फ़ुस्सिलत

इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरआन का 41 वां सूरा या अध्याय है। दूसरा नाम "हा. मीम. अस्-सज्दा"
(फ़ुस्सिलात से अनुप्रेषित)

सूरा फ़ुस्सिलात (इंग्लिश: Fussilat, उर्दू: حم السجدہ"हा. मीम. अस्-सज्दा") इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरआन का 41 वां सूरा या अध्याय है। इसमें 54 आयतें हैं।

नामसंपादित करें

सूरा 'हा. मीम. अस्-सज्दा[1]का दूसरा नाम सूरा  फ़ुस्सिलत[2] भी है, इस सूरा का नाम दो शब्दों से मिलाकर बना है। एक हा. मीम., दूसरे अस-सजदा। मतलब यह है कि वह सूरा जिसका आरम्भ हा. मीम. से होता है और इसमें एक स्थान पर सजदा की आयत आई है।

अवतरणकालसंपादित करें

मक्कन सूरा अर्थात पैग़म्बर मुहम्मद के मक्का के निवास के समय अवतरित हुई।

मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी लिखते हैं कि विश्वस्त उल्लेखों के अनुसार इसका अवतरणकाल हज़रत हमज़ा (रजि.) के ईमान लाने के बाद और हज़रत उमर (रजि.) के ईमान लाने से पहले है। प्रसिद्ध ताबई मुहम्मद बिन काब अल-फ़र्जी (से उल्लिखित है कि ) एक बार कुरैश के कुछ सरदार मस्जिदे हराम में महफ़िल जमाए बैठे थे और मस्जिद के एक दूसरे गोशे में के रसूल (सल्ल.) अकेले मौजूद थे। उतबा बिन रबीआ ने क़ुरैश के सरदारों (के परामर्श से नबी (सल्ल.) के पास जाकर) कहा, "भतीजे, यह काम जो तुमने शुरू किया है , इससे यदि तुम्हारा उद्दश्य धन प्राप्त करना है तो हम सब मिलकर तुम को इतना कुछ दे देते हैं कि तुम हममें सबसे अधिक धनवान हो जाओ। यदि इससे अपनी बड़ाई चाहते हो तो हम तुम्हें अपना सरदार बना लेते हैं। यदि बादशाही चाहते हो तो हम तुम्हे अपना बादशाह बना लेते हैं और यदि तुमपर कोई जिन्न आता है तो हम अपने ख़र्च पर तुम्हारा इलाज कराते हैं। " उतबा यह बाते करता रहा और नबी (सल्ल.) चुपचाप सुनते रहे। फिर आपने कहा, “ऐ अबुल वलीद! आपको जो कुछ कहना था कह चुके? ”उसने कहा , “ हाँ।" आप (सल्ल.) ने कहा , “अच्छा, अब मेरी सुनो।' इसके बाद आपने बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम (अल्लाह के नाम से जो अत्यन्त कृपाशील और दयावान् है) पढ़कर इसी सूरा को पढ़ना शुरू किया और उतबा अपने दोनों हाथ पीछे ज़मीन पर टेके ध्यान से सुनता रहा। सजदा की आयत 38 पर पहुँचकर आपने सजदा किया और सिर उठाकर कहा , “ऐ अबुल वलीद! मेरा जवाब आपने सुन लिया; अब आप जाने और आपका काम । ” उतबा उठकर कुरैश के सरदारों के पास वापस आया और उनसे उसने कहा : “ अल्लाह की क़सम , मैंने ऐसी वाणी सुनी कि कभी इससे पहले नहीं सुनी थी। ईश्वर की सौगन्ध , न यह काव्य है , न जादू है , न कहानत (भविष्य-वक्ताओं की वाणी)। ऐ कुरैश के सरदारो! मेरी बात मानो और इस व्यक्ति को इसके हाल पर छोड़ दो। मैं समझता हूँ कि यह वाणी कुछ रंग लाकर रहेगी। कुरैश के सरदार उसकी -ये बात सुनते ही बोल उठे , “वलीद के पिता , आख़िर उसका जादू तुमपर भी चल गया । ” ( इब्नेहिशाम भाग -1 , पृ . 313-314 )

विषय और वार्तासंपादित करें

मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी लिखते हैं कि उतबा की इस बातचीत के जवाब जो अभिभाषण अल्लाह की ओर से अवतरित हुआ उसमें उन अनर्गल बातों की ओर सिरे से कोई ध्यान नहीं दिया गया, जो उसने नबी (सल्ल.) से कही थीं और केवल उस विरोध को वार्ता का विषय बनाया गया है जो कुरआन मजीद के आमंत्रण को नीचा दिखाने के लिए मक्का के काफ़िरों की ओर से उस समय अत्यन्त हठधर्मी और दुराचार के साथ किया जा रहा था। इस अन्धे और बहरे विरोध के उत्तर में जो कुछ कहा गया है उसका सारांश यह है :

(1) यह अल्लाह की अवतरित की हुई वाणी है और अरबी भाषा में है । अज्ञानी लोग इसमें ज्ञान या कोई प्रकाश नहीं पाते , किन्तु समझ-बूझ रखनेवाले उस प्रकाश को देख भी रहे हैं और उससे लाभ भी उठा रहे हैं।

(2) तुमने यदि अपने दिलों पर आवरण डाल रखें हैं और अपने कान बहरे कर लिए हैं तो नबी को यह काम नहीं सौंपा गया है कि (वह ज़बरदस्ती तुम्हें अपनी बात सुन। वह तो) सुनने वालों ही को सुना सकता है और समझनेवालों ही को समझा सकता है।

(3) तुम चाहे अपनी आँखें और कान बन्द कर लो और अपने दिलों पर परदा डाल लो , किन्तु सत्य तो यही है कि तुम्हारा ईश्वर बस एक ही है। और तुम के बन्दे नहीं हो।

(4) तुम्हें कुछ एहसास भी है कि ये बहुदेववाद और इनकार की नीति तुम किसके साथ अपना रहे हो? उस ईश्वर के साथ जो तुम्हारा और सारे जगत् का सृष्टा , मालिक और दाता है। उसका साझीदार तुम उसकी तुच्छ सृष्ट वस्तुओं को बनाते हो ?

(5) अच्छा, नहीं मानते हो तो सावधान हो जाओ कि तुमपर उसी तरह यातना सहसा टूट पड़ने के लिए तैयार है जैसा कि आद और समूद जातियों पर आई थी।

(6) बड़ा ही अभागा है वह मनुष्य जिसके साथ जिन्नों और मानवों में से ऐसे शैतान लग जाएँ जो उसकी मूर्खताओं को उसके समक्ष सुन्दर बनाकर प्रस्तुत करें। इस तरह के नादान लोग आज तो यहाँ एक-दूसरे को बढ़ावे-चढ़ावे दे रहे हैं किन्तु क़ियामत के दिन इनमें से हरेक कहेगा : जिन लोगों ने मुझे बहकाया था, वह मेरे हाथ लग जाएँ तो उन्हें पाँव तले रौंद डालूँ।

(7) यह क़ुरआन एक अटल किताब है । इसे तुम अपनी घटिया चालों और झूठ के हथियारों से पराजित नहीं कर सकते।

(8) तुम कहते हो कि यह कुरआन किसी गैर-अरबी भाषा में आना चाहिए था । किन्तु अगर गैर-अरबी भाषा में इसे भेजते तो तुम्हीं लोग कहते कि यह भी विचित्र हास्य है , अरब जाति के मार्गदर्शन के लिए गैर-अरबी भाषा में वार्तालाप किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि तुम्हें वास्तव में मार्गदर्शन अभीष्ट ही नहीं है।

(9) कभी तुमने यह भी सोचा कि यदि वास्तव में सत्य ही सिद्ध हुआ कि यह कुरआन अल्लाह की ओर से है तो इसका इनकार करके तुम किस परिणाम को पहुँचोगे।

(10) आज तुम नहीं मान रहे हो , किन्तु शीघ्र ही तुम अपनी आँखों से देख लोगे कि इस क़ुरआन का आह्वान सम्पूर्ण विश्व पर छा गया है और तुम स्वयं उससे पराजित हो चुके हो।

विरोधियों को यह उत्तर देने के साथ उन समस्याओं की ओर भी ध्यान दिया गया है जो उस कठिन रुकावटों के वातावरण में ईमानवालों और स्वयं नबी (सल्ल.) समक्ष थीं। ईमानवालों को यह कहकर हिम्मत बँधाई गई कि तुम वास्तव में बेयार और बे-मददगार के नहीं हो, बल्कि जो व्यक्ति ईमान की राह पर जम जाता है , अल्लाह के फ़रिश्ते उसपर अवतरित होते हैं और दुनिया से लेकर आख़िरत (परलोक) तक उसका साथ देते हैं । नबी (सल्ल.) को बताया गया कि (आह्वान की राह में आड़े आनेवाली) चट्टानें देखने में बड़ी कठोर दिखाई देती है, किन्तु सुशीलता का हथियार है जो उन्हें तोड़कर और पिघलाकर रख देगा। धैर्य के साथ उससे काम लो और जब कभी शैतान उत्तेजित करके किसी दूसरे हथियार से काम लेने पर उकसाए तो अल्लाह से पनाह माँगो।

सुरह "हा. मीम. अस्-सज्दा" या फुस्सीलत का अनुवादसंपादित करें

अल्लाह के नाम से जो दयालु और कृपाशील है।

इस सूरा का प्रमुख अनुवाद:

क़ुरआन की मूल भाषा अरबी से उर्दू अनुवाद "मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ खान", उर्दू से हिंदी "मुहम्मद अहमद" [3]ने किया।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

पिछला सूरा:
ग़ाफिर
क़ुरआन अगला सूरा:
अश-शूरा
सूरा 41

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सन्दर्भ:संपादित करें

  1. अनुवादक: मौलाना फारूक़ खाँ, भाष्य: मौलाना मौदूदी. अनुदित क़ुरआन संक्षिप्त टीका सहित. पृ॰ 680 से.
  2. "सूरा  फ़ुस्सिलत'". https://quranenc.com. मूल से 23 जून 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 जुलाई 2020. |website= में बाहरी कड़ी (मदद)
  3. "Fussilat सूरा का अनुवाद". https://tanzil.net. मूल से 25 अप्रैल 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 जुलाई 2020. |website= में बाहरी कड़ी (मदद)

बाहरी कडियाँसंपादित करें

इस सूरह का दूसरे अनुवादकों द्वारा किया अनुवाद क़ुरआन प्रोजेक्ट पर देखें Fussilat 41:1