम चलता है। यह 49 सदस्य राष्ट्रों द्वारा शाषित व वित्त-पोषित है। फाउंडेशन नागरिक संस्थानों एवं प्रशानिक संस्थानों के बीच बेहतर जुड़ाव को प्रोत्साहित करने के लिए संसाधन, अनुदान और पहुँच प्रदान करता है। राष्ट्रमंडल फाउंडेशन की सदस्यता स्वैच्छिक है और राष्ट्रमंडल की सदस्यता से अलग है, अतः सभी राष्ट्रमंडल देश इसका हिस्सा नहीं हैं।

इसका काम राष्ट्रमंडल प्राथमिकताओं की उपलब्धि में नागरिक समाज को मजबूत करना है: लोकतंत्र और सुशासन, मानव अधिकारों और लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, जन-केंद्रित और सतत विकास, कला और संस्कृति को बढ़ावा देना। फाउंडेशन उस व्यापक उद्देश्य की सेवा जारी रखता है जिसके लिए इसे मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में लिखा गया था।[9]

राष्ट्रमंडल खेलसंपादित करें

राष्ट्रमंडल खेल या कॉमनवेल्थ गेम्स एक अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता है जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के एथलीट शामिल होते हैं। यह आयोजन पहली बार 1930 में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के रूप में हुआ था, तथा तब से हर चार साल पर होता है। राष्ट्रमंडल खेलों को 1930 से 1950 तक ब्रिटिश एंपायर गेम्स, 1954 से 1966 तक ब्रिटिश एंपायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स और 1970 से 1974 तक ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता था। विकलांग एथलीटों को उनकी राष्ट्रीय टीमों के पूर्ण सदस्यों के रूप में पहली बार मान्यता देने के कारन, राष्ट्रमंडल खेलों को पहली पूर्ण रूप से समावेशी अंतर्राष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता भी मन जाता है। तथा यह दुनिया का पहला बहु-खेल कार्यक्रम है जो महिलाओं और पुरुषों के पदक की घटनाओं की समान संख्या को शामिल करता है और हाल ही में 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में लागू किया गया था।

 
दिल्ली में आयोजित वर्ष २०१० के राष्ट्रमंडल खेलों का उद्घाटन समारोह

एशली कूपर वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने सदभावना को प्रोत्साहन देने और पूरे ब्रिटिश साम्राज्य के अंदर अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए एक अखिल ब्रितानी खेल कार्यक्रम आयोजित करने के विचार को प्रस्तुत किया। वर्ष 1928 में कनाडा के एक प्रमुख एथलीट बॉबी रॉबिन्सन को प्रथम राष्ट्र मंडल खेलों के आयोजन का भार सौंपा गया। ये खेल 1930 में हैमिलटन शहर, ओंटेरियो, कनाडा में आयोजित किए गए और इसमें 11 देशों के 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा‍ लिया।

तब से हर चार वर्ष में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इनका आयोजन नहीं किया गया था। इन खेलों के अनेक नाम हैं जैसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, फ्रेंडली गेम्स और ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स। वर्ष 1978 से इन्हें सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स या राष्ट्रमंडल खेल कहा जाता है। मूल रूप से इन खेलों में केवल एकल प्रतिस्पर्द्धात्मक खेल होते थे, 1998 में कुआलालम्पुर में आयोजित राष्ट्र मंडल खेलों में एक बड़ा बदलाव देखा गया जब क्रिकेट, हॉकी और नेटबॉल जैसे खेलों के दलों ने पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज की।

वर्ष 2001 में इन खेलों द्वारा मानवता, समानता और नियति की तीन मान्यताओं को अपनाया गया, जो राष्ट्रमंडल खेलों की मूल मान्यताएं हैं। ये मान्यताएं हजारों लोगों को प्रेरणा देती है और उन्हें आपस में जोड़ती हैं तथा राष्ट्रमंडल के अंदर खेलों को अपनाने का व्यापक अधिदेश प्रकट करती हैं। क्वीन्स बेटन रिले ओलम्पिक टोर्च की तरह राष्ट्रमंडल खेलों में भी क्वीन्स बेटन रिले की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।

प्रजाभूमिसंपादित करें

 
वर्त्तमान राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमियाँ

राष्ट्रमंडल प्रजाभूमियाँ वो देश या प्रदेशों को कहा जाता है, जिनके शासक ब्रिटिश संप्रभु हैं। राष्ट्रमंडल के अंदर ही ऐसे १५ देश हैं, जो एक दूसरे से स्वतंत्र हैं, परंतु ये सभी १५ देशों की संप्रभु, रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय है। १८ वीं और १९वीं सदी के दौरान ब्रिटेन के औपनिवेशिक विस्तार के अंतर्गत ब्रिटेन द्वारा अधिकृत किये गए अधिकतर देशों ने मध्य २०वीं सदी तक ब्रिटेन से स्वतंत्रता हासिल कर ली। हालाँकि उन सभी देशों ने यूनाइटेड किंगडम की सरकार की अधिपत्यता को नकार दिया, परंतु उनमें से कई राष्ट्र, ब्रिटिश शासक को अपने शासक के रूप में मान्यता देते हैं। इन देशों को राष्ट्रमण्डल प्रदेश या राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि कहा जाता है। वर्त्तमान काल में, यूनाइटेड किंगडम के अधिराट् केवल यूनाइटेड किंगडम के ही नहीं बल्कि उसके अतिरिक्त कुल १५ अन्य राष्ट्रों के अधिराट् भी हैं। तथा इन राष्ट्रों में भी उन्हें सामान पद व अधिकार प्राप्त है जैसा की ब्रिटेन में है, परंतु उन देशों में, उनका कोई वास्तविक राजनीतिक या पारंपरिक कर्त्तव्य नहीं है, शासक के लगभग सारे कर्त्तव्य उनके प्रतनिधि के रूप में उस देश के महाराज्यपाल (गवर्नर-जनरल) पूरा करते हैं। यूनाइटेड किंगडम की सरकार का राष्ट्रमण्डल प्रदेशों की सरकारों के कार्य में कोई भी भूमिका या हस्तक्षेप नहीं है। ब्रिटेन के अलावा राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि में: एंटीगुआ और बारबुडा, ऑस्ट्रेलिया, बहामा, बारबाडोस, बेलिज, ग्रेनेडा, जमैका, कनाडा, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, सेंट लूसिया, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस और तुवालु जैसे देश शामिल हैं।

पूर्वतः राष्ट्रमण्डल के सारे देश राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि के हुआ करते थे, परंतु १९५० में भारत ने स्वतंत्रता के पश्चात स्वयं को गणराज्य घोषित किया, और ब्रिटिश राजसत्ता की राष्ट्रप्रमुख के रूप में संप्रभुता को भी खत्म कर दिया। परंतु भारत ने राष्ट्रमण्डल की सदस्यता बरक़रार राखी। उसके बाद से, राष्ट्रमण्डल देशों में, ब्रिटिश संप्रभु को (चाहे राष्ट्रप्रमुख हों या नहीं) "राष्ट्रमण्डल के प्रमुख" का पद भी दिया जाता है, जो राष्ट्रमण्डल के संगठन का नाममात्र प्रमुख का पद है। इस पद का कोई राजनैतिक अर्थ नहीं है।[10]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Commonwealth Charter". अभिगमन तिथि 5 March 2019. Recalling that the Commonwealth is a voluntary association of independent and equal sovereign states, each responsible for its own policies, consulting and co-operating in the common interests of our peoples and in the promotion of international understanding and world peace, and influencing international society to the benefit of all through the pursuit of common principles and values
  2. "Annex B – Territories Forming Part of the Commonwealth" (PDF). Her Majesty's Civil Service. September 2011. मूल (PDF) से 6 December 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 November 2013.
  3. Cook and Paxton, Commonwealth Political Facts (1978) part 3.
  4. "Canada-Australia Consular Services Sharing Agreement". Ministry of Foreign Affairs of Canada. अभिगमन तिथि 2018-03-16.
  5. "Embassies - Commonwealth of Nations". commonwealthofnations.org. अभिगमन तिथि 18 March 2018.
  6. "Country Comparisons – Population". The World Factbook. Central Intelligence Agency. 19 March 2009. अभिगमन तिथि 22 March 2009.
  7. "Tuvalu: Key Facts". Commonwealth Secretariat. 19 March 2009. मूल से 29 October 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 May 2011.
  8. "Country Comparisons – Area". The World Factbook. Central Intelligence Agency. 19 March 2009. अभिगमन तिथि 22 March 2009.
  9. "Commonwealth Foundation – About Us". 5 January 2006. मूल से पुरालेखित 5 January 2006.सीएस1 रखरखाव: BOT: original-url status unknown (link)
  10. London Declaration (PDF), Commonwealth Secretariat, 1949, अभिगमन तिथि 29 July 2013

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

विकिसोर्स में British Nationality Act (1981 c 61) Annex B – The territories forming part of the Commonwealth लेख से संबंधित मूल साहित्य है।
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