इज़राइल

एशिया में देश
(इजरायल से अनुप्रेषित)

इज़राइल राष्ट्र (इब्रानी:מְדִינַת יִשְׂרָאֵל , मेदिनत यिसरा'एल; دَوْلَةْ إِسْرَائِيل, दौलत इसरा'ईल) दक्षिण पश्चिम एशिया में स्थित एक देश है। यह दक्षिणपूर्व भूमध्य सागर के पूर्वी छोर पर स्थित है। इसके उत्तर में लेबनॉन, पूर्व में सीरिया और जॉर्डन तथा दक्षिण-पश्चिम में मिस्र है।

इज़राइल राज्य
מְדִינַת יִשְׂרָאֵל
(मेदिनत यिसरा'एल)
ध्वज कुल चिह्न
राष्ट्रगान: हातिकवाह
आशा
राजधानी
और सबसे बडा़ नगर
येरुशलम
31°47′N 35°13′E / 31.783°N 35.217°E / 31.783; 35.217
राजभाषा(एँ) हिब्रू, अरबी
मानवजातीय वर्ग ७६% यहूदी, १९% अरब, ५% अन्य अल्पसंख्यक समूह
निवासी इज़रायली
सरकार संसदीय लोकतन्त्र
 -  राष्ट्रपति सिमोन पेरेज
 -  प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
स्वतन्त्रता फिलिस्तीन का ब्रिटिश जनादेश से
 -  घोषणा १४ मई १९४८ (05 Iyar 5708) 
 -  जल (%) ~२%
जनसंख्या
 -  २००८ जनगणना ७,२८२,००० 2 (९६ वां)
 -  १९९५ जनगणना ५,५४८,५२३
सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) २००७ प्राक्कलन
 -  कुल १८८.९३६ अरब $ (५२ वाँ)
 -  प्रति व्यक्ति २७,१४६ $ (३२ वाँ)
मानव विकास सूचकांक (२०१३) Straight Line Steady.svg 0.888[1]
बहुत उच्च · १९वाँ
मुद्रा इजरायली नई शेकेल (ILS)
समय मण्डल इमास (यू॰टी॰सी॰+२)
 -  ग्रीष्मकालीन (दि॰ब॰स॰)  (यू॰टी॰सी॰+३)
यातायात चालन दिशा दाएं
दूरभाष कूट ९७२
इंटरनेट टीएलडी .il
1. Excluding / Including the Golan Heights and East Jerusalem; see below.
2. Includes all permanent residents in proper Israel, the Golan Heights and East Jerusalem. Also includes Israeli population in the West Bank.

मध्यपूर्व में स्थित यह देश विश्व राजनीति और इतिहास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इतिहास और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार यहूदियों का मूल निवास रहे इस क्षेत्र का नाम ईसाइयत, इस्लाम और यहूदी धर्मों में प्रमुखता से लिया जाता है। यहूदी, मध्यपूर्व और यूरोप के कई क्षेत्रो में फैल गए थे। उन्नीसवी सदी के अन्त में तथा फ़िर बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में यूरोप में यहूदियों के उपर किए गए अत्याचार के कारण यूरोपीय (तथा अन्य) यहूदी अपने क्षेत्रों से भाग कर येरूशलम और इसके आसपास के क्षेत्रों में आने लगे। सन् 1948 में आधुनिक इसरायल राष्ट्र की स्थापना हुई।

यरूशलम इसरायल की राजधानी है पर अन्य महत्वपूर्ण शहरों में तेल अवीव का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। यहाँ की प्रमुख भाषा इब्रानी (हिब्रू) है, जो दाहिने से बाँए लिखी जाती है। यहाँ के निवासियों को इसरायली कहा जाता है।

अनुक्रम

नामसंपादित करें

इसरायल शब्द का प्रयोग बाईबल और उससे पहले से होता रहा है। बाईबल के अनुसार ईश्वर के फ़रिश्ते के साथ युद्ध लड़ने के बाद जैकब का नाम इसरायल रखा गया था। इस शब्द का प्रयोग उसी समय (या पहले) से यहूदियों की भूमि के लिए किया जाता रहा है।

भूगोलसंपादित करें

 
वेस्टबैंक, गाजा पट्टी तथा गोलन हाइट्स के साथ इजराइल का मानचित्र

इज़रायल दक्षिण पश्चिम एशिया का एक स्वतंत्र यहूदी राज्य है, जो 14 मई 1948 ई. को पैलेस्टाइन से ब्रिटिश सत्ता के समाप्त होने पर बना। यह राज्य रूम सागर के पूर्वी तट पर स्थित है। इसके उत्तर तथा उत्तर पूर्व में लेबनान एवं सीरिया, पूर्व में जार्डन, दक्षिण में अकाबा की खाड़ी तथा दक्षिण पश्चिम में मिस्र है (क्षेत्रफल 20,700 वर्ग किलोमीटर)। इसकी राजधानी तेल अवीब एवं हैफा इसके अन्य मुख्य नगर हैं। राजभाषा इब्रानी है।

इज़रायल के तीन प्राकृतिक भाग हैं जो एक दूसरे के समांतर दक्षिण से उत्तर तक फैले हैं :

  • (१) रूमतटीय 'शैरों' तथा फिलिस्तिया का मैदान, जो अत्यधिक उर्वर है, तथा मक्का जो सब्जियों, संतरों, अंगूरों एवं केलों की उपज के लिए प्रसिद्ध है।
  • (2) गैलिली, समारिया तथा जूडिया का पहाड़ी प्रदेश, जो तटीय मैदान के पूर्व में 25 से लेकर 40 मील तक चौड़ा है। इज़रायल का सर्वोच्च पर्वत अट्ज़मान (ऊँचाई 3,962 फुट) यहीं स्थित है। जज़रील घाटी गैलिली के पठार को समारिया तथा जूडिया से पृथक्‌ करती है और तटीय मैदान को जार्डन की घाटी से मिलाती है। गैलिली का पठार एवं जज़रील घाटी समृद्ध कृषिक्षेत्र हैं जहाँ गेहूँ, जौ, जैतून तथा तंबाकू की खेती होती है। समारिया का क्षेत्र जैतून, अंगूर एवं अंजीर के लिए प्रसिद्ध है।
  • (3) जार्डन रिफ्ट घाटी, जो केवल 10-15 मील चौड़ी तथा अत्यधिक शुष्क है। इसके जगत्‌ के स्थलखंड का सबसे नीचा भाग है। जार्डन नदी के मैदान में केले की खेती होती है।

इज़रायल के दक्षिणी भाग में नेजेव नामक मरुस्थल है जिसके उत्तरी भाग में सिंचाई द्वारा कृषि का विकास किया जा रहा है। यहाँ जौ, सोरघम, गेहूँ, सूर्यमुखी, सब्जियाँ एवं फल होते हैं। सन्‌ 1955 ई. में नेजेव के हेलेट्ज़ नामक स्थान पर इज़रायल में सर्वप्रथम खनिज तेल पाया गया। इस राज्य के अन्य खनिज पोटाश, नमक इत्यादि हैं।

प्राकृतिक साधनों के अभाव में इज़रायल की आर्थिक स्थिति विशेषत: कृषि तथा विशिष्ट एवं छोटे उद्योगों पर आश्रित है। सिंचाई के द्वारा सूखे क्षेत्रों को कृषियोग्य बनाया गया है। अत: कृषि का क्षेत्रफल, सन्‌ 1969-70 में 10,58,000 एकड़ था।

तेल अवीव इज़रायल का प्रमुख उद्योगकेंद्र है जहाँ कपड़ा, काष्ठ, औषधि, पेय तथा प्लास्टिक आदि उद्योगों का विकास हुआ है। हैफा क्षेत्र में सीमेंट, मिट्टी का तेल, मशीन, रसायन, काँच एवं विद्युत्‌ वस्तुओं के कारखाने हैं। जेरूसलम हस्तशिल्प एवं मुद्रण उद्योग के लिए विख्यात है। नथन्या जिले में हीरा तराशने का काम होता है।

हैफा तथा तेल अवीव रूम सागरतट के पत्तन (बंदरगाह) हैं। इलाथ अकाबा की खाड़ी का पत्तन है। मुख्य निर्यात सूखे एवं ताजे फल, हीरा, मोटरगाड़ी, कपड़ा, टायर एवं ट्यूब हैं। मुख्य आयात मशीन, अन्न, गाड़ियाँ, काठ एवं रासायनिक पदार्थ हैं।

स्वतंत्रता और शुरुआती समयसंपादित करें

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने स्वयं को एक विकत परिस्तिथि में पाया जहाँ उनका विवाद यहूदी समुदाय के साथ दो तरह की मानसिकता में बाँट चुका था। जहाँ एक तरफ हगना, इरगुन और लोही नाम के संगठन ब्रिटिश के खिलाफ हिंसात्मक विद्रोह कर रहे थे वहीँ हजारो यहूदी शरणार्थी इजराइल में शरण मांग रहे थे ! तभी सन १९४७ में ब्रिटिश साम्राज्य ने ऐसा उपाय निकलने की घोषणा की जिस से अरब और यहूदी दोनों संप्रदाय के लोग सहमत हो ! संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा फिलिस्तीन के विभाजन को (संयुक्त राष्ट्र संघ के १८१ घोषणा पत्र) नवम्बर २९,१९४७ मान्यता दे दी गयी, जिसके अंतर्गत राज्य का विभाजन दो राज्यों में होना था एक अरब और एक यहूदी ! जबकि जेरुसलेम को संयुक्त राष्ट्र द्वारा राज्य करने की बात कहीं गयी इस व्यवस्था में जेरुसलेम को " सर्पुर इस्पेक्ट्रुम "(curpus spectrum) कहा गया !

इस व्यवस्था को यहूदियों द्वारा तुरंत मान्यता दे दी गयी वहीँ अरब समुदाय ने नवेम्बर १ १९४७ तीन देनो के बंद की घोषणा की ! इसी के साथ गृह युद्ध की स्तिथि बन गए और करीब २५०,००० फिलिस्तीनी लोगो ने राज्य छोड़ दिया। १४ मई १९४८ को यहूदी समुदाय ने ब्रिटिश से पहले स्वतंत्रता की घोषणा कर दी और इजराइल को राष्ट्र घोषित कर दिया, तभी सिरिया, लीबिया तथा इराक ने इजराइल पर हमला कर दिया और तभी से १९४८ के अरब - इजराइल युद्ध की शुरुआत हुयी ! सउदी अरब ने भी तब अपनी सेना भेजकर और मिस्त्र की सहायता से आक्रमण किया और यमन भी युद्ध में शामिल हुआ, लगभग एक वर्ष के बाद युद्ध विराम की घोषणा हुयी और जोर्डन तथा इस्राइल के बीच सीमा रेखा अवतरित हुयी जैसे green line (हरी रेखा) कहा गया और मिस्त्र ने गज़ा पट्टी पर अधिकार किया, करीब ७००००० फिलिस्तीन इस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए। इजराइल ने ११ मई १९४९ में सयुक्त राष्ट्र की मान्यता हासिल की।

विवाद एवं शांति समझोतेसंपादित करें

 
इजराइल के अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध

अरब समुदाय तथा मिस्त्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नसीर ने इजराइल को मान्यता नहीं दी और १९६६ में इजराइल - अरब युद्ध हुआ ! १९६७ में मिस्त्र ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी दल को सनाई पनिसुलेना (१९५७) को बहार निकल दिया और लाल सागर में इजराइल की आवागमन बंद कर दी । जून ५,१९६७ को इजराइल ने मिस्त्र जोर्डन सीरिया तथा इराक के खिलाफ युद्ध घोषित किया और महज ६ दिनों में अपने अरब दुश्मनों को पराजित कर क्षेत्र में अपनी सैनिक प्रभुसत्ता कायम की। इस युद्ध के दौरान इजराइल को अपने हे राज्य में उपस्तिथ फलिस्तीनी लोगो का विरोध झेलना पड़ा इसमें प्रमुख था फिलिस्तीन लिबरेशन ओर्गानिज़शन (पी .एल .ओ) जो १९६४ में बनया गया था । १९६० के अंत से १९७० तक इजराइल पर कई हमले हुए जिसमे १९७२ में इजराइल के प्रतिभागियों पर मुनिच ओलंपिक में हुआ हमला शामिल है ।

६ अक्टूबर, १९७३ को सिरिया तथा मिस्त्र द्वारा इजराइल पर अचानक हमला किया गया जब इजराइली योम नमक त्यौहार मन रहे थे, जिसके जवाब में सिरिया तथा मिस्त्र को बहुत भरी नुक्सान उठाना पड़ा ।

१९७६ के दौरान इजराइल के सैनिको ने बड़ी बहादुरी से ९५ बन्धको को छुड़ाया!

१९७७ के आम चुनावो में लेबर पार्टी की हार हुयी और इसी के साथ मेनाचिम बेगिन सत्ता में आये तभी अरब नेता अनवर सद्दात ने इस्रैल की यात्रा को जिस से इजराइल-मिस्त्र समझोते (१९७९) की नीव पड़ी ।

मार्च ११, १९७८ में लेबनान से आये प .एल .ओ के आतंकियों ने ३५ इजराइली नागरिको की हत्या कर दे और ७५ को घायल कर दिया जवाब में इजराइल ने लेबनान पर हमला किया और प॰एल.ओ के सदस्य भाग खड़े हुए ।

१९८० में इज्रैल ने जेरुसलेम को अपनी राजधानी घोषित किया जिस से अरब समुदाय नाराज़ हो गया ।

जून ७, १९८१ में इज्रैल ने इराक का सोले परमाणु सयंत्र तबाह कर दिया ।

संविधान एवं शासनसंपादित करें

इज़रायल एक प्रभुसत्तासंपन्न गणराज्य है जिसकी स्थापना 14 मई 1948 ई. के घोषणा के आधार पर हुई है। 1949 ई. में इज़रायली संसद् (सेनेट) ने संक्रमण कानून पारित किया जो समान्य शब्दावली के माध्यम से संसद्, राष्ट्रपति तथा मंत्रिमंडल के अधिकारों की व्याख्या करता है। 1950 ई. में संसद ने समय-समय पर मूल नियमों को अधिनियमित करने का प्रस्ताव पारित किया। ये ही अधिनियमित मूल नियम समग्र रूप में इज़रायल के संविधान के नियामक हैं। संसद्, इज़रायली राष्ट्र तथा राष्ट्रपति से संबद्ध इन मूल नियमों को क्रमश: 1958, 1960, तथा 1964 ई. में पारित किया गया।

इज़रायली संसद् को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं और 120 सदस्योंवाली इस एकसदनी संसद् का चुनाव सार्वदेशिक मताधिकार के आधार पर अनुपाती-प्रतिनिधित्व-पद्धति से प्रति चार वर्ष के लिए कराया जाता है। राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होता है और संसद् पाँच वर्ष के लिए इसका चुनाव करती है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गठित मंत्रिमंडल संसद् के प्रति उत्तरदायी होता है। मंत्री सामान्यत: संसद् सदस्यों में से ही बनाए जाता हैं लेकिन इनकी नियुक्ति सदस्येतर व्यक्तियों में से भी की जा सती है। पूरा देश छह मंडलों में विभक्त है। संसदीय निर्वाचन के साथ-साथ स्थानीय अधिकारियों का चुनाव भी संपन्न होता है जिनका कार्यकाल चार वर्ष तक रहता है। 27 नगरपालिकाएँ (दो अरबों की), 117 स्थानीय परिषदें (45 अरबों तथा सीरियाई देशों की) तथा 47 क्षेत्रीय परिषदें (एक अरबों की) 674 गाँवों का प्रतिनिधित्व करती हैं। !

अर्थव्यवस्थासंपादित करें

इज़राइल को आर्थिक और औद्योगिक विकास में दक्षिण पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में सबसे उन्नत देश माना जाता है। इज़राइल की अत्याधुनिक विश्वविद्यालय और गुणवत्ता शिक्षा, देश की उच्च प्रौद्योगिकी उछाल और तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद, पिछले दशकों में कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के गहन विकास ने अनाज और बीफ के अलावा, इजरायल को खाद्य उत्पादन में काफी हद तक आत्मनिर्भर बना दिया है। 2016 में कुल 57.9 बिलियन अमरीकी डालर का आयात किया गया था, जिसमें कच्चे माल, सैन्य उपकरण, निवेश सामान, कच्चे हीरे, ईंधन, अनाज और उपभोक्ता सामान शामिल हैं। 2016 में, इजरायल का निर्यात 51.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया। प्रमुख निर्यात में, मशीनरी और उपकरण, सॉफ्टवेयर, कटे हीरे, कृषि उत्पादों, रसायन और वस्त्र और परिधान शामिल हैं।

संस्कृतिसंपादित करें

इजरायल की विविध संस्कृति इसकी आबादी की विविधता के कारण उत्पन्न होती है: चूकि दुनिया भर से यहूदि आकर इजरायल को अपना घर बनाया, तो साथ अपने देश से वहाँ की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को अपने साथ ले आये, जिससे यहूदी परंपराओं और मान्यताओं का एक मिला-जुला स्वरुप निर्मित हो गया है। इज़राइल दुनिया का एकमात्र देश है जहां जीवन हिब्रू कैलेंडर के अनुसार व्यतीत होता है। काम और स्कूल की छुट्टियाँ, यहूदी छुट्टियों द्वारा निर्धारित होती है, और हफ्तें का आधिकारिक अवकाश दिवस शनिवार होता है, जिस दिन यहूदी सब्त होता है। इज़राइल की अरब अल्पसंख्यकों ने वास्तुकला, संगीत और व्यंजन जैसे क्षेत्रों में, वहाँ की संस्कृति पर अपनी छाप छोड़ी है। इजरायल के व्यंजनों में स्थानिय व्यंजन और साथ ही साथ प्रवासी यहूदियों द्वारा उनके देश से लाये व्यंजन भी शामिल हैं। इज़राइली व्यंजनों में संयोजन देखने को मिलता है।

इसराइल में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल और बास्केटबॉल हैं। 1994 में, यूईएफए ने इजरायल की फुटबॉल टीम को यूरोपीय टीमों से प्रतिस्पर्धा करने की स्वीकृति प्रदान की। शतरंज इजराइल में एक प्रमुख खेल है और सभी उम्र के लोगों द्वारा खेला जाता है। कई इज़राइली ग्रैंडमास्टर और इज़राइली शतरंज खिलाड़ी, कई युवा विश्व चैंपियनशिप जीत चुके हैं। इज़राइल ने एक वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप आयोजित किया था और 2005 में विश्व टीम शतरंज चैंपियनशिप की मेजबानी भी की थी। 1992 में इज़राइल ने अपनी पहली जीत के बाद से नौ ओलंपिक पदक जीते हैं, जिसमें 2004 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में विंडसर्फिंग में स्वर्ण पदक भी शामिल है।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "2014 Human Development Report Summary". संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम. 2014. pp. २१–२५. http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr14-summary-en.pdf. अभिगमन तिथि: २७ जुलाई २०१४. 

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें