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भारतीय रेल

भारत सरकार द्वारा स्वामित्व और संचालित भारतीय राज्य स्वामित्व वाली उद्यम
(भारतीय रेलवे से अनुप्रेषित)

भारतीय रेल (आईआर) एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। [6][7]यह १६० वर्षों से भी अधिक समय तक भारत के परिवहन क्षेत्र का मुख्य घटक रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा नियोक्ता है, जिसके १३ लाख से भी अधिक कर्मचारी हैं। यह न केवल देश की मूल संरचनात्‍मक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है अपितु बिखरे हुए क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने में और देश राष्‍ट्रीय अखंडता का भी संवर्धन करता है। राष्‍ट्रीय आपात स्थिति के दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में भारतीय रेलवे अग्रणी रहा है।[8]

भारतीय रेल
प्रकार रेल14888 मंत्रालय, भारत सरकार का विभागीय उपक्रम
उद्योग रेलवे तथा लोकोमोटिव
स्थापना १६ अप्रैल, १८५३, १९५१[1] में राष्ट्रीकृत[2]
मुख्यालय नई दिल्ली, भारत
क्षेत्र भारत
प्रमुख व्यक्ति केन्द्रीय रेलवे मंत्री:
पीयूष गोयल

अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड:विनोद कुमार यादव
उत्पाद रेल यातायात, माल-यातायात, अन्य सेवाएं
राजस्व Green Arrow Up Darker.svg 1,63,791 करोड़ (2016) (~२५.४६B$)[3][4]
कर्मचारी 16,31,582 (2016) [5]
मातृ कंपनी रेल मंत्रालय (भारत)
प्रभाग 18 रेलवे मण्डल 2019
वेबसाइट भारतीय रेल
System map
Indian Railways route map
IR
अवस्थिति India
प्रचालन की तिथियां 8 मई 1845 (1845-05-08)–Present
रेल गेज 1,676 मि॰मी॰ (5 फीटइंच)
1,000 मि.मी. (3 फीट 3⅜ इंच)
762 मि॰मी॰ (2 फीटइंच)
610 मि॰मी॰ (2 फीट)
विद्युतीकरण 33,057 किलोमीटर (108,455,000 फीट)
लंबाई 67,368 किलोमीटर (221,024,000 फीट) (route)[6]
93,902 किलोमीटर (308,077,000 फीट) (running track)
121,407 किलोमीटर (398,317,000 फीट) (total track)[6]
1855 के चित्र में छोटा थाने पुल है।
1855 में थाने से कल्याण जाती एक गाड़ी। चित्र में गाड़ी लंबा थाने पुल के ऊपर से गुजर रही है।
यार्ड में खड़ी एक गतिमान रेल।

अर्थव्यस्था में अंतर्देशीय परिवहन का रेल मुख्य माध्यम है। यह ऊर्जा सक्षम परिवहन मोड, जो बड़ी मात्रा में जनशक्ति के आवागमन के लिए बड़ा ही आदर्श एवं उपयुक्त है, बड़ी मात्रा में वस्तुओं को लाने ले जाने तथा लंबी दूरी की यात्रा के लिए अत्यन्त उपयुक्त है। यह देश की जीवनधारा है और इसके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए इनका महत्वपूर्ण स्थान है। सुस्थापित रेल प्रणाली देश के दूरतम स्‍थानों से लोगों को एक साथ मिलाती है और व्यापार करना, दृश्य दर्शन, तीर्थ और शिक्षा संभव बनाती है। यह जीवन स्तर सुधारती है और इस प्रकार से उद्योग और कृषि का विकासशील त्वरित करने में सहायता करता है।

भारत में रेलों की शुरुआतसंपादित करें

पहली बार के लिए प्रस्ताव रेलवे में भारत में किए गए थे मद्रास में 1832.[9] पहली ट्रेन में भारत से भागा लाल पहाड़ियों के लिए Chintadripet पुल में 1837. यह कहा जाता था रेड हिल रेलवे और एक रोटरी स्टीम लोकोमोटिव द्वारा निर्मित विलियम एवरी. रेलवे द्वारा बनाया गया था, सर आर्थर कॉटन गया था और मुख्य रूप से परिवहन के लिए इस्तेमाल किया ग्रेनाइट पत्थरों के लिए सड़क निर्माण के काम में मद्रास. 1845 में कपास बनाया गोदावरी बांध निर्माण में रेलवे Dowleswaram में राजामंड्रीकरने के लिए इस्तेमाल किया आपूर्ति के लिए पत्थर के निर्माण के एक बांध से गोदावरीहै । पर 8 मई 1845, मद्रास रेलवे शामिल किया गया था, और ईस्ट इंडिया रेलवे (EIR) शामिल किया गया था उसी वर्ष है. पर 1 अगस्त 1849 में ग्रेट इंडियन प्रायद्वीपीय रेलवे (GIPR) शामिल किया गया था संसद के एक अधिनियम द्वारा। 1851 में सोलानी जलसेतु रेलवे में बनाया गया था, रुड़की, द्वारा hauled एक भाप इंजन कहा जाता थॉमसनके नाम पर रखा एक ब्रिटिश अधिकारी है । यह परिवहन के लिए इस्तेमाल किया निर्माण सामग्री के लिए एक जलसेतु पर सोलानी नदी है ।

सन् 1848 में बम्बई में ग्रेट इण्डियन पेनिनसुला रेलवे कम्पनी की स्थापना की गई थी। सन् 1850 में इसी कम्पनी ने बम्बई से थाणे तक रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारम्भ किया गया था।[10] इसी वर्ष हावड़ा से रानीगंज तक रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ। सन् 1853 में बहुत ही मामूली शुरूआत से जब पहली अप ट्रेन ने मुंबई से थाणे तक (34 कि॰मी॰ की दूरी) की दूरी तय की थी[9][11][12] [13], अब भारतीय रेल विशाल नेटवर्क में विकसित हो चुका है। इसके 115,000 कि॰मी॰मार्ग की लंबाई पर 7,172 स्‍टेशन फैले हुए हैं।[14] उनके पास 7,910 इंजनों का बेड़ा हैं; 42,441 सवारी सेवाधान, 5,822 अन्‍य कोच यान, 2,22,379 वैगन (31 मार्च 2005 की स्थिति के अनुसार)। भारतीय रेल बहुल गेज प्रणाली है; जिसमें चौडी गेज (1.676 मि मी) मीटर गेज (1.000 मि मी); और पतली गेज (0.762 मि मी. और 610 मि. मी) है। उनकी पटरियों की लंबाई क्रमश: 89,771 कि.मी; 15,684 कि॰मी॰ और 3,350 कि॰मी॰ है। जबकि गेजवार मार्ग की लंबाई क्रमश: 47,749 कि.मी; 12,662 कि॰मी॰ और 3,054 कि॰मी॰ है। कुल चालू पटरियों की लंबाई 84,260 कि॰मी॰ है जिसमें से 67,932 कि॰मी॰ चौडी गेज, 13,271 कि॰मी॰ मीटर गेज और 3,057 कि॰मी॰ पतली गेज है। लगभग मार्ग किलो मीटर का 28 प्रतिशत, चालू पटरी 39 प्रतिशत और 40 प्रतिशत कुल पटरियों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

मुख्य खण्डसंपादित करें

भारतीय रेल के दो मुख्‍य खंड हैं - भाड़ा/माल वाहन और सवारी। भाड़ा खंड लगभग दो तिहाई राजस्‍व जुटाता है जबकि शेष सवारी यातायात से आता है। भाड़ा खंड के भीतर थोक यातायात का योगदान लगभग 95 प्रतिशत से अधिक कोयले से आता है। वर्ष 2002-03 से सवारी और भाड़ा ढांचा यौक्तिकीकरण करने की प्रक्रिया में वातानुकूलित प्रथम वर्ग का सापेक्ष सूचकांक को 1400 से घटाकर 1150 कर दिया गया है। एसी-2 टायर का सापेक्ष सूचकांक 720 से 650 कर दिया गया है। एसी प्रथम वर्ग के किराए में लगभग 18 प्रतिशत की कटौती की गई है और एसी-2 टायर का 10 प्रतिशत घटाया गया है। 2005-06 में माल यातायात में वस्‍तुओं की संख्‍या 4000 वस्‍तुओं से कम करके 80 मुख्‍य वस्‍तु समूह रखा गया है और अधिक 2006-07 में 27 समूहों में रखा गया है। भाड़ा प्रभारित करने के लिए वर्गों की कुल संख्‍या को घटाकर 59 से 17 कर दिया गया है।[15]

अन्तर्गत उपक्रमसंपादित करें

भारत में रेल मंत्रालय, रेल परिवहन के विकास और रखरखाव के लिए नोडल प्राधिकरण है। यह विभन्‍न नीतियों के निर्माण और रेल प्रणाली के कार्य प्रचालन की देख-रेख करने में रत है। भारतीय रेल के कार्यचालन की विभिन्‍न पहलुओं की देखभाल करने के लिए इसने अनेकानेक सरकारी क्षेत्र के उपक्रम स्‍थापित किये हैं [16][17][18]:-

  • रेल इंडिया टेक्‍नीकल एवं इकोनॉमिक सर्विसेज़ लिमिटेड (आर आई टी ई एस)
  • इंडियन रेलवे कन्‍स्‍ट्रक्‍शन (आई आर सी ओ एन) अंतरराष्‍ट्रीय लिमिटेड
  • इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आई आर एफ सी)
  • कंटनेर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सी ओ एन सी ओ आर)
  • कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (के आर सी एल)
  • इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्‍म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आई आर सी टी आर)
  • रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (रेलटेल)
  • मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एम आर वी सी लिमिटेड.)
  • रेल विकास निगम लिमिटेड (आर वी एन आई)

अनुसंधान, डिज़ाइन और मानक संगठनसंपादित करें

आरडीएसओ के अतिरिक्‍त लखनऊ में अनुसंधान और विकास स्‍कंध (आर एंड डी) भारतीय रेल का है। यह तकनीकी मामलों में मंत्रालय के परामर्शदाता के रूप में कार्य करता है। यह रेल विनिर्माण और डिज़ाइनों से संबद्ध अन्‍य संगठनों को भी परामर्श देता है। 'रेल सूचना प्रणाली के लिए भी केंद्र है (सीआरआईएस)', जिसकी स्‍थापना विभिन्‍न कम्‍प्‍यूटरीकरण परियोजनाओं का खाका तैयार करने और क्रियान्‍वयन करने के लिए की गई है। इनके साथ-साथ छह उत्‍पादन यूनिटें हैं जो रोलिंग स्‍टॉक, पहिए, एक्‍सेल और रेल के अन्‍य सहायक संघटकों के विनिर्माण में रत हैं अर्थात, चितरंजन लोको वर्क्स; डीजल इंजन आधुनिकीकरण कारखाना; डीजल इंजन कारखाना; एकीकृत कोच फैक्‍टरी; रेल कोच फैक्‍टरी; और रेल पहिया फैक्‍टरी।

देश के विकास में योगदानसंपादित करें

देश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की त्‍वरित प्रगति ने रेल परिवहन की उच्‍च स्‍तरीय मांग का सृजन किया है, विशेषकर मुख्‍य क्षेत्रकों में जैसे कोयला, लौह और इस्‍पात अयस्‍क, पेट्रोलियम उत्‍पाद और अनिवार्य वस्‍तुएं जैसे खाद्यान्‍न, उर्वरक, सीमेंट, चीनी, नमक, खाद्य तेल आदि। तद्नुसार भारतीय रेल में रेल प्रौद्योगिकी की प्रगति को आत्‍मसात करने के लिए अनेकानेक प्रयास किए हैं और बहुत से रेल उपकरणों जैसे रोलिंग स्‍टॉक के उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर हो गया है। यह ईंधन किफायती नई डिज़ाइन के उच्‍च हॉर्स पावर वाले इंजन, उच्‍च गति के कोच और माल यातायात के लिए आधुनिक बोगियों को कार्य में लगाने की प्रक्रिया कर रहा है। आधुनिक सिग्‍नलिंग जैसे पैनल-इंटर लॉकिंग, रूट रीले इंटर लॉकिंग, केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण, स्‍वत: सिग्‍नलिंग और बहु पहलू रंगीन प्रकाश सिग्‍नलिंग की भी शुरूआत की जा रही है।

आधुनिकीकरणसंपादित करें

ऐसे नेटवर्क को आधुनिक बनाने, सुदृढ़ करने और इसका विस्‍तार करने के लिए भारत सरकार निजी पूंजी तथा रेल के विभिन्‍न वर्गों में, जैसे पत्‍तन में- पत्‍तन संपर्क के लिए परियोजनाएं, गेज परिवर्तन, दूरस्‍थ/पिछड़े क्षेत्रों को जोड़ने, नई लाइन बिछाने, सुंदरबन परिवहन आदि के लिए राज्‍य निधियन को आ‍कर्षित करना चाहती है। इसके अतिरिक्‍त सरकार ने दिल्‍ली, मुंबई, चैन्नई, बैंगलूर, हैदराबाद और कोलकाता मेट्रोपोलिटन शहरों में रेल आधारित मास रेपिड ट्रांज़िट प्रणाली शुरू की है। परियोजना का लक्ष्‍य, शहरों के यात्रियों के लिए विश्‍वसनीय सुरक्षित एवं प्रदूषण रहित यात्रा मुहैया कराना है। यह परिवहन का सबसे तेज साधन सुनिश्चित करती है, समय की बचत करती एवं दुर्घटना कम करती है। इस परियोजना ने उल्‍लेखनीय प्रगति की है। विशेषकर दिल्‍ली मेट्रो रेल परियोजना का कार्य निष्‍पादन स्‍मरणीय है। दिल्‍ली मेट्रो का पहला चरण पूरी तरह कार्यरत है और यह अपने नेटवर्क का विस्‍तार राजधानी शहर के बाहर कर रहा है।

मूल संरचना विकाससंपादित करें

भारत में रेल मूल संरचना के विकास में निजी क्षेत्रों की भागीदारी का धीरे-धीरे विस्‍तार हो रहा है, मान और संभावना दोनों में। उदाहरण के लिए, पीपावाव रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीआरसीएल) रेल परिवहन में पहला सरकारी निजी भागीदारी का मूल संरचना मॉडल है। यह भारतीय रेल और गुजरात पीपावाव पोर्ट लिमिटेड की संयुक्‍त उद्यम कंपनी है, जिसकी स्‍थापना 271 कि॰मी॰ लंबी चौडी गेज रेल लाइंस का निर्माण, रखरखाव और संचालन करने के लिए की गई है, यह गुजरात राज्‍य में पीपावाव पत्‍तन को पश्चिमी रेल के सुरेन्‍द्र नगर जंक्‍शन से जोडती है।

[14]

रेल बजटसंपादित करें

इसके अतिरिक्‍त रेल को बजटीय सहायता वर्षनुवर्ष बढ़ रही है। रेल बजट 2007-08, के अनुसार वर्ष 2006-07 के प्रथम नौ माहों के दौरान रेल ने रिकॉर्ड तोड़ निष्‍पादन दर्शाया है। सवारी लाभ 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़ा है और इसी अवधि में अन्‍य कोचिंग अर्जन 48 प्रतिशत बढ़ा है। सत्रह प्रतिशत की एक ऐतिहासिक वृद्धि माल अर्जन और सकल यातायात अर्जन, दोनों में दर्ज की गई है। सकल यातायात राजस्‍व 63,120 करोड़ रुपए अनुमानित है जो विगत वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है और बजट अनुमान से 5.5 प्रतिशत अधिक है।

साल 2017 में आये रेलवे बजट में भारतीय रेल व्यवस्था को सुधरने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाये गए | इस क़दमों की सूचि इस प्रकार है:

1. रेल सुरक्षा निधि + 100,000 करोड़ रुपये के एक कोष के साथ 5 साल की अवधि में बनाया जाएगा

2. आईआरसीटीसी के जरिए आरक्षित रेल टिकट पर सेवा शुल्क वापस ले लिया जाएगा।

3. लिफ्टों और एस्केलेटर प्रदान करके 500 से अधिक रेलवे स्टेशनों को अलग-अलग तरीके से अनुकूल बनाया जाएगा।

4. तीर्थयात्रा और पर्यटन के लिए समर्पित गाड़ियों को लॉन्च करने के लिए कदम उठाए जाएंगे

5. एक नई मेट्रो रेल नीति घोषित की जाएगी + उम्मीद है कि युवाओं के लिए नई नौकरियां खुलेंगी

6. 2017-18 के दौरान कम से कम 25 ट्रेन स्टेशनों की उम्मीद की जाती है

7. 201 9 तक, भारतीय रेल के सभी कोचों को जैव-शौचालयों के साथ फिट किया जाएगा

8. साझेदारी के माध्यम से चयनित वस्तुओं के लिए परिवहन समाधान समाप्त करने के लिए रेलवे एकीकृत होगा

9. मानव रहित रेलवे स्तरीय क्रॉसिंग को 2020 तक समाप्त किया जाएगा

महत्वपूर्ण रेल एवं उपलब्धियाँसंपादित करें

रेलक्षेत्रसंपादित करें

भारतीय रेल नेटवर्क का योजनामूलक मानचित्र

प्रशासनिक सुविधा एवं रेलों के परिचालन की सुविधा की दृष्टि से भारतीय रेल को सत्रह क्षेत्र या जोन्स में बाँटा गया है।

क्रमांक नाम संक्षेप स्थापना समय मुख्यालय मंडल
1. उत्तर रेलवे उरे 14 अप्रैल, 1952 दिल्ली अंबाला, फिरोजपुर, लखनऊ, मुरादाबाद
2. पूर्वोत्तर रेलवे उपूरे 1952 गोरखपुर इज्जत नगर, लखनऊ, वाराणसी
3. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पूसीरे 1958 गुवाहाटी अलीपुर द्वार, कटिहार, लामडिंग, रंगिया, तिनसुकिया
4. पूर्व रेलवे पूरे अप्रैल, 1952 कोलकाता हावड़ा, सियालदह, आसनसोल, मालदा
5. दक्षिणपूर्व रेलवे दपूरे 1955 कोलकाता आद्रा, चक्रधरपुर, खड़गपुर, राँची
6. दक्षिण मध्य रेलवे दमरे 2 अक्टूबर, 1966 सिकंदराबाद सिकंदराबाद, हैदराबाद, गुंटकल, गुंटूर, नांदेड़, विजयवाड़ा
7. दक्षिण रेलवे दरे 14 अप्रैल, 1951 चेन्नई चेन्नई, मदुरै, पालघाट, तिरुचुरापल्ली, त्रिवेंद्रम, सलेम (कोयंबतूर)
8. मध्य रेलवे मरे 5 नवंबर, 1951 मुंबई मुंबई, भुसावल, पुणे, शोलापुर, नागपुर
9. पश्चिम रेलवे परे 5 नवंबर, 1951 मुंबई मुंबई सेंट्रल, वदोदरा, रतलाम, अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर
10. दक्षिण पश्चिम रेलवे दपरे 1 अप्रैल, 2003 हुबली हुबली, बैंगलोर, मैसूर
11. उत्तर पश्चिम रेलवे उपरे 1 अक्टूबर, 2002 जयपुर जयपुर, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर
12. पश्चिम मध्य रेलवे पमरे 1 अप्रैल, 2003 जबलपुर जबलपुर, भोपाल, कोटा
13. उत्तर मध्य रेलवे उमरे 1 अप्रैल, 2003 इलाहाबाद इलाहाबाद, आगरा, झांसी
14. दक्षिणपूर्व मध्य रेलवे दपूमरे 1 अप्रैल, 2003 बिलासपुर बिलासपुर, रायपुर, नागपुर
15. पूर्व तटीय रेलेवे पूतरे 1 अप्रैल, 2003 भुवनेश्वर खुर्दा रोड, संबलपुर, विशाखापत्तनम
16. पूर्वमध्य रेलवे पूमरे 1 अक्टूबर, 2002 हाजीपुर दानापुर, धनबाद, मुगलसराय, सोनपुर, समस्तीपुर
17. कोंकण रेलवे† केआर 26 जनवरी, 1998 नवी मुंबई कोई नहीं

कोंकण रेलवे भारतीय रेल के एक अनुषांगिक इकाई के रूप में परंतु स्वायत्त रूप से परिचालित होनेवाली रेल व्यवस्था है जिसका मुख्यालय नवी मुंबई के बेलापुर में रखा गया है। यह सीधे रेलवे बोर्ड एवं केंद्रीय रेलमंत्री के निगरानी में काम करता है।

यद्यपि कोलकाता मेट्रो भारतीय रेल द्वारा ही संचालित होती है परंतु इसे किसी जोन में नहीं रखा गया है। प्रशासनिक रूप से इसे एक क्षेत्रीय रेलवे के रूप में देखा जाता है। हर जोन में कुछ रेलमंडल होते हैं, इस समय भारत में कुल 67 रेलमंडल है जो उपरोक्त 18 रेल-क्षेत्र (जोन) के अंतर्गत कार्य करते हैं। The new railway zone - Southern Coast Railway - will be headquartered in Visakhapatnam, Mr Goyal said, adding that it will be the h zone in t18the country.

विविधसंपादित करें

रेल ईंजन निर्माण केंद्र
  • चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन (विद्युत इंजन)
  • डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी (डीजल इंजन)
  • डीजल कम्पोनेट वर्क्स, पटियाला (डीजल इंजन के पूर्जे)
  • टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कम्पनी लिमिटेड, चितरंजन (डीजल इंजन)
  • डीजल लोकोमोटिव कंपनी, जमशेदपुर (डीजल इंजन)
  • भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, भोपाल (डीजल इंजन)
रेल डिब्बे निर्माण केंद्र
  • इंटीग्रल कोच फैक्ट्री पैराम्बूर (चेन्नई) बी.जी.डिब्बा निर्माण
  • रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला (पंजाब) बी.जी. डिब्बा निर्माण
  • चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन
  • भारत अर्थमूवर्स लिमिटेड बेंगलुरु (कर्नाटक)
  • जेसफ़ एंड कंपनी लिमिटेड, कोलकाता (पं.बंगाल)
  • व्हील एंड एक्सेल, बेंगलुरु (कर्नाटक)
रेलवे प्रशिक्षण केंद्र
  • इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मेकेनिकल एंड इलिक्ट्रोनिक, इंजीनियरिंग, जमालपुर।
  • रेलवे स्टाफ कालेज, बड़ौदा
  • इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड हेली कम्यूनिकेशन, सिकंदराबाद।
  • इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग, पुणे
  • इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, नासिक।

प्रमुख रेलगाड़ियाँसंपादित करें

भारत में मेल एक्स्प्रेस गाड़ियों की सूची भी देखें।

राजधानी एक्सप्रेस – ये रेलगाड़ी भारत के मुख्य शहरों को सीधे राजधानी दिल्ली से जोडती हुयी एक वातानुकूलित रेल है इसलिए इसे राजधानी एक्सप्रेस कहते है | ये भी भारत की सबसे तेज रेलगाड़ियो में शामिल है जो लगभग 130-140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक चल सकती है | इसकी शुरुआत 1969 में हुयी थी

गतिमान एक्सप्रेस – दिल्ली से आगरा के बीच 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली भारत की सबसे तेज रेल | ये रेल हजरत निजामुद्दीन से आगरा की 188 किमी दूरी मात्र 100 मिनट में ततय कर लेती है |

शताब्दी एक्सप्रेस– शताब्दी रेल वातानुकूलित इंटरसिटी रेल है जो केवल दिन में चलती है | भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज रेलों में से एक है जो दिल्ली से Habibganj (bhopal)के बीच चलती है | ये रेलगाड़ी 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुच सकती है | इसकी शुरुवात 1988 में हुयी थी |

दुरोंतो एक्सप्रेस - 2009 में में शुरू हुयी यह रेल सेवा एक नॉन स्टॉप रेल है जो भारत के मेट्रो शहरों और राज्यों की राजधानियों को आपस में जोडती है | इस रेल की रफ्तार लगभग राजधानी एक्सप्रेस के बराबर है |

एसी एक्सप्रेस– ये पूर्ण वातानुकूलित रेलगाड़ी भारत के मुख्य शहरों को आपस में जोडती है | ये भी भारत की सबसे तेज रेलगाड़ियो से शामिल है जिसकी रफ्तार लगभग 130 किमी प्रति घंटा है |

तेजस एक्सप्रेस – ये भी शताब्दी एक्सप्रेस की तह पूर्ण वातानुकूलित रेलगाडी है लेकिन शताब्दी एक्सप्रेस से हटकर इसमें स्लीपर कोच भी है जो लम्बी दूरी के लिए काम आती है |

डबल डेकर एक्सप्रेस – ये भी शताब्दी एक्सप्रेस की तरह पूर्ण वातानुकूलित दो मंजिला एक्सप्रेस रेल है | ये केवल दिन के समय सफर करती है और भारत की सबसे तेज रेलों में शामिल है |

उदय एक्सप्रेस – दो मंजिला , पूर्ण वातानुकूलित ,उच्च प्राथमिकता , सिमीत स्टॉप , रात्रि यात्रा के लिए अच्छी

जन शताब्दी एक्सप्रेस – शताब्दी एक्सप्रेस की सस्ती किस्म , गति 130 किमी प्रति घंटा , AC और Non-AC दोनों

गरीब रथ – वातानुकूलित , गति अधिकतम 130 किमी प्रति घंटा , साधारण कोच से लेकर 3 टियर इकॉनमी बर्थ

हमसफर एक्सप्रेस – पूर्ण वातानुकूलित 3 टियर AC कोच रेलगाड़ी

सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस – राजधानी दिल्ली से जोडती सुपर एक्सप्रेस रेलगाड़ी

युवा एक्सप्रेस – 60 प्रतिशत से ज्यादा सीट 18-45 साल के यात्रियों के लिए रिज़र्व

कवि गुरु एक्सप्रेस – रविन्द्रनाथ टैगोर के सम्मान में शुरू रेलगाड़ी

विवेक एक्सप्रेस – स्वामी विवेकानंद की 150वी वर्षगांठ पर 2013 में शुरू

सुपरफ़ास्ट एक्सप्रेस – लगभग 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली गाडिया

इंटरसिटी एक्सप्रेस – महत्वपूर्ण शहरों को आपस में जोड़ने के लिए छोटे रूट वाली गाडिया

राज्य रानी एक्सप्रेस-राज्यों की राजधानियों को महत्वपूर्ण शहरों से जोडती रेलगाड़ी

फास्ट पैसेंजर – हर स्टेशन पर रुकने वाली धीमी रेलगाड़िया (40-80 किमी प्रति घंटा) , जो सबसे सस्ती रेलगाड़िया होती है |

सबअर्बन एक्सप्रेस – शहरी इलाको जैसे मुम्बई ,दिल्ली ,कोलकाता ,चेन्नई ,हैदाराबाद ,अहमदाबाद ,पुणे आदि में चलने वाली रेलगाड़िया , जो हर स्टेशन पर रुकती है और जिसमे अनारक्षित सीट होती है |

अन्त्योदय और जन साधारण एक्सप्रेस – पूर्ण रूप से अनारक्षित रेल

महामना एक्सप्रेस – आधुनिक सुविधाओं युक्त रेलगाड़ी

पर्यटक रेलगाड़िया – पैलेस ऑन व्हील्स , महाराजा एक्सप्रेस और The Golden Chariot जैसे पर्यटक रेलगाड़िया

हेरिटेज ट्रेन दार्जिलिंग हिमालय रेलवे – इसे टॉय ट्रेन भी कहते है जो दार्जिलिंग के पहाडी इलाको में चलती है |

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. सुधीर पाल सिंह (१६-०२-२०१५). "18 interesting facts about India Railways". बिज़नेस स्टैन्डर्ड. अभिगमन तिथि १२-०१-२०१६. |accessdate=, |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. "[IRFCA] Indian Railways FAQ: IR History: Early Days - 1". www.irfca.org.
  3. [1]
  4. "Indian Railways Budget Documents 2018-19" (PDF). Ministry of Railway. अभिगमन तिथि 22 February 2018.
  5. [2]
  6. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; stats-summary नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  7. "Indian Railways Statistical Publications 2016-17: Statistics for Track and Bridges - Indian Railways" (PDF). Ministry of Railway. अभिगमन तिथि 22 February 2018.
  8. "Indian Railways Statistical Publications 2016-17: Passenger Business" (PDF). Ministry of Railway. पृ॰ 23. अभिगमन तिथि 2 March 2018.
  9. "[IRFCA] India's First Railways". www.irfca.org.
  10. भारतीय रेल के इतिहास के बारे में "History of Indian Railway in Hindi"
  11. "164 Years Ago On This Day, India's First Train Ran From Mumbai To Thane".
  12. "India's 1st train: When Sahib, Sindh & Sultan blew steam - Times of India".
  13. "Facts about the Indian Railways that will surprise you!". 11 December 2015.
  14. राष्ट्रीयकृत
  15. "History of Railways". www.kportal.indianrailways.gov.in.
  16. "Organization Structure" (PDF). Indian Railways. 2015. अभिगमन तिथि 2 March 2017.
  17. "Indian Railways Report" (PDF). Indian Railways. 2015. अभिगमन तिथि 2 March 2017.
  18. "Indian Railways Annual Publication 2016-17 - Undertakings" (PDF). 28 February 2018.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें