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सदस्य वार्ता:SM7



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इन्द्रकील पर्वतसंपादित करें

महाभारत के वन पर्व एवं शिवपुराण के रुद्रसंहिता में स्पष्ट लिखा है कि इन्द्रकील पर्वत उत्तर दिशा एवं हिमालय में स्थित है। और अर्जुन ने शिव की तपस्या गंगा नदी के तट पर की। महाभारत में वर्णित इंद्रकील, कैरात, खांडव वन क्रमशः इंदल- कायान, महादेव, एवं खांडू जैसे स्थानीय नामों से जाने जाते है। कैरात रूपी शिव के साथ अर्जुन युद्ध जो की पुराणों में वर्णित है स्थानीय लोग इद्रकील के साथ इसका भी बखान करते है।आज भी महादेव का भव्य मंदिर यहां पर स्थापित है। एक शिला जिस पर पंजे का निशान बना है अर्जुन की हथेली के निशान माना जाता है। यह स्थान हिमालय के निकटवर्ती (गंगोत्री एवं यमुनोत्री के मध्य) , गंगा नदी के तट पर, महादेव के मंदिर एवं स्थानीय नामों एवं जनश्रुतियों पर आधारित होने के कारण, इसको प्रमाणित किया जा सकता है। [SS Bartwal]

@Surendra Singh Bartwal: जी नमस्ते, देर के लिए माफ़ी चाहता हूँ। महाभारत और पुराणादि में वर्णित स्थानों की वर्तमान अवस्थिति के बारे में अक्सर विवाद रहते हैं। उत्तर दिशा और हिमालय पर होना एक व्यापक इलाका कवर करता है। मैंने इंटरनेट पर जितना खोजा मुझे इसके वर्तमान स्थिति के बारे में उत्तराखंड के आलावा हिमाचल में और कैलाश श्रेणी में होने की बातें भी लिखी दिखीं हालाँकि, वो सभी स्रोत विकिपीडिया के मानकों के अनुसार नहीं थे अतः उन्हें लेख में उद्धृत नहीं किया जा सकता।
दूसरी चीज, विकिपीडिया पर कई स्रोतों से सामग्री लेकर उनके संश्लेषण से कोई निष्कर्ष निकाल कर लिखना मना है, इसे हम मूल शोध कहते हैं, यानी आप ऐसा करके अपनी रिसर्च यहाँ लिख रहे हैं। इसके विपरीत विकिपीडिया पर वे बातें ससंदर्भ लिखी जाती हैं जिन्हें अन्य लोगों ने निष्कर्ष के रूप में माना हो और उनके निष्कर्ष प्रतिष्ठित प्रकाशन से छपे हुए हों। अतः यदि इस पर्वत के बारे में कुछ लोगों से शोध किया हो और वह चीजें प्रकाशित हों, पर्याप्त मात्रा में हो, और संबंधित विषय के लोगों में इसे मान्यता हो तो ही हम उन स्रोतों का उद्धरण देकर लिख सकते।
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए आप हिंदी विकिपीडिया पर अपना अमूल्य योगदान जारी रखें। शुभकामनाएँ। --SM7--बातचीत-- 18:04, 20 नवम्बर 2018 (UTC)

इंद्र कील पर्वतसंपादित करें

धन्यवाद महोदय आपने चर्चा के लिए समय निकाला, महोदय में विकिपीडिया पर अभी नया हूं। लेकिन मै यह बात आपको विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इंद्र कील से संबंधित जो जानकारी मैंने दी है उसकी प्रमाणिकता निम्न बातों से पता चलती है। हिमाचल में कुल्लू क्षेत्र में जो इंद्र कील पर्वत है उसका इंद्र कील धारी पर्वत है, अगर इसको सही माना भी जाए , तो यह गंगा कहीं भी नहीं है जो महाभारत पुराण में स्पष्ट रूप से लिखा है की अर्जुन ने गंगा तट पर तपस्या की। इससे अलावा जो अन्य स्थान जो इंटरनेट में दिखते है। वह महाभारत की कहानी से मेल नहीं होता। क्योंकि यह कहा गया है कि गंध मादन पर्वत को लांगकर अर्जुन इंद्र कील पहुंचा । तो यह पर्वत वर्तमान में केदार नाथ के आस पास है जो उत्तराखण्ड में स्थित है। उस पर्वत से उत्तर दिशा की तरफ गंगोत्री और यमुनोत्री जो विशाल हिमालय और गंगा और यमुना की उदगम स्थली है। इस से स्पष्ट है कि यह स्थान इस हिमालय के आस पास होगा। दूसरी बात यह है कि वह के स्थानीय लोगों की यह दृढ़ विश्वास है कि स्थानीय इंदल कयाण ही इंद्र कील है। शिव अर्जुन युद्ध के शिला पर निशान एवं गंगातट पर शिव मंदिर आदि अनेक कारण जो इंद्र कील को यहीं पर सिद्ध करते है। मेरा सिर्फ इतना प्रयास है कि सच्चाई विकिपीडिया पर आए, यदि कोई इसका विरोध करता है या फिर अन्य जगह इसकी स्थिति दिखाता है तो पौराणिक प्रमाण के साथ चर्चा करें। आप अपने स्तर से भी खोज कर सकते है। संपादकीय पृष्ठ यदि विकिपीडिया के नियम के तहत नहीं है तो हमें मार्गदर्शन कीजिए हम उस पृष्ठ को अच्छा करने का प्रयास करेंगे। लेकिन इंद्र कील पर्वत को यथावत रखने की कृपा करें। विकिपीडिया जो ज्ञान का सागर है उसमे यह कड़ी भी जुड़े यही आशा है।

Surendra Singh Bartwal (वार्ता) 13:14, 21 नवम्बर 2018 (UTC)

प्रयोगस्थल का साँचासंपादित करें

(आपसे प्राप्त पाठ आपकी सुविधा के लिए यहाँ पेस्ट किया गया है)

नमस्ते, आपने इस संपादन द्वारा इसे खाली कर दिया है जैसे कि हम लोग पहले किया करते थे। परन्तु हाल ही में कुछ लोगों ने बड़ी मेहनत से इस पन्ने पर प्रदर्शित होने के लिए कुछ चीजें बनाई हैं। अतः अब इस पन्ने की सफाई करते समय ध्यान दें कि इसे पूरा नहीं खाली करना है बल्कि नीचे दी गयी सामग्री से बदल देना है:

{{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!--

*               प्रयोगस्थल में आपका स्वागत है!              *

*              कृपया इस भाग को ऐसे ही छोड़ दें             *

*                यह पृष्ठ नियमित साफ़ होता है।              *

*         अपने सम्पादन यहां निश्चिन्त होकर कौशल प्रयोग करें        *

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■-->

यानी अब खाली करने की जगह इस सामग्री को पेस्ट करना है। शुभकामनाएँ। --SM7--बातचीत-- 18:02, 22 अगस्त 2018 (UTC)

धन्यवाद! --मुज़म्मिल (वार्ता) 19:55, 22 अगस्त 2018 (UTC)
आपने प्रयोगस्थल मेरे सम्पादन को उलटकर यह प्रमाणित कर दिया कि अब हिन्दी विकिपीडिया आप जैसे मुट्ठी-भर लोगों की सम्पत्ति रह गई है! बधाई और सहृदयतापूर्ण धन्यवाद!!--मुज़म्मिल (वार्ता) 17:33, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
मुज़म्मिल जी अगर आपकी समझदानी में वाकई इतनी जगह होती तो समझ सकते थे कि वहाँ मेरे द्वारा किया जा रहा परीक्षण अभी पूर्ण नहीं हुआ है। जब आपको मैंने ही उसे सही तरीके से खाली करना बताया है तो उमीद रखें कि जब कार्य ख़त्म हो जाएगा मैं पन्ने को उचित अवस्था में ले आऊँगा। फिलहाल उसपे रखी सामग्री को कई प्रबंधको को देखने के लिए लिखा हूँ। इसलिए वहाँ सफाई करने में अपना समय बर्बाद न करें। आपका शुभाकांक्षी। --SM7--बातचीत-- 17:41, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
आप में यदि विकि-सभ्यता या व्यव्हारिक नरमी का कोई तत्व होता तो आप मेरे यहाँ पाठ रखते ही इस पर कुछ कहते। पर आपके अनुसार सारी "समझदानी" आप में है, बाक़ी विकि-सदस्य तो मूर्ख हैं! धन्यवाद!! --मुज़म्मिल (वार्ता) 17:52, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
मुज़म्मिल जी, निरर्थक बातें आप अपने मन से समझ लेते हैं, जबकि आपके ध्यानाकर्षण पर उत्तर देने में समय नष्ट न करते हुए मैंने अपना कार्य जारी रखा यह सीधी बात आपको न समझ में आई? और किसी अतिरिक्त नरमी की कोई उमीद न करें। आपने इसे ही तो अवरोधित करवाने के लिए मुद्दा बना रक्खा है, अब क्या बीच में आपको धोखा देना उचित होगा? --SM7--बातचीत-- 18:05, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
वर्तमान रूप से मैं सामाजिक समरसता के लेख पर काम कर रहा था, इसलिए आपके तीखे और आदर-सम्मान रहित पूर्व के व्यवहार को लगभग भूल चुका था। निश्चित रूप से अपने वास्तविक स्वभाव के विपरीत व्यवहार प्रकट करके धोखा देना उचित नहीं है। इसलिए कृपया करके आपके मन में मेरे लिए जितनी भी गालियाँ आ रही हैं, निसंकोच लिख डालिए। इससे वर्तमान प्रबंधकगण बिना किसी द्विविधा या संदेह के आपको अवरोधित कर सकते हैं। --मुज़म्मिल (वार्ता) 18:41, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
परेशान न हों, मैं भी अभी कुछ शीह नामांकित लेखों को बचाने के प्रयास में हूँ केवल आप ही विकिपीडिया पर कार्य करते हैं ऐसा नहीं है जो बार बार दिखाते रहते कि यह कर रहा - वह कर रहा या गिनाते रहते कि मैंने ये किया है। वैसे एक बात बताइये आप 20000 संपादन करके बटेर की तरह गर्दन करके फोटो खिंचवा सकते हैं, और हमने किसी को 50,000 संपादन होने की बधाई के रूप में बार्नस्टार दिया तो वो चापलूसी हो गयी ? आपकी बुद्धिमत्ता क्या इतनी ही है? --SM7--बातचीत-- 18:58, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
आपकी बुद्धिमत्ता से बहुत अच्छी है जो दूसरों को मूर्ख, घमंडी और बटेर कहते आए हैं। प्लीज़, पूरी गालियाँ एक साथ दीजिए - एक-एक करके घर वालों से पूछकर मत दीजिए। --मुज़म्मिल (वार्ता) 19:08, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
आपने यह चर्चा इसी नीयत से शुरू की है कि कैसे अवरोधित करवाने के लिए मसाला जुटाया जाए ? गाली सुनने के लिए तो कोई इतना बेचैन नहीं होता। फिर अगर आप खुद इसरार करके गालियाँ खायेंगे तो क्या उन्हें अवरोध का कारण बनाना उचित होगा ? --SM7--बातचीत-- 19:13, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
मूर्ख, घमंडी और बटेर जैसे सुन्दर और सुखद शब्दों का प्रयोग आपने स्वेच्छापूर्वक किए थे। अन्य शब्द भी आप ही स्वतंत्र रूप से प्रयोग कीजिए और इसी बात की घोषणा करते हुए कीजिए। --मुज़म्मिल (वार्ता) 19:22, 23 नवम्बर 2018 (UTC)

┌─────────────────────────────────┘
आपकी किसी मूर्खता को इंगित करना और आपको मूर्ख कहना दोनों एक ही बात नहीं हैं। हाँ, शायद यह बात समझ नहीं पा रहे आप। आप दुबारा मूर्खता करेंगे तो हम अपनी हार्दिक इच्छानुसार (बल्कि इसे कर्तव्य मानते हुए) पुनः आपको इंगित करेंगे। प्रोवोक करने का प्रयास न करें यह काँइयापन जैसा प्रतीत होता। --SM7--बातचीत-- 19:27, 23 नवम्बर 2018 (UTC)

प्रोवोक करना आपका काम है जो मान न मान "मैं नियम-रहित बात को किसी की वार्ता पृष्ठ पर बार-बार लिखता रहूँगा" अपना लक्ष्य बनाता है। व्यक्तिगत हमले करना और किसी को "बटेर" बनाना भी एक शुभ कार्य है जो आप जैसा व्यक्ति ही कर सकता है। मैं कभी आपके प्रयुक्त किसी भी घटिया शब्द या आदर-रहित शैली का इस्तेमाल नहीं करता। शुभ रात्रि! --मुज़म्मिल (वार्ता) 19:42, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
बंधुवर ! आप उस तस्वीर में बटेर की तरह गर्दन किये हुए हैं, अगर आप मोर की तरह किये होते तो वह ही कहता; तब क्या इसका मतलब यह होता कि आपको मोर कह रहा हूँ? शुभ रात्रि आपको भी, सुखद निद्रा लें। --SM7--बातचीत-- 19:49, 23 नवम्बर 2018 (UTC)
मित्र महोदय, समस्या तो यही है कि आप जैसा महान व्यक्ति हम जैसे छोटे से योगदानकर्ताओं को "बटेर" और "मोर" आदि शब्द अपनी सुविधा और आकलन से कह सकता है और शायद यह विकि-नीतियों के अंतरगत स्वीकारनीय है। मैं चाहूँगा कि प्रबंधक सूचनापट पर हमारे प्रबंधक यही बात की घोषणा कर दें। सारा मामला यहीं समाप्त हो जाएगा। शुभ रात्रि। --मुज़म्मिल (वार्ता) 18:32, 24 नवम्बर 2018 (UTC)
उपमा अथवा रूपक न सही उत्प्रेक्षा तो हमेशा स्वीकार्य होती है। बाक़ी आपके चाहने से प्रबंधक घोषणा करते या नहीं करते देखा जायेगा। चाहने से तो सबकुछ होता नहीं, नहीं तो कुछ प्रबंधक तो चाहते होंगे कि वे फूँक दें और हम भस्म हो जाएँ, सारा मामला समाप्त हो जाए। --SM7--बातचीत-- 18:43, 24 नवम्बर 2018 (UTC)

इंद्रकील पर्वतसंपादित करें

पीठाश्वर महायोगी सत्येंद्रनाथ के अनुसार इंद्रासन पर्वत प्रदेश के 10 बड़े पहाड़ों में से एक है। जिसमें इसे पंचपीठों के बीच में स्थित बताया गया है। इन पांच पीठों में से कौलांतक पीठ, जालंधर पीठ, कुर्म पीठ, श्रीपीठ व बराहपीठ है। इसमें इंद्राकील पर्वत कौलांतक, जालंधर व कुर्म पीठ के बीच में है। महायोगी ने शोध में पाया कि वास्तव में पर्वत का नाम इंद्रकील पर्वत नहीं था। यह नाम बाद में पड़ा था। इस से पता चलता है कि यह पर्वत कुल्लू में नहीं है। कृपया लिंक देखें।

http://dnasyndication.com/dbarticle.aspx?nid=DBHIM1941

गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि के बारे मेंसंपादित करें

आदरणीय श्रीमान जी आपने गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्मभूमि के बारे में संदेह पूर्वक लिखा है जो मैं आपको स्पष्ठ रूप से जानकारी दे दू की पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि चित्रकूट जिले के राजापुर कस्बे में हुआ था जिसका प्रमाण राजापुर में साक्ष्य के रूप में उनकी लिखी हुई रामचरित मानस , उनकी ससुराल महेवाघाट (कौशाम्बी), यमुना नदी , आदि जैसे साक्ष्य मौजूद हैं कृपया अपना स्टेटमेंट एडिट करके उसे राजापुर क्लियर कर दीजिए ।

हि0यु0वा0 नगर अध्यक्ष प्रशान्त तिवारी राजापुर चित्रकूट उत्तर प्रदेश

माता-पिता का सम्मानसंपादित करें

मान्यवर, मैं नहीं जानता कि आप किस स्ंस्कृति से संबंधित हो - हो सकता है कि आपको आपके माता-पिता के रूसी-जापानी-अफ़गानिस्तानी कहलाने पर गर्व हो, परन्तु मुझे तो अपने तथा अपने माता-पिता के भारतीय होने पर गर्व है आपके इस प्रकार से "इंगलिस" लेबल चिपाकाने पर मुझे घोर आपत्ति है। क्या आप यहाँ मूल रूप से लड़ने झगड़ने के नेक इरादे से ही आते हैं? --मुज़म्मिल (वार्ता) 08:05, 26 दिसम्बर 2018 (UTC)

मुज़म्मिल बाबू, आप ही बता दो, आपके नाम के आगे जी लगा के बात करने लगूँ तो आप खुस हो जाओगे ? --SM7--बातचीत-- 16:34, 26 दिसम्बर 2018 (UTC)
माता-पिता का तो आदर नहीं करते, मेरा क्या करोगे? --मुज़म्मिल (वार्ता) 17:29, 26 दिसम्बर 2018 (UTC)
तू अपनी बता यार, तेरा ईगो कैसे शांत होगा।--SM7--बातचीत-- 18:14, 26 दिसम्बर 2018 (UTC)
सुसंस्‍कृत भाषा!! --मुज़म्मिल (वार्ता) 18:53, 26 दिसम्बर 2018 (UTC)
तो मत बात करो अगर यह डिमांड नहीं पूरी हो रही। --SM7--बातचीत-- 01:47, 27 दिसम्बर 2018 (UTC)
वेन यू रेफ़र टू अदर्स ऍज़ "अंग्रेज़ की औलाद", यू शुड टेल यू आर हूज़ औलाद। इज़'इंट इट? --मुज़म्मिल (वार्ता) 04:26, 27 दिसम्बर 2018 (UTC)
श्रीमान माता-पिता के सम्मान के बारे में केवल मैं ही ज़ोर नहीं देता बल्कि ये पूरे विश्व के सज्जन पुरुष करते हैं - अपने और दूसरे के माता पिता का आदर। आपकी सुविधा के लिए यहाँ से एक एक कोट देखिए:
संतान की ... गलतियों के बावजूद माता-पिता का स्नेह उनपर कभी कम नहीं होता बल्कि दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है । वो हमेशा उसके कुशल भविष्य की कामना ही करते हैं । इसलिए मनुष्य को सदैव इस बात का स्मरण रखना चाहिए कि संसार से कमाई हुई सारी धन संपत्ति, सारा मान-सम्मान, सारा सुख व्यर्थ है यदि माता-पिता को हम प्रसन्न न रख पाए तो । जिन्होनें हमें जीवन दिया है, उनके उपकार का बदला चुकाना तो कभी संभव नहीं किन्तु उनकी सेवा कर के मन की शांति अवश्य मिल सकती है । हमें इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी भी व्यवहार से हमारे माता-पिता को कभी कष्ट न हो ।
--मुज़म्मिल (वार्ता) 08:59, 28 दिसम्बर 2018 (UTC)

झूठा व्यक्तिसंपादित करें

मेरे व्यक्तित्व पर टिप्पणियाँ करने के लिए तुझको कष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। कई दिनों से फ़िजी विकि के प्रबंधकीय दायित्व से मुक्त होने के बावजूद अपने सदस्यपृष्ठ पर पदाधिकारी होने का ढोंग रचाना अपने आप में तेरे झूठे और ढोंगी होने का प्रमाण है। --मुज़म्मिल (वार्ता) 19:03, 12 जनवरी 2019 (UTC)

मुज़म्मिल, शिकायत कर दे जाकर मेटा पर, मुझे तो पता भी नहीं, तू ही ये सब बैठ के गिनता रहता है। --SM7--बातचीत-- 08:46, 13 जनवरी 2019 (UTC)
"hide some Admin status" = सत्यमेव जयते। --मुज़म्मिल (वार्ता) 17:34, 13 जनवरी 2019 (UTC)
बालक, खुस हो गया ? --SM7--बातचीत-- 18:48, 13 जनवरी 2019 (UTC)
न्ह्हीं नाँ अप्पन्ने मोह्ह्ल्ले के मंछे हुए चाचू!! --मुज़म्मिल (वार्ता) 14:59, 14 जनवरी 2019 (UTC)
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