शाहरुख़ ख़ान

भारतीय अभिनेता एवं निर्माता
(शाहरुख खान से अनुप्रेषित)

शाहरुख़ ख़ान (उच्चारण [‘ʃaːɦrəx ˈxaːn]; जन्म 2 नवम्बर 1965), जिन्हें अक्सर शाहरुख ख़ान के रूप में श्रेय दिया जाता है और अनौपचारिक रूप में एसआरके नाम से सन्दर्भित किया जाता, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता है। अक्सर मीडिया में इन्हें "बॉलीवुड का बादशाह", "किंग ख़ान", "रोमांस किंग" और किंग ऑफ़ बॉलीवुड नामों से पुकारा जाता है। ख़ान ने रोमैंटिक नाटकों से लेकर ऐक्शन थ्रिलर जैसी शैलियों में 72 हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है।[2][3][4][5] फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिये उन्होंने तीस नामांकनों में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। वे और दिलीप कुमार ही ऐसे दो अभिनेता हैं जिन्होंने साथ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार आठ बार जीता है। 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।

शाह रुख़ ख़ान
Shah Rukh Khan graces the launch of the new Santro.jpg
आवास मुंबई, महाराष्ट्र, भारत[1]
व्यवसाय अभिनेता, निर्माता, टेलिविज़न मेज़बान
जीवनसाथी गौरी ख़ान (1991—अबतक)
बच्चे 3
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अर्थशास्त्र में उपाधि ग्रहण करने के बाद इन्होंने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टि से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्चात् उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमें डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखें व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिअर्थशास्त्र में उपाधि ग्रहण करने के बाद इन्होंने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टि से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्चात् उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमें डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखें व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिल है।

उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में Indian Rupee symbol.svg १०० करोड़ का व्यवसाय किया है। ख़ान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अब तक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में रही है और कभी खुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा'उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में Indian Rupee symbol.svg १०० करोड़ का व्यवसाय किया है। ख़ान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अब तक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में रही है और कभी खुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा (२००६)।

वेल्थ रिसर्च फर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग ख़ान पहले सबसे अमीर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फर्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी थी लेकिन अब 4000 करोड़ बताई जाती है।[6]वेल्थ रिसर्च फर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग ख़ान पहले सबसे अमीर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फर्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी थी लेकिन अब 4000 करोड़ बताई जाती है।

जीवनीसंपादित करें

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षासंपादित करें

ख़ान के माता पिता पठान मूल के थे|[7][8][9] उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी|[10]

ख़ान के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे,[11] हालांकि उनकी माँ रावलपिंडी से आयीं थी|[12] ख़ान की एक बहन भी हैं जिनका नाम है शहनाज़ और जिन्हें प्यार से लालारुख बुलाते हैं|[13][14] ख़ान ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह क्रीड़ा क्षेत्र, शैक्षिक जीवन और नाट्य कला में निपुण थे| स्कूल की तरफ़ से उन्हें "स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर" से नवाज़ा गया जो प्रत्येक वर्ष सबसे काबिल और होनहार विद्यार्थी एवं खिलाड़ी को दिया जाता था| इसके उपरांत उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की|[15]

अपने माता पिता के देहांत के उपरांत ख़ान १९९१ में दिल्ली से मुम्बई आ गए| १९९१ में उनका विवाह गौरी ख़ान के साथ हिंदू रीति रिवाज़ों से हुआ|[16] उनकी तीन संतान हैं - एक पुत्र आर्यन (जन्म १९९७) और एक पुत्री सुहाना (जन्म २०००) व पुत्र अब्राहम।

अभिनयसंपादित करें

"मैं एक हिंदू से विवाहित हूं, मेरे बच्चों को दोनों धर्मों के साथ लाया जा रहा है, जब मैं ऐसा महसूस करता हूं तो मैं नमाज पढ़ता हूं। लेकिन अगर मेरा धर्म चार विवाहों की अनुमति देता है, तो भी मैं इसमे विश्वास नहीं करना चाहूंगा। कई अन्य चीजें भी प्रासंगिकता खो चुकी हैं , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं कुरान से पूछताछ कर रहा हूं। मैं नमाज [प्रार्थना] को पांच बार पढ़ने के संदर्भ में धार्मिक नहीं हूं लेकिन मैं इस्लामी हूं। मैं इस्लाम के सिद्धांतों पर विश्वास करता हूं और मेरा मानना है कि यह एक अच्छा धर्म है और एक अच्छा अनुशासन। मैं लोगों को यह जानना चाहता हूं कि इस्लाम न केवल एक कट्टरपंथी, या मूल रूप से अलग, नाराज व्यक्ति है, या जो केवल जिहाद करता है। मैं लोगों को यह जानना चाहता हूं कि जिहाद का वास्तविक अर्थ है अपनी खुद की हिंसा और कमजोरी को दूर करने के लिए। यदि आवश्यकता हो, तो इसे अहिंसक तरीके से दूर करें। "[17][18][19]

—शाहरुख ख़ान, अपनी धार्मिक मान्यताओं पर

ख़ान ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली । वर्ष २००७ में जॉन ने अपने पुराने शिष्य के बारे में कहा,

" The credit for the phenomenally successful development and management of Shah Rukh's career goes to the superstar himself."(अनुवाद - शाह रूख़ के कैरियर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय उस ही को जाता है|)[20]

ख़ान ने अपना कैरियर १९८८ में दूरदर्शन के धारावाहिक "फ़ौजी" से प्रारम्भ किया जिसमे उन्होंने कमान्डो अभिमन्यु राय का किरदार अदा किया|[21] उसके उपरांत उन्होंने और कई धारावाहिकों में अभिनय किया जिनमे प्रमुख था १९८९ का "सर्कस"[22], जिसमे सर्कस में काम करने वाले व्यक्तियों के जीवन का वर्णन किया गया था और जो अज़ीज़ मिर्ज़ा द्वारा निर्देशित था| उस ही वर्ष उन्होंने अरुंधति राय द्वारा लिखित अंग्रेज़ी फ़िल्म "इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस" में एक छोटा किरदार निभाया| यह फ़िल्म दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थी जीवन पर आधारित थी|

अपने माता पिता की मृत्यु के उपरांत १९९१ में ख़ान नई दिल्ली से मुम्बई आ गये| बॉलीवुड में उनका प्रथम अभिनय "दीवाना" फ़िल्म में हुआ जो बॉक्स ऑफिस पर सफल घोषित हुई|[23] इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर की तरफ़ से सर्वश्रेष्ठ प्रथम अभिनय का अवार्ड मिला| उनकी अगली फ़िल्म थी "दिल आशना है" जो नही चली। १९९३ की हिट फ़िल्म "बाज़ीगर" में एक हत्यारे का किरदार निभाने के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। उस ही वर्ष में फ़िल्म "डर" में इश्क़ के जूनून में पागल आशिक़ का किरदार अदा करने के लिए उन्हें सराहा गया। इस वर्ष में फ़िल्म "कभी हाँ कभी ना" के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया| १९९४ में ख़ान ने फ़िल्म "अंजाम" में एक बार फिर जुनूनी एवं मनोरोगी आशिक़ की भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

१९९५ में उन्होंने आदित्य चोपड़ा की पहली फ़िल्म "दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे" में मुख्य भूमिका निभाई। यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है। मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह १२ सालों से चल रही है।[24][25] इस फ़िल्म के लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ।

१९९६ उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फिल्में असफल रहीं।[26] १९९७ में उन्होंने यश चोपड़ा की दिल तो पागल है, सुभाष घई की परदेस और अज़ीज़ मिर्ज़ा की येस बॉस जैसी फिल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर कदम रखा।[27]

वर्ष १९९८ में करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता है उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ। इसी साल उन्हें मणि रत्नम की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही।[28]

अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, बादशाह, का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी|[29] सन २००० में आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दूसरा फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई। उस ही वर्ष में ख़ान ने जूही चावला और अज़ीज़ मिर्ज़ा के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्पनी, 'ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड', की स्थापना की। इस कम्पनी की पहली फ़िल्म फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, जिसमे ख़ान और चावला दोनों ने अभिनय किया, बॉक्स ऑफिस पे जादू बिखेरने में असमर्थ रही। कमल हसन की विवादग्रस्त फ़िल्म हे राम में भी ख़ान ने एक सहयोगी भूमिका निभाई जिसके लिए उन्हें समीक्षकों ने सराहा हालांकि यह फ़िल्म भी असफल श्रेणी में रही।[26]

सन २००१ में ख़ान ने करण जोहर के साथ अपनी दूसरी फ़िल्म कभी खुशी कभी ग़म की, जो एक पारिवारिक कहानी थी और जिसमें अन्य भी कई सितारे थे। यह फ़िल्म उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों की सूची में शामिल थी। उन्हें अपनी फ़िल्म अशोका, जो की ऐतिहासिक सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित थी, के लिए भी प्रशंसा मिली लेकिन यह फ़िल्म भी नाकामयाब रही। सन् २००२ में ख़ान ने संजय लीला भंसाली की दुखांत प्रेम कथा देवदास में मुख्य भूमिका अदा की जिसके लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया। यह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास देवदास पर आधारित तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी।

अगले साल ख़ान की दो फ़िल्में रिलीज़ हुईं, चलते चलते और कल हो ना हो। चलते चलते एक औसत हिट साबित हुई[30] लेकिन कल हो ना हो, जो की करण जोहर की तीसरी फ़िल्म थी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में काफ़ी कामयाब रही। इस फ़िल्म में ख़ान ने एक दिल के मरीज़ का किरदार निभाया जो मरने से पहले अपने चारों ओर खुशियाँ फैलाना चाहता है और इस अदाकारी के लिये उन्हें सराहा भी गया।[30]

२००४ ख़ान के लिये एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा। इस साल की उनकी पहली फ़िल्म थी फ़राह ख़ान निर्देशित मैं हूँ ना, जो ख़ान द्वारा सह-निर्मित भी थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट सिद्ध हुई। उनकी अगली फ़िल्म थी यश चोपड़ा कृत वीर-ज़ारा, जो उस साल की सबसे कामयाब फ़िल्म थी और जिसमे ख़ान को अपने अभिनय के लिये कई अवार्ड और बहुत प्रशंसा मिली।[कृपया उद्धरण जोड़ें] उनकी तीसरी फ़िल्म थी आशुतोष गोवारिकर निर्देशित स्वदेश, जो दर्शकों को सिनेमा-घरों में लाने में तोह सफल ना हो सकी लेकिन उसमें ख़ान के भारत लौटे एक अप्रवासी भारतीय की भूमिका को सराहा गया और ख़ान ने अपना छठवाँ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीता।[31]

सन २००५ में उनकी एकमात्र फ़िल्म पहेली (जो की अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित थी) बॉक्स ऑफिस पर असफल रही हालांकि उसमें ख़ान के अभिनय को सराहा गया|[32] २००६ में ख़ान एक बार फिर करण जोहर की फ़िल्म कभी अलविदा ना कहना में देखे गये जो एक अतिनाटकीय फ़िल्म थी। इस फ़िल्म ने भारत में तो सफलता प्राप्त की ही, साथ ही साथ यह विदेश में सबसे सफल हिन्दी फ़िल्म भी बन गई।[33] उसी वर्ष ख़ान ने १९७८ की हिट फ़िल्म डॉन की रीमेक डॉन में भी अभिनय किया जो एक बड़ी हिट सिद्ध हुई।[34]


२००७ में ख़ान की दो फिल्में आई है - चक दे! इंडिया और '['[ओम शांति ओम]]चक दे! इंडिया में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना। इस किरदार की लिये ख़ान को समीक्षकों से तो खासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म एक विशाल हिट भी सिद्ध हुई है।[35] २००७ की दूसरी फ़िल्म ओम शांति ओम में भी नज़र आए ये फराह ख़ान की शाहरुख़ ख़ान के साथ दूसरी फ़िल्म है। इसमें ख़ान ने दोहरी भूमिका निभाई। पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है। ये फ़िल्म भी २००७ की एक सफल फ़िल्म थी।

फिल्मी जीवनसंपादित करें

शाहरूख खान ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरूआत १९८८ में लेख टंडन के टेलीविजन धारावाहिक दिल दरिया से आरम्भ किया था लेकिन निर्माण में देरी के कारण १९८९ का टीवी धारावाहिक फौजी उनका पहला धारावाहिक रहा।[36]

नामांकन और पुरस्कारसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Bandra Muslims to defend SRK, Mannat from Sena". मिड डे. 4 फ़रवरी 2011. मूल से 12 जनवरी 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 अक्टूबर 2011.
  2. "Acting, not romance, is my forte: Shah Rukh Khan". TimesofIndia. 7 नवम्बर 2012. मूल से 26 जनवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 नवम्बर 2012.
  3. "The Global Elite – 41: Shahrukh Khan". Newsweek. 20 दिसम्बर 2008. मूल से 24 दिसंबर 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 दिसम्बर 2008.
  4. profile_1_bollywood-indian-cinema-shah-rukh-khan?_s=PM: SHOWBIZ "The King of Bollywood" जाँचें |url= मान (मदद). CNN. CNN Entertainment. 5 फ़रवरी 2008. अभिगमन तिथि 25 जून 2011.[मृत कड़ियाँ]
  5. Saner, Emine (4 अगस्त 2006). world "King of Bollywood" जाँचें |url= मान (मदद). द गार्डियन. London. अभिगमन तिथि 25 जून 2011.
  6. "भारतीय अमीरों में शुमार हुए शाहरूख, जानें कितनी है प्रॉपर्टी". पत्रिका समाचार समूह. ४ सितंम्बर 2014. मूल से 7 सितंबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि ४ सितंम्बर 2014. |accessdate=, |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  7. Nachgaana: Three hours with Shah Rukh Khan Archived 28 सितंबर 2007 at the वेबैक मशीन.
  8. "ABPL Group: Shah Rukh, Dilip Kumar invited to Pakistan". मूल से 28 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 सितंबर 2007.
  9. "Afghanland: Afghans of Guyana". मूल से 5 नवंबर 2006 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 सितंबर 2007.
  10. "Badshah at durbar and dinner". telegraphindia.com. मूल से 27 जनवरी 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 मार्च 2007.
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  12. A Hundred Horizons by Sugata Bose, 2006 USA, p136
  13. "Tehelka". मूल से 27 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 सितंबर 2007.
  14. "Bollywoodgate". मूल से 27 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 सितंबर 2007.
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  16. "SRK - 'Badshah' of Bollywood". मूल से 27 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 सितंबर 2007.
  17. "'I See Myself As An Ambassador Of Islam'". मूल से 2 अप्रैल 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 जून 2018.
  18. "King of Bollywood". मूल से 4 मार्च 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 जून 2018.
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  20. "Shahrukh's teacher gives him the credit". मूल से 30 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 सितंबर 2007.
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  30. "संग्रहीत प्रति". मूल से 12 फ़रवरी 2006 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 फ़रवरी 2006.
  31. "संग्रहीत प्रति". मूल से 27 अक्तूबर 2004 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 अक्तूबर 2004.
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  36. चोपड़ा 2007, पृ॰प॰ 72–74.

ग्रंथसूचीसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें