मुंडा भारत की एक जनजाति है, जो मुख्य रूप से झारखण्ड के छोटा नागपुर क्षेत्र में निवास करता है। झारखण्ड के अलावा ये बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िसा आदि भारतीय राज्यों में भी रहते हैं। इनकी भाषा मुंडारी आस्ट्रो-एशियाटिक परिवार की एक प्रमुख भाषा है। उनका भोजन मुख्य रूप से धान, मड़ुआ, मक्का, जंगल के फल-फूल और कंद-मूल हैं। वे सूत्ती वस्त्र पहनते हैं। महिलाओं के लिए विशेष प्रकार की साड़ी होती है, जिसे बारह हथिया (बारकी लिजा:) कहते हैं। पुरुष साधारण-सा धोती का प्रयोग करते हैं, जिसे तोलोंग कहते हैं। मुण्डा, भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। २० वीं सदी के अनुसार उनकी संख्या लगभग १,०००,००० थी।[1]

मुंडा
An old Munda man, Dinajpur (1), 2010 by Biplob Rahman.jpg
मुंडा समुदाय का एक आदमी
कुल जनसंख्या

1,000,000[1]

ख़ास आवास क्षेत्र
Flag of India.svg भारत
भाषाएँ
मुंडारी
धर्म
सरना, ईसाई और हिन्दू धर्म
अन्य सम्बंधित समूह
सांथाल  • खड़िया

इतिहाससंपादित करें

मुंडा लोगों का इतिहास अस्पष्ट है। यद्यपि वे छोटा नागपुर में कैसे आए, यह विवादित है, लेकिन इस बात पर सहमति है कि आधुनिक मुंडा भाषाओं के बोलने वाले पूर्वजों ने महाद्वीपीय दक्षिण पूर्व एशिया के ऑस्ट्रोआयसटिक मातृभूमि से पश्चिम की ओर पलायन किया था।

भाषाविद, पॉल सिडवेल (2018) के अनुसार, प्रोटो-मुंडा भाषा शायद ऑस्ट्रोएशियाटिक से अलग हो गई है जो आज दक्षिणी चीन या दक्षिण पूर्व एशिया से लगभग 4000-3500 साल पहले पूर्वी भारत में आया।[2]

1800 के दशक के अन्त में, मुंडा स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा ने भारत के ब्रिटिश शासन का विरोध करने का काम किया था।[3]

संस्कृतिसंपादित करें

 
मुण्डा नृत्य

मुण्डा संस्कृति की सामाजिक व्यवस्था बहुत ही बुनियादी और सरल है। मुण्डाओं के लिए भारतीय जाति व्यवस्था विदेशी है। उनके दफनाए गए पूर्वज परिवार के अभिभावक के रूप मे याद किए जाते हैं। दफन पत्थर (ससन्दीरी) उनका वंशावली का प्रतीक है। यह पत्थर सुलाकर धरती पर रखी जाती है पर कब्र के रूप में चिन्हित नहीं होता। बल्कि, मृतकों के हड्डियों को इस पत्थर के तहत रखते हैं, जहाँ पिछले पूर्वजों की हड्डियाँ भी मौजूद हैं। जब तक कब्रिस्तान (जंग तोपा) समारोह नहीं होता तब तक मृतकों के हड्डियों को मिट्टी के बर्त्तन में रखा जाता है। हर वर्ष में एक बार, परिवार के सभी सदस्य अपनी श्रद्धाञ्जलि देने के लिए दफन पत्थरों पर जाते हैं और यह आवश्यक माना है। पूर्वजों को याद करने के लिए अन्य पत्थर भी हैं जिन्हें मेमोरियल पत्थर (भो:दीरी) कहा जाता है। यह पत्थर खड़े स्थिति में रखा जाता है। इस पत्थर को रखने के लिए भी समारोह होता है जिसे पत्थर गड़ी (दीरी बीन) पर्ब कहते हैं।


धर्म और जनजातियों की पहचानसंपादित करें

मुख्यरूप से मुण्डा लोग पुराना धर्म सरना, ईसाई और हिन्दू धर्म के अनुयायी होते हैं, वे एक ईश्वर पर विश्वास करते हैं जो सिंगबोंगा कहलाता है।

उल्लेखनीय मुंडा व्यक्तिसंपादित करें

 
बिरसा मुंडा

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Munda http://global.britannica.com/EBchecked/topic/397427/Munda Archived 14 मई 2013 at the वेबैक मशीन.
  2. Sidwell, Paul. 2018. Austroasiatic Studies: state of the art in 2018 Archived 3 मई 2019 at the वेबैक मशीन.. Presentation at the Graduate Institute of Linguistics, National Tsing Hua University, Taiwan, May 22, 2018.
  3. Pandey, Prashant (2017-09-18). "Jharkhand: Amit Shah launches scheme for villages of freedom fighters". The Indian Express (अंग्रेज़ी में). मूल से 14 नवंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2017-10-21.

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें